सुप्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति संजय करोल का विदाई भाषण: 40‑साल की न्यायिक यात्रा का प्रतिबिंब

विदाई में न्यायमूर्ति करोल ने अपने 40‑साल के करियर, न्यायिक ज़िम्मेदारी, न्याय तक पहुँच और संवैधानिक मूल्यों पर प्रकाश डाला, साथ ही संस्थान को संवारने में वकीलों की अहम भूमिका को याद किया। उन्होंने कोर्ट की परम्पराओं, मौन की महत्ता और बेंच की जिम्मेदारी को उजागर कर यह कहा कि यह कुर्सी स्वयं से अधिक महत्वपूर्ण सिद्धांतों की रखवाली करती है।
सरकार ने भरोसा दिलाया कि अदालत के निर्देशों का पूरी तरह पालन किया जाएगा। अदालत ने सभी पक्षों को विस्तार से सुनने के बाद आदेश पारित किया।
पीठ ने कहा कि कानून का उद्देश्य नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करना है। अदालत ने संबंधित अधिकारियों को निर्धारित समय में अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।
मामले की अगली सुनवाई के लिए तारीख तय कर दी गई है, जहाँ शेष बिंदुओं पर विचार होगा। आदेश की प्रति सभी संबंधित पक्षों को उपलब्ध करा दी गई है ताकि अमल सुनिश्चित हो सके।

