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'सैनिक फार्म को आप अधर में नहीं छोड़ सकते', हाई कोर्ट ने सरकार को दिया 2 महीने का समय

दिल्ली हाई कोर्ट ने सैनिक फार्म की कानूनी स्थिति पर फैसला लेने के लिए केंद्र और दिल्ली सरकार समेत संबंधित एजेंसियों को दो महीने का समय दिया है। कोर्ट ने संयुक्त बैठक कर योजना या नीतिगत फैसला लेने और नवंबर की सुनवाई से पह…

19 अगस्त 2026 को 01:54 am बजे
'सैनिक फार्म को आप अधर में नहीं छोड़ सकते', हाई कोर्ट ने सरकार को दिया 2 महीने का समय

सौजन्य से:- Navbharat Times

दिल्ली हाई कोर्ट ने सैनिक फार्म की कानूनी स्थिति पर फैसला लेने के लिए केंद्र और दिल्ली सरकार समेत संबंधित एजेंसियों को दो महीने का समय दिया है। कोर्ट ने संयुक्त बैठक कर योजना या नीतिगत फैसला लेने और नवंबर की सुनवाई से पहले प्रगति रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया गया है।

नई दिल्ली: साउथ दिल्ली की सैनिक फार्म कॉलोनी की दशकों पुरानी कानूनी अनिश्चितता खत्म करने की दिशा में दिल्ली हाई कोर्ट ने मंगलवार को सरकार को दो महीने का वक्त दिया। चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच ने केंद्र और दिल्ली सरकार समेत संबंधित एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारियों को साथ बैठकर कॉलोनी की स्थिति पर कोई ठोस योजना या नीतिगत फैसला लेने का निर्देश दिया है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा, आप (सरकार) उन्हें अधर में नहीं छोड़ सकते। कुछ तो करना ही होगा। उन्हें पता होना चाहिए कि उनका भविष्य क्या है। बेंच ने गौर किया कि सैनिक फार्म की वैधता और वहां हुए निर्माण से जुड़े मामले एक दशक से ज्यादा समय से लंबित हैं।

हाई कोर्ट ने केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय (MoHUA), दिल्ली सरकार, DDA और MCD के वरिष्ठ अधिकारियों को संयुक्त बैठक करने का निर्देश दिया। अधिकारियों को दो महीने के भीतर सैनिक फार्म के संबंध में कोई योजना, नीतिगत निर्णय या सैद्धांतिक निर्णय लेना होगा। नवंबर में होने वाली अगली सुनवाई से पहले इसकी प्रोग्रेस रिपोर्ट भी कोर्ट में पेश करनी होगी।

अनधिकृत कॉलोनियों की नीति पर भी उठे सवाल

बेंच ने राजधानी में अनधिकृत कॉलोनियों से निपटने की सरकारी नीति पर भी सवाल उठाए। कोर्ट ने संकेत दिया कि सैनिक फार्म के मामले में भी अब स्थिति को लंबे समय तक टाला नहीं जा सकता। बेंच ने कहा कि इलाके में स्वीकृत लेआउट या बिल्डिंग प्लान नहीं है, इसलिए फिलहाल निर्माण की अनुमति नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने यहां तक कहा कि निवासियों को सामान्य मरम्मत की अनुमति देने पर भी वह फिलहाल विचार नहीं कर रही है। DDA ने दिल्ली के नए मास्टर प्लान का प्रस्ताव भी केंद्र के सामने रखा है। अब दो महीने की समय-सीमा में सरकार और संबंधित एजेंसियों की बैठक यह तय करने में अहम होगी कि सैनिक फार्म का भविष्य क्या होगा।

दिखाई सख्ती

नवंबर में होने वाली अगली सुनवाई से पहले इसकी प्रोग्रेस रिपोर्ट भी कोर्ट में पेश करनी होगी

कोर्ट ने कहा, स्वीकृत लेआउट या बिल्डिंग प्लान नहीं है, इसलिए निर्माण की अनुमति नहीं दी जा सकती

एक दशक से ज्यादा समय से लंबित है मामला

सैनिक फार्म पर फैसला कब?

सैनिक फार्म का मामला सिर्फ अवैध निर्माण का नहीं, बल्कि नीति की अस्पष्टता और प्रशासनिक देरी का भी है। दशकों से वहां रहने वाले लोगों के भविष्य पर फैसला न होना किसी भी व्यवस्था के लिए सवाल खड़ा करता है। हाई कोर्ट की यह टिप्पणी अहम है कि लोगों को अनिश्चितता में नहीं छोड़ा जा सकता। लेकिन समाधान का मतलब नियमों को नजरअंदाज करना भी नहीं होना चाहिए। सरकार को अब साफ नीति बनानी होगी–क्या रेगुलराइज करना संभव है, किन शर्तों पर होगा और कहां कानून का सख्ती से पालन कराया जाएगा। दो महीने की समय-सीमा इसलिए सिर्फ बैठक की नहीं, निर्णायक कार्रवाई की कसौटी है।

लेखक के बारे मेंप्राची यादवलगभग 19 साल से पत्रकारिता में हैं। सात साल तक एक दिल्ली-एनसीआर न्यूज चैनल में विभिन्न क्षेत्रों में काम किया। प्रोग्रामिंग और एंकरिंग भी की। टीवी से ही लीगल रिपोर्टिंग की शुरुआत हुई। उस दौरान, जिला अदालतों और दिल्ली हाई कोर्ट के साथ सुप्रीम कोर्ट तक की रिपोर्टिंग की। 2013 में नवभारत टाइम्स से जुड़ीं। यहां पर शुरुआत जिला अदालतों, नैशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल और उपभोक्ता अदालतों की रिपोर्टिंग से हुई। वर्तमान में अन्य सभी अदालतों के साथ दिल्ली हाई कोर्ट भी कवर कर रही हैं।... और पढ़ें

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