अदालत ने दिया बिना पेंशन की राशि में से 20 लाख कटौती के खिलाफ आदेश, 72.06 लाख रुपये पुरस्कार सुनिश्चित किए गए |
सुप्रीम कोर्ट ने जबलपुर हाईकोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया। इसका अर्थ है कि मध्य प्रदेश के मंडला जिले के उद्यान अधिकारी विश्राम सिंह के परिवार को 72 लाख 6 हजार 186 रुपये की पूरी क्षतिपूर्ति देनी होगी।

सौजन्य से:- Jagran
सेवानिवृत्ति के आधार पर मुआवजा घटाना सुप्रीम कोर्ट को मंजूर नहीं, हाईकोर्ट का आदेश निरस्त
शीर्ष कोर्ट ने जबलपुर हाई कोर्ट के 10 जुलाई 2024 के फैसले को निरस्त करते हुए हाई कोर्ट द्वारा गणना की गई 72 लाख 6 हजार 186 रुपये की पूरी क्षतिपूर्ति र ...और पढ़ें
HighLights
- मंडला के उद्यान अधिकारी की मौत के मामले में निरस्त कर दिया हाई कोर्ट का फैसला
- सड़क दुर्घटना में आय का मूल आधार खोने वाले परिवार को 72.06 लाख रुपये क्षतिपूर्ति
जेएनएन, जबलपुर। सड़क दुर्घटना में जान गंवाने वाले मध्य प्रदेश के मंडला जिले के मोहगांव निवासी उद्यान अधिकारी विश्राम सिंह के परिवार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने सेवानिवृत्ति के आधार पर क्षतिपूर्ति राशि घटाने को उचित नहीं माना।
शीर्ष कोर्ट ने जबलपुर हाई कोर्ट के 10 जुलाई 2024 के फैसले को निरस्त करते हुए हाई कोर्ट द्वारा गणना की गई 72 लाख 6 हजार 186 रुपये की पूरी क्षतिपूर्ति राशि पीड़ित परिवार को देने का आदेश दिया है। इस राशि पर दावा याचिका दायर करने की तारीख से ब्याज भी देय होगा।
यह मामला सात मार्च 2018 का है। विश्राम सिंह मोटरसाइकिल से जा रहे थे, तभी कार चालक ने लापरवाही से वाहन चलाते हुए उन्हें टक्कर मार दी। गंभीर चोटों के बाद उनकी मृत्यु हो गई।
दुर्घटना में वाहन की संलिप्तता, बीमा, चालक की लापरवाही और मृत्यु के तथ्य विवादित नहीं रहे। सुप्रीम कोर्ट में पीड़ित परिवार की ओर से सभी चरणों में क्षतिपूर्ति कम आंके जाने को अनुचित करार दिया गया।
पहले 36.59 लाख, हाई कोर्ट ने 52.16 लाख किया
मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण, एमएसीटी, जबलपुर ने परिवार को 36 लाख 59 हजार 839 रुपये क्षतिपूर्ति दी थी। बीमा कंपनी की अपील पर हाई कोर्ट ने गणना करते हुए क्षतिपूर्ति 72 लाख 6 हजार 186 रुपये निर्धारित की, लेकिन पारिवारिक पेंशन को आय में शामिल करते हुए बिना भविष्य की संभावनाओं के आधार पर राशि 52 लाख 16 हजार 377 रुपये तक सीमित कर दी।
सेवानिवृत्ति का अर्थ आय का अंत नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने सरला वर्मा और प्रणय सेठी के सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए कहा कि कानून में ऐसी कोई स्थिति नहीं है, जिसमें सरकारी सेवा से सेवानिवृत्ति के कारण मुआवजा कम हो जाए।
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कोर्ट ने कहा कि यह मान लेना भी उचित नहीं कि सेवानिवृत्ति के बाद व्यक्ति दूसरा रोजगार या अपनी पसंद का व्यवसाय नहीं कर सकता। इसी आधार पर हाई कोर्ट के निर्णय को निरस्त कर 72.06 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति बहाल कर दी गई।
मुआवजे की राशि
- एमएसीटी : 36.59 लाख रुपये
- हाई कोर्ट : 52.16 लाख रुपये
- सुप्रीम कोर्ट : 72.06 लाख रुपये
- ब्याज सहित : लगभग एक करोड़ रुपये
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