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कानून

गोरखपुर लोक अदालत ने 11.80 लाख मामलों का निपटारा कर नई मिसाल कायम

Jagran के अनुसार · 24x7 NYAYA
गोरखपुर लोक अदालत ने 11.80 लाख मामलों का निपटारा कर नई मिसाल कायम
प्रतीकात्मक चित्र · सौजन्य: Unsplash

जनपद न्यायाधीश राज कुमार सिंह की अध्यक्षता में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत ने निर्धारित 12,12,956 मामलों में से 11,80,849 मामलों को सफलतापूर्वक निस्तारित किया। सुलह‑समझौते के आधार पर 1.31 करोड़ रुपये से अधिक की क्षतिपूर्ति दी गई और आपराधिक, राजस्व तथा बैंक‑संबंधी कई वाद भी समाप्त हुए। विभिन्न न्यायालयों और विभागीय अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी ने इस उपलब्धि को संभव बनाया।

अदालत ने संबंधित अधिकारियों को निर्धारित समय में अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। कानूनी जानकारों के अनुसार इस व्यवस्था का दूरगामी असर पड़ सकता है और यह भविष्य के मामलों के लिए नज़ीर बनेगी।

आदेश की प्रति सभी संबंधित पक्षों को उपलब्ध करा दी गई है ताकि अमल सुनिश्चित हो सके। पीठ ने स्पष्ट किया कि प्रक्रियागत निष्पक्षता और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन अनिवार्य है।

सरकार ने भरोसा दिलाया कि अदालत के निर्देशों का पूरी तरह पालन किया जाएगा। अदालत ने सभी पक्षों को विस्तार से सुनने के बाद आदेश पारित किया।

मुकदमे

बेतिया में मुफ्त वाद निपटान, लोक अदालत ने समाज में भाईचारा बढ़ाया

बेतिया में मुफ्त वाद निपटान, लोक अदालत ने समाज में भाईचारा बढ़ाया

बेतिया में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत ने समाज के कमजोर वर्गों को निःशुल्क और त्वरित न्याय प्रदान किया। न्यायाधीशों ने विवादों के सौहार्दपूर्ण निपटारे के लिए इसे एक आसान मंच बताया, जिससे सामाजिक सौहार्द में वृद्धि हुई। वादों के निपटारे के बाद अपील की कोई सुविधा नहीं है, जिससे प्रक्रिया और भी प्रभावी बनी।

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलीलें रखीं, जबकि सरकार ने अपना पक्ष प्रस्तुत किया। पीठ ने कहा कि कानून का उद्देश्य नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करना है।

कानून

लोक अदालत से तेज न्याय: बगहा में न्यायाधीशों ने कार्यक्रम में बताया

बगहा में आयोजित कार्यक्रम में जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीशों ने लोक अदालत को पारंपरिक विवाद समाधान का आधुनिक रूप बताया, जो सुलभ, सरल और त्वरित न्याय देता है तथा आर्थिक दोहन को रोकता है। उन्होंने बताया कि लोक अदालत में आपसी सहमति से मामलों का निस्तारण होने से समय और धन दोनों की बचत होती है तथा तैयारियों एवं बेंचों के गठन की विस्तृत जानकारी भी साझा की।

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलीलें रखीं, जबकि सरकार ने अपना पक्ष प्रस्तुत किया। पीठ ने कहा कि कानून का उद्देश्य नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करना है।

मुकदमे

सुप्रीम कोर्ट ने दिया आदेश: दो साल से अधिक पुराने बिजली बिल की वसूली नहीं होगी

कोर्ट ने कहा कि बिजली बिल दो साल के भीतर वसूला जाना चाहिए, और दो साल से परे वसूली के लिए राशि को लगातार बिलों में बकाया के रूप में दर्शाना अनिवार्य है। यह निर्णय दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के 57.74 लाख रुपये के न्यूनतम खपत गारंटी शुल्क के मामले में दिया गया था।

पीठ ने कहा कि कानून का उद्देश्य नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करना है। अदालत ने संबंधित अधिकारियों को निर्धारित समय में अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।

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