ओडिशा हाई कोर्ट ने जज इप्सिता मोहनती को पुनर्स्थापित किया, कहा उनके बेटे के ऑटिज़्म के इलाज की कमी ने इस्तीफे को अनैच्छिक बना दिया

एक विभाजन बेंच ने फैसला किया कि जज इप्सिता मोहनती का 2022 का इस्तीफा मजबूर परिस्थितियों के कारण दिया गया था, क्योंकि उनके ऑटिज़्म ग्रस्त बेटे के लिए हिंदोल में उपयुक्त चिकित्सा सुविधा नहीं थी। कई बार स्थानांतरण की याचिका करने के बाद भी इनकार होने पर उन्होंने पद त्याग दिया, जिसे अदालत ने अनैच्छिक मानते हुए उनका पुनः नियोजन आदेशित किया।
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलीलें रखीं, जबकि सरकार ने अपना पक्ष प्रस्तुत किया। पीठ ने कहा कि कानून का उद्देश्य नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करना है।
कानूनी जानकारों के अनुसार इस व्यवस्था का दूरगामी असर पड़ सकता है और यह भविष्य के मामलों के लिए नज़ीर बनेगी। मामले की अगली सुनवाई के लिए तारीख तय कर दी गई है, जहाँ शेष बिंदुओं पर विचार होगा।
पीठ ने स्पष्ट किया कि प्रक्रियागत निष्पक्षता और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन अनिवार्य है। विशेषज्ञों ने इस निर्णय को संतुलित बताते हुए कहा कि इससे लंबित विवादों के निपटारे में मदद मिलेगी।

