आज़मगढ़ लोक अदालत में 1.24 लाख मुकदमों का निस्तारण, 44 जोड़ों ने सुलह कर घर लौटे
राष्ट्रीय लोक अदालत ने एक ही दिन में 1,24,817 सिविल केसों को सुलह‑समझौते या न्यायिक निर्णयों से समाप्त किया, जहाँ विभिन्न न्यायालयों के जजों ने बड़ी संख्या में मामलों को निपटाया। साथ ही, दीर्घकालिक मतभेदों के कारण अलग रहे 44 दंपतियों ने काउंसलिंग के बाद एक‑दूसरे को माला पहनाकर फिर से साथ रहने का निर्णय किया। यह मंच आम नागरिकों के लिए वैकल्पिक विवाद समाधान का प्रभावी माध्यम सिद्ध हुआ।

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar
- Hindi News
- Local
- Uttar pradesh
- Azamgarh
- Azamgarh Lok Adalat News | Massive Dispute Resolution Under District Judge
आजमगढ़ में 1.24 लाख मुकदमों का निपटारा:लोक अदालत में 44 दंपतियों ने भुलाए मतभेद, एक-दूसरे को माला पहनाकर घर लौटे
- कॉपी लिंक
आजमगढ़ के दीवानी न्यायालय परिसर में शनिवार को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में कुल 1,24,817 मुकदमों का निस्तारण किया गया। लोक अदालत की शुरुआत जिला जज जय प्रकाश पांडेय ने हाल ऑफ जस्टिस में मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलित कर की।
इस मौके पर अधिकारियों और वादकारियों को संबोधित करते हुए जिला जज ने कहा कि लोक अदालत आम आदमी के लिए उपलब्ध महत्वपूर्ण वैकल्पिक विवाद समाधान तंत्र है। इसमें आपसी सहमति और सुलह-समझौते के जरिए विवादों का समाधान कराया जाता है।
अलग-अलग अदालतों में हजारों मुकदमों का निस्तारण
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव अंकित वर्मा ने बताया कि लोक अदालत में मोटर एक्सीडेंट ट्रिब्यूनल के जज मुकेश कुमार सिंह ने 172 मुकदमों का निस्तारण किया। अपर जिला जज एंटी करप्शन अजय कुमार शाही ने 4, अपर जिला जज अजय श्रीवास्तव ने 2 और एससी-एसटी कोर्ट के जज विजय कुमार वर्मा ने 10 मुकदमों का निस्तारण किया।
विशेष न्यायाधीश ओम प्रकाश मिश्रा ने 908, पॉक्सो कोर्ट के जज जैनुद्दीन अंसारी ने 4 और मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सत्यवीर सिंह ने 4,104 मुकदमों का निस्तारण किया।
सिविल जज सीनियर डिवीजन रश्मि चंद ने 45, एसीजेएम कोर्ट नंबर-10 की नीतिका राजन ने 1,864 और फास्ट ट्रैक कोर्ट की आस्था द्विवेदी ने 284 मुकदमों का निस्तारण किया।
44 दंपतियों ने भुलाए मतभेद
राष्ट्रीय लोक अदालत में सिर्फ कानूनी विवाद ही नहीं सुलझे, बल्कि टूटते परिवारों को भी जोड़ने की कोशिश हुई। वर्षों से आपसी विवाद के चलते अलग रह रहे 44 दंपतियों ने परामर्शदाताओं की काउंसलिंग के बाद अपने मतभेद भुलाकर फिर साथ रहने का फैसला किया।
दोनों पक्षों से बातचीत कर उन्हें रिश्ते की अहमियत समझाई गई। लंबी काउंसलिंग के बाद दंपति साथ रहने के लिए राजी हो गए। इसके बाद अदालत परिसर में कई जोड़ों ने एक-दूसरे को माला पहनाई और मिठाई खिलाई। इसके बाद सभी अपने घर के लिए रवाना हुए।
लोक अदालत का उद्देश्य विवाद खत्म करना
प्रधान पारिवारिक न्यायाधीश एहसानुल्लाह खान ने कहा कि विवादों का समाधान ही लोक अदालत का वास्तविक उद्देश्य है। उन्होंने साथ रहने के लिए तैयार हुए दंपतियों को भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।
फैमिली कोर्ट नंबर-1 के न्यायाधीश दिनेश कुमार मिश्रा और फैमिली कोर्ट नंबर-2 के न्यायाधीश बालकृष्ण एन. रंजन ने भी पारिवारिक मूल्यों को बचाने और आपसी विवादों को सुलह के जरिए खत्म करने पर जोर दिया।
पारिवारिक अदालतों में भी 100 से ज्यादा मुकदमे निस्तारित
लोक अदालत में प्रधान पारिवारिक न्यायाधीश एहसानुल्लाह खान ने 52 मुकदमों का निस्तारण किया। फैमिली कोर्ट नंबर-1 के न्यायाधीश दिनेश कुमार मिश्रा ने 33 और फैमिली कोर्ट नंबर-2 के न्यायाधीश बालकृष्ण एन. रंजन ने 22 मुकदमों का निस्तारण किया।
सुलह-समझौते में काउंसलर कुलदीप सिंह, विभा सिंह, अरिमर्दन सिंह, प्रियंका प्रजापति, नीतू सरोज और ममता सिंह समेत अन्य ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
देवेंद्रकुला वेल्लालर ने SC टैग छोड़कर सामाजिक सम्मान की मांग की

सुप्रीम कोर्ट का निर्णय: टिकट न होने पर भी ट्रेन दुर्घटना के पीड़ितों को मिलेगा मुआवजा

अदालत‑एडीआर सहयोग से पारिवारिक विवादों का तेज़ समाधान

सुप्रीम कोर्ट का आदेश: मेरठ में 16,000‑से‑अधिक संपत्तियों पर कार्रवाई

परिवारिक विवादों में न्यायालय‑एडीआर का सहयोगी मॉडल

टिकट न मिलने पर भी 8 लाख का मुआवजा, सुप्रीम कोर्ट ने राहत दी परिवार को

टिकट न मिलने पर भी मुआवजा मिलेगा: सुप्रीम कोर्ट ने 8 लाख की रक़म बहाल की

सुप्रीम कोर्ट ने रिहायशी ज़ोन में वाणिज्यिक कार्यवाही पर सील लगाने का कड़ा आदेश
ताज़ा ख़बरें
- सुप्रीम कोर्ट ने चीनी‑एथेनॉल मुआवजा दावों के 103.4 अरब रियाल के मुद्दे को पूर्ण पीठ तक पहुँचाया
- सुप्रीम कोर्ट ने मेरठ में अवैध कॉलोनियों पर सख्त कदम, न्यायिक आयोग बनाकर ध्वस्तीकरण का आदेश
- मोदी सरकार ने OBC ‘क्रीमी लेयर’ नियम लागू करने के लिए सुप्रीम कोर्ट से दो साल की रियायत माँगी
- अंतर्राष्ट्रीय कानून की स्नातक ने नौकरी छोड़कर सब्जी विक्रय में रोज़ 200 किग्रा बेचना शुरू किया
- केन्द्र सरकार ने OBC क्रीमी लेयर नियम लागू करने के लिए दो साल की राहत की माँग की
- सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने चार हाई कोर्टों में 12 जजों को स्थायी पद दिलवाया
- शरई अदालत में बढ़ते तलाक‑नफका के केस, हर महीने 30 मामले, काउंसलिंग से समाधान
- LiveLaw ने लॉन्च किया ‘ब्रेकिंग न्यूज अलर्ट’ – न्यायिक अपडेट अब तुरंत

