मद्रास हाई कोर्ट: शारीरिक विशेषताएँ और भाषा से नहीं सिद्ध हो सकता ईसाई धर्म

मद्रास हाई कोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति की गोरी त्वचा, ऊँची कद-काठी, अच्छे शारीरिक स्वरूप और तमिल‑अंग्रेज़ी भाषा में दक्षता केवल इनसे यह साबित नहीं हो सकता कि वह ईसाई है, जब तक कोई मानवशास्त्री‑विश्लेषण न किया गया हो। न्यायाधीश भरथा चक्रवर्ती ने जिला सतर्कता समिति के आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें एक समुदाय प्रमाणपत्र को असत्य ठहराया गया था, क्योंकि उसमें केवल दिखावे पर आधारित तर्क दिया गया था।
पीठ ने स्पष्ट किया कि प्रक्रियागत निष्पक्षता और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन अनिवार्य है। विशेषज्ञों ने इस निर्णय को संतुलित बताते हुए कहा कि इससे लंबित विवादों के निपटारे में मदद मिलेगी।
अदालत ने सभी पक्षों को विस्तार से सुनने के बाद आदेश पारित किया। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलीलें रखीं, जबकि सरकार ने अपना पक्ष प्रस्तुत किया।
अदालत ने संबंधित अधिकारियों को निर्धारित समय में अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। कानूनी जानकारों के अनुसार इस व्यवस्था का दूरगामी असर पड़ सकता है और यह भविष्य के मामलों के लिए नज़ीर बनेगी।

