सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरण कानून में इकोसेंट्रिक बदलाव की दिशा दिखाई

न्यायमूर्ति बी.वी. नागरात्रा ने अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में बताया कि भारत का पर्यावरण कानून अब मानव-केंद्रित दृष्टिकोण से हटकर प्रकृति के अंतर्निहित मूल्य को पहचान रहा है। उन्होंने पाँच प्रमुख सिद्धांत—सतत विकास, प्रदूषक का उत्तरदायित्व, सटीकता सिद्धांत, सार्वजनिक विश्वास सिद्धांत और पीढ़ीगत समानता—को इकोसेंट्रिक शासन का आधार बताया। साथ ही उन्होंने अदालतों की दूरदर्शिता और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के महत्व पर बल दिया।
विशेषज्ञों ने इस निर्णय को संतुलित बताते हुए कहा कि इससे लंबित विवादों के निपटारे में मदद मिलेगी। सरकार ने भरोसा दिलाया कि अदालत के निर्देशों का पूरी तरह पालन किया जाएगा।
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलीलें रखीं, जबकि सरकार ने अपना पक्ष प्रस्तुत किया। पीठ ने कहा कि कानून का उद्देश्य नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करना है।
कानूनी जानकारों के अनुसार इस व्यवस्था का दूरगामी असर पड़ सकता है और यह भविष्य के मामलों के लिए नज़ीर बनेगी। मामले की अगली सुनवाई के लिए तारीख तय कर दी गई है, जहाँ शेष बिंदुओं पर विचार होगा।

