भाषा नीति को भारत की वास्तविकता के अनुरूप बनाना चाहिए

सुप्रीम कोर्ट के सवाल पर अंग्रेजी को तीसरी भाषा बनाने पर सरकार ने सावधानी दिखाई, जबकि CBSE ने तीन‑भाषा सूत्र लागू किया। लेख में बताया गया कि अंग्रेजी का उपयोग सरकारी कार्यों, शिक्षा और नौकरी के अवसरों में अभी भी अहम है, जबकि मातृभाषा के प्रति गर्व और विविधता को भी नज़रअंदाज़ नहीं किया जाना चाहिए। नीति को समाज के भीतर से बदलना चाहिए, न कि ऊपर से थोपना।
अदालत ने सभी पक्षों को विस्तार से सुनने के बाद आदेश पारित किया। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलीलें रखीं, जबकि सरकार ने अपना पक्ष प्रस्तुत किया।
अदालत ने संबंधित अधिकारियों को निर्धारित समय में अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। कानूनी जानकारों के अनुसार इस व्यवस्था का दूरगामी असर पड़ सकता है और यह भविष्य के मामलों के लिए नज़ीर बनेगी।
आदेश की प्रति सभी संबंधित पक्षों को उपलब्ध करा दी गई है ताकि अमल सुनिश्चित हो सके। पीठ ने स्पष्ट किया कि प्रक्रियागत निष्पक्षता और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन अनिवार्य है।

