सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: अदालती वीडियो का उपयोग अब मीडिया नहीं कर सकेगी
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि कोर्ट की कार्यवाही के वीडियो या ऑडियो क्लिप्स का इस्तेमाल मुख्यधारा या मान्यता प्राप्त मीडिया संस्थान भी अपनी रिपोर्टिंग के दौरान नहीं कर सकेंगे।

सौजन्य से:- Jagran
मीडिया भी नहीं कर पाएगा अदालती वीडियो का इस्तेमाल, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला; यूट्यूब-एक्स और मेटा को नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने लाइव-स्ट्रीमिंग और अदालती कार्यवाही के वीडियो के सोशल मीडिया पर दुरुपयोग को रोकने वाले अपने पिछले आदेश पर स्पष्टीकरण जारी किया है। ...और पढ़ें
HighLights
- सुप्रीम कोर्ट ने लाइव-स्ट्रीमिंग वीडियो उपयोग पर स्पष्टीकरण जारी किया।
- मीडिया संस्थान भी अब कोर्ट कार्यवाही के वीडियो क्लिप नहीं कर पाएंगे इस्तेमाल।
- डिजिटल प्लेटफॉर्म पर वीडियो अपलोड, री-पोस्ट करने पर पूर्ण प्रतिबंध।
जागरण संवाददाता, शिमला। सुप्रीम कोर्ट ने कोर्ट की लाइव-स्ट्रीमिंग और अदालती कार्यवाही के वीडियो के सोशल मीडिया पर दुरुपयोग को रोकने वाले अपने पिछले आदेश पर एक स्पष्टीकरण जारी किया है। शीर्ष अदालत ने साफ किया है कि कोर्ट की कार्यवाही के वीडियो या ऑडियो क्लिप्स का इस्तेमाल मुख्यधारा या मान्यता प्राप्त मीडिया संस्थान भी अपनी रिपोर्टिंग के दौरान नहीं कर सकेंगे।
प्रेस और मीडिया संस्थान आम जनता को कानूनी घटनाक्रमों और फैसलों की जानकारी देने के लिए सामान्य टेक्स्ट (लिखित) रिपोर्टिंग जारी रख सकते हैं, लेकिन वीडियो क्लिपिंग्स शेयर करने के मामले में वे भी आम सोशल मीडिया यूजर्स की तरह ही प्रतिबंधों से बंधे रहेंगे।
मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली पीठ ने जनहित याचिका पर सुनवाई के पश्चात यह आदेश जारी किए। अदालत ने पाया कि 24 जुलाई 2026 को दिए गए उसके पिछले अंतरिम आदेश के पैरा 11 को लेकर कुछ भ्रम की स्थिति बनी हुई थी, जिसे स्पष्ट करना जरूरी था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यद्यपि मीडिया पर अदालती कार्यवाही की रिपोर्टिंग करने पर कोई पूर्ण प्रतिबंध नहीं है, लेकिन समाचार आउटलेट्स को भी कार्यवाही की मूल ऑडियो या वीडियो क्लिपिंग्स का उपयोग करने से पूरी तरह बचना होगा।
वे वीडियो प्रतिबंध से जुड़ी शर्तों का पालन करने के लिए कानूनी रूप से बाध्य हैं। सुप्रीम कोर्ट के सेक्रेटरी जनरल या राज्यों के हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल की लिखित अनुमति के बिना अदालती कार्यवाही की वीडियो रिकॉर्डिंग को डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर काटना, री-पोस्ट करना, अपलोड करना या उसका मुद्रीकरण करना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।
खबरें और भी
अदालत ने गूगल, यूट्यूब, एक्स (ट्विटर) और मेटा (फेसबुक, इंस्टाग्राम, वॉट्सऐप) जैसी बड़ी टेक कंपनियों को पहले ही इस मामले में प्रतिवादी बनाकर जवाब मांगा है। साथ ही सभी राज्यों के हाई कोर्ट्स को लाइव स्ट्रीमिंग के मॉडल नियमों को लागू करने की प्रगति रिपोर्ट देने को कहा है। केंद्र सरकार को नोडल मंत्रालयों के जरिए इन दिशा-निर्देशों को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए एक विस्तृत प्रस्ताव कोर्ट के सामने रखने का आदेश दिए हैं।
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