रिश्वत मामले में CBI की मनमानी पर राउज एवेन्यू कोर्ट की कड़ी फटकार
राउज एवेन्यू कोर्ट ने 3 करोड़ रुपये के रिश्वत प्रकरण में आरोपी के ससुर के बैंक खाते फ्रीज करने पर सीबीआई को कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने कहा कि यह मनमानी और कठोर कार्रवाई है।

सौजन्य से:- Jagran
3 करोड़ की रिश्वत में दामाद फंसा तो CBI ने फ्रीज किए ससुर के बैंक खाते, अदालत ने सीबीआई को लगाई फटकार
राउज एवेन्यू कोर्ट ने 3 करोड़ रुपये के रिश्वत मामले में आरोपी के ससुर के बैंक खाते फ्रीज करने पर सीबीआई को कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने कहा कि केवल रिश्त ...और पढ़ें
HighLights
- सीबीआई ने आरोपी के ससुर के बैंक खाते फ्रीज किए।
- अदालत ने सीबीआई की कार्रवाई को मनमाना और कठोर बताया।
- ससुर के तीनों बैंक खाते तत्काल डी-फ्रीज करने का आदेश।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। राउज एवेन्यू स्थित विशेष न्यायाधीश की अदालत ने तीन करोड़ रुपये के रिश्वत मामले में आरोपी के ससुर के बैंक खाते फ्रीज करने पर सीबीआई को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने कहा कि किसी व्यक्ति के केवल आरोपित का रिश्तेदार होने के आधार पर उसके बैंक खाते फ्रीज नहीं किए जा सकते। जांच एजेंसी की ऐसी कार्रवाई मनमानी और कठोर है।
अदालत ने आरोपित के ससुर गुलशन कुमार के तीनों बैंक खातों को तत्काल डी-फ्रीज करने का निर्देश दिया। विशेष न्यायाधीश सुशांत चांगोत्रा ने कहा कि जांच एजेंसी का उद्देश्य अपराध से अर्जित धन को सुरक्षित रखना हो सकता है, लेकिन इसके लिए यह दिखाना जरूरी है कि संबंधित बैंक खाते का अपराध की आय से प्रत्यक्ष या परोक्ष संबंध है। मौजूदा मामले में सीबीआई ऐसा कोई संबंध स्थापित नहीं कर सकी।
अदालत ने कहा कि गुलशन कुमार आरोपित प्रभात कुमार कपूर के ससुर हैं, लेकिन सीबीआई ने स्वयं स्वीकार किया है कि उनकारिश्वत की मांग, स्वीकार करने या धन के लेन-देन से कोई संबंध नहीं है। इसके बावजूद जांच अधिकारी ने उनके बैंक खाते फ्रीज कर दिए और इसके लिए कोई ठोस कारण भी दर्ज नहीं किया।
सीबीआई ने दलील दी कि गुलशन कुमार ने अपने फरार दामाद को छिपाने में मदद की। हालांकि, अदालत ने इस दलील पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि आरोपी को 16 जून को गिरफ्तार कर लिया गया था, जबकि गुलशन कुमार के बैंक खाते दो दिन बाद फ्रीज किए गए। ऐसे में खातों को फ्रीज करने का औचित्य स्पष्ट नहीं है।
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अदालत ने अपने आदेश में कहा कि किसी व्यक्ति के बैंक खाते फ्रीज करने से पहले जांच अधिकारी के पास यह मानने का उचित आधार होना चाहिए कि खाते का इस्तेमाल अपराध से अर्जित धन को रखने, छिपाने या उसके लेन-देन में हुआ है। इस मामले में तो सीबीआई ने बैंक खातों का विवरण देखे बिना ही उन्हें फ्रीज करने का फैसला ले लिया, जो पूरी तरह मनमाना है।
अदालत ने टिप्पणी की कि जांच एजेंसियां कानून की सीमा में रहकर ही कार्रवाई कर सकती हैं। केवल इसलिए कि किसी व्यक्ति का रिश्तेदार किसी मामले में आरोपित है, उसे परेशान करने के लिए जांच प्रक्रिया का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि कानून का पालन करने वाले नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए ऐसी मनमानी और कठोर कार्यप्रणाली पर रोक लगना जरूरी है।
यह मामला हरियाणा कैडर के आईपीएस अधिकारी दीपक गहलावत से जुड़े तीन करोड़ रुपये के रिश्वत प्रकरण का है, जिसकी जांच सीबीआई फर्जी दवा निर्माण गिरोह के मामले के सिलसिले में कर रही है। इससे पहले भी अदालत ने सीबीआई की हिरासत बढ़ाने की मांग खारिज करते हुए कहा था कि आरोपित के बैंक खातों में साजिश के बाद कोई संदिग्ध वित्तीय लेन-देन सामने नहीं आया था।
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