नैचुरल या ऑरगेनिक दावे पर कसा शिकंजा, उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम ने कंपनियों को दी दो ट्रेन
सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी ने दो बड़ी कंपनियों पर जुर्माना लगाया है। दोनों कंपनियों ने अपनी पैकेजिंग और प्रचार सामग्री पर 100% का दावा किया था। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत CCPA को जांच करने, विज्ञापन वापस लेने, जुर्माना लगाने और आवश्यक निर्देश जारी करने का अधिकार है। उपभोक्ता को सही, स्पष्ट और पूरी जानकारी मिलनी चाहिए ताकि वह सूचित निर्णय ले सके।

सौजन्य से:- Navbharat Times
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100% के दावे पर CCPA की सख्ती, लगाया जुर्माना
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार इसी महीने CCPA यानी सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी ने दो बड़ी फूड और बेवरेज कंपनियों, ‘मिसेज बेक्टर्स फूड स्पेशलिटीज लिमिटेड’ और ‘स्टोरिया फूड्स एंड बेवरेजेज प्राइवेट लिमिटेड’ पर ग्राहकों को गुमराह करने गलत व्यापारिक तरीके अपनाने के लिए तगड़ा आर्थिक जुर्माना लगाया है। आरोप है, कि दोनों कंपनियों ने अपनी पैकेजिंग और प्रचार सामग्री पर 100% का दावा प्रमुखता से किया था। प्राधिकरण का कहना है कि पैकेट के सामने बड़े अक्षरों में किए गए दावे, और पीछे ठीक से न पढ़ पाने लायक छोटे अक्षरों में लिखें डिस्क्लेमर सही नहीं ठहराए जा सकते।- ‘मिसेज बेक्टर्स फूड स्पेशलिटीज लिमिटेड’ का 100 % आटा ब्रेड मामले में कंपनी ने माना कि ब्रेड में असली गेहूं के आटे की मात्रा केवल 87% थी। CCPA ने साफ किया कि हालांकि FSSAI नियम किसी उत्पाद को आटा ब्रेड के रूप में वर्गीकृत करने के लिए कम से कम 75% की सीमा तय करते हैं, लेकिन इसे '100% आटा ब्रेड' जैसे बिना किसी शर्त और पक्के दावे को सही ठहराने का आधार नहीं बनाया जा सकता।
- ‘स्टोरिया फूड्स एंड बेवरेजेज प्राइवेट लिमिटेड’ का 100 % टेंडर कोकोनट वॉटर : इस मामले में CCPA ने कंपनी के 100% टेंडर कोकोनट वॉटर और अनार व मिक्स्ड फ्रूट जैसे कई 100% जूस वेरिएंट्स की जांच की। CCPA ने पाया कि स्टोरिया का नारियल पानी सीधे फल से निकाला गया ताज़ा पानी नहीं था, बल्कि इसे 9.6% नारियल पानी के कॉन्संट्रेट (गाढ़े अर्क) से दोबारा तैयार किया गया था। इसी तरह, इसके 100% जूस वेरिएंट्स में ज़्यादातर पानी था, जबकि फलों का गूदा या कॉन्संट्रेट सिर्फ़ 4% से 16% के बीच था।
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 क्या कहता है?
- उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 का उद्देश्य उपभोक्ताओं को भ्रामक विज्ञापनों और अनुचित व्यापार व्यवहार से बचाना है।
- उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के के तहत ही सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी CCPA का गठन किया गया था।
- यदि कोई निर्माता या विक्रेता किसी उत्पाद के बारे में ऐसा दावा करता है जो वास्तविक तथ्यों से मेल नहीं खाता, तो उसे भ्रामक विज्ञापन माना जा सकता है।
- CCPA को ऐसे मामलों में जांच करने, विज्ञापन वापस लेने, जुर्माना लगाने और आवश्यक निर्देश जारी करने का अधिकार प्राप्त है।
- कानून यह भी कहता है कि उपभोक्ता को सही, स्पष्ट और पूरी जानकारी मिलनी चाहिए ताकि वह सूचित निर्णय ले सके।
अदालतों और कानून की नजर में उपभोक्ता का अधिकार
भारतीय न्याय व्यवस्था लगातार यह मानती रही है कि उपभोक्ता को सही जानकारी प्राप्त करना उसका मूल अधिकार है। यदि किसी उत्पाद के बारे में ऐसी जानकारी दी जाती है जिससे उपभोक्ता खरीद का निर्णय प्रभावित हो, तो वह जानकारी सत्य और स्पष्ट होनी चाहिए। अब कंपनियों पर अधिक जिम्मेदारी है कि वे अपने दावों को प्रमाणित करें। CCPA की कार्रवाई इसी कानूनी सिद्धांत को मजबूत करती है। यह उपभोक्ता अधिकारों के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कानूनी बदलाव माना जा रहा है।IVF से हुई संतान,मां-बाप से DNA मैच नहीं, करोड़ों के हर्जाने का हक बनता है, क्या कहता है कानून
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