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निदा खान केस: भगवान कृष्ण के नाम पर मिली राहत, लेकिन कानूनी मुकदमा जारी रहेगा!

नासिक टीसीएस धर्मांतरण और उत्पीड़न के मामले में मुख्य आरोपी, निदा खान को भगवान कृष्ण के नाम पर जमानत मिल गई है, लेकिन उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा जारी रहेगा। अदालत में आरोप तय होने, गवाहों के बयान और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही दोषसिद्धि या बरी होने का निर्णय होगा।

11 जुलाई 2026 को 01:57 am बजे
निदा खान केस: भगवान कृष्ण के नाम पर मिली राहत, लेकिन कानूनी मुकदमा जारी रहेगा!

सौजन्य से:- Navbharat Times

लेकिन इस मामले में एक बड़ी विडंबना वाली बात हुई है। हिंदू धर्म के बारे आपत्तिजनक बातें करने, दफ्तर में लड़कियों को इस्लाम में धर्म परिवर्तन और यौन उत्पीड़न करने की आरोपी, निदा खान जो पांच महीने की गर्भवती भी है, उसे जमानत मिली, तो सनातन हिंदू धर्म के भगवान कृष्ण के संदर्भ से। मामले की सुनवाई कर रहे अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश के. जी. जोशी ने अपने आदेश में कहा कि आरोपी पांच महीने की गर्भवती है और किसी भी बच्चे को भगवान श्रीकृष्ण की तरह जेल में जन्म लेने की सामाजिक पीड़ा का सामना नहीं करना चाहिए।

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कौन है निदा खान, निदा खान केस क्या है

निदा खान, जिसके नाम से ही लोग 'नासिक टीसीएस धर्मांतरण और उत्पीड़न' मामले को निदा खान केस के नाम से भी जानते हैं, नासिक में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज TCS काम करती थी। आरोप हैं कि वह बीपीओ यूनिट में काम करने वाली महिला कर्मचारियों के यौन उत्पीड़न, ब्लैकमेलिंग और जबरन धर्म परिवर्तन कराने की मास्टर माइंड रही है। उस पर यह भी आरोप है कि उसने कंपनी में अन्य सह-आरोपियों द्वारा किए जा रहे महिला उत्पीड़न को बढ़ावा दिया और सनातन हिंदू धर्म की बुराई कर सहकर्मियों को इस्लाम अपनाने के लिए ब्रेनवॉश किया।निदा खान वाली FIR में उसके हिंदू धर्म पर अपशब्दों की बात, नासिक धर्मांतरण रैकेट की मास्टरमाइंड कानून की किन धाराओं के शिकंजे में ?

निदा खान 5 महीने की गर्भवती है , लगाई थी जमानत याचिका

नासिक रोड स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने 6 जुलाई को निदा खान की जमानत याचिका स्वीकार की। अदालत ने कहा कि आरोपी पांच महीने की गर्भवती है और गर्भस्थ शिशु के हितों को भी ध्यान में रखना न्यायिक दायित्व है। न्यायालय ने यह भी माना कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है और पुलिस चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। ऐसे में आरोपी की आगे की हिरासत जांच के लिए आवश्यक नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जमानत देना आरोपों से बरी करना नहीं है।भगवान कृष्ण का उदाहरण क्यों आया?

जमानत आदेश की सबसे चर्चित टिप्पणी भगवान श्रीकृष्ण के जन्म से जुड़ी रही। अदालत ने कहा कि जिस प्रकार भगवान कृष्ण का जन्म कारागार में हुआ था, वैसी परिस्थिति किसी नवजात को नहीं झेलनी चाहिए। न्यायाधीश ने इसे सामाजिक कलंक और मानसिक पीड़ा से जोड़ते हुए कहा कि गर्भस्थ शिशु के समग्र हितों को देखते हुए न्यायिक विवेक का प्रयोग किया जाना उचित होगा। अदालत की यह टिप्पणी कानूनी आदेश का हिस्सा बनी। एक तरह से अदालत के इस फैसले के बाद से इसके बाद से ही इस पर सार्वजनिक और राजनीतिक बहसों का सिलसिला शुरू हो गया है।आगे क्या होगी कानूनी प्रक्रिया?

इस बात से सबको इत्तिफाक रखना चाहिए कि 'नासिक टीसीएस धर्मांतरण और उत्पीड़न' केस की मुख्य आरोपी निदा खान को भगवान कृष्ण के नाम पर जमानत मिली है, जो कि उसके लिए और उसके गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए काफी राहत की बात है। लेकिन जमानत मिलने के बावजूद उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा जारी रहेगा। अदालत में आरोप तय होने, गवाहों के बयान और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही दोषसिद्धि या बरी होने का निर्णय होगा। इस मामले की जांच विशेष जांच दल कर रहा है और विभिन्न एफआईआर की जांच भी जारी है। यदि जमानत की शर्तों का उल्लंघन होता है तो अभियोजन पक्ष जमानत निरस्त करने की मांग कर सकता है।छत्रपति शिवाजी की मूर्ति पर संकट के बादल, बॉम्बे हाईकोर्ट के हटाने के फैसले पर दखल से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

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