होमअपराध40 साल बाद हत्या के आरोपी की याचिका खारिज, सुप्रीम कोर्ट ने HC के रवैये से उठाया सवाल
अपराध

40 साल बाद हत्या के आरोपी की याचिका खारिज, सुप्रीम कोर्ट ने HC के रवैये से उठाया सवाल

हत्या के आरोपी विजय सिंह ने अपनी अपील में सुप्रीम कोर्ट से कहा कि उनकी सजा को 1985 में चुनौती देने के बावजूद 40 साल बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज की. आरोपी ने बताया कि उन्होंने अपनी युवावस्था, प्रौढ़ावस्था और वृद्धावस्था आपराधिक दोषसिद्धि के साए में बिताई है, जिसके कारण उनकी उम्र 72 साल हो गई है। हाईकोर्ट के इस रवैये को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाया और कहा कि लंबित मामलों को निपटाने के लिए कौन से नए उपाय अपनाए जा सकते हैं।

9 जून 2026 को 03:43 pm बजे
40 साल बाद हत्या के आरोपी की याचिका खारिज, सुप्रीम कोर्ट ने HC के रवैये से उठाया सवाल

सौजन्य से:- ABP News

हत्या के आरोपी की याचिका 40 साल बाद खारिज, HC के इस रवैये से SC हैरान, याचिकाकर्ता बोला- पूरी जवानी मैंने...

अपनी अपील में विजय सिंह ने लंबे समय तक हुई देरी पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अब उनकी उम्र 72 साल है और उन्होंने अपनी युवावस्था, प्रौढ़ावस्था और वृद्धावस्था आपराधिक दोषसिद्धि के साए में बिताई है.

हाईकोर्ट में लंबित मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर चिंता जताई है. कोर्ट उस वक्त हैरान रह गया, जब उसको पता चला कि हत्या के एक आरोपी की याचिका 40 साल बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज कर दी. आरोपी ने अपनी सजा को 1985 में चुनौती दी थी, जिसे इस साल फरवरी में हाईकोर्ट ने खारिज किया. आरोपी सिर्फ तीन महीने जेल में रहा, वह 43 साल से जमानत पर था. उसका कहना है कि सुनवाई में देरी की वजह से इतने साल उसने दोषसिद्धि के साए बिताए हैं.

जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस ए एस चंदुरकर की बेंच ने सोमवार (8 जून, 2026) को स्थिति को चिंताजनक बताया और सवाल उठाया कि इलाहाबाद हाईकोर्ट में लंबित मामलों की बढ़ती संख्या से निपटने के लिए कौन से नए उपाय अपनाए जा सकते हैं क्योंकि ये लंबित मामले न्याय व्यवस्था को बाधित करते हैं.

यह मामला विजय सिंह से जुड़ा है, जिसे नवंबर 1983 में अपने भाई की गोली मारकर हत्या करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था और तब उसकी उम्र 28 साल थी. कानपुर की एक सेशन कोर्ट ने उसे हत्या का दोषी पाया और दिसंबर 1985 में आजीवन कारावास की सजा सुना दी. विजय सिंह ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी, लेकिन उसकी अपील करीब 41 सालों तक लंबित रही और आखिरकार इस साल फरवरी में हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी.

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने गौर किया कि विजय सिंह सिर्फ तीन महीने हिरासत में रहा और अपनी अपील के नतीजे का इंतेजार करते हुए करीब 43 साल तक जमानत पर था. अदालत ने अपने समक्ष कार्यवाही लंबित रहने के दौरान उसकी जमानत जारी रखने का फैसला किया. बेंच ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में मामलों के निपटारे में लगातार हो रही लंबी देरी पर चिंता व्यक्त की और कहा कि लंबित मामलों की संख्या अधिक होने के कारण याचिकाकर्ता अक्सर शीघ्र सुनवाई के निर्देश का अनुरोध लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख करते हैं.

यह भी पढ़ें:- India Nuclear Weapons: भारत ने पहली बार 12 परमाणु हथियार किए तैनात! नई रिपोर्ट से पाक-चीन को लगेगा 440 वोल्ट का झटका

जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा ने सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ दवे और जोहेब हुसैन से पुराने मामलों के निपटारे में तेजी लाने के उपायों पर सुझाव मांगे. सिद्धार्थ दवे ने सुझाव दिया कि लंबित मामलों की संख्या कम करने के लिए तीन दशकों से अधिक समय से लंबित अभियोजन अपीलों को खारिज किया जा सकता है. हालांकि, बेंच ने इस विचार को अस्वीकार कर दिया और कहा कि न्यायिक निर्णय के मूलभूत सिद्धांत सिर्फ मामलों के लंबे समय तक लंबित रहने के आधार पर उन्हें खारिज करने की अनुमति नहीं देते.

बेंच ने चेतावनी दी कि इस तरह का दृष्टिकोण जनहित को प्रतिकूल रूप से प्रभावित कर सकता है और पक्षों को अपना पक्ष प्रस्तुत करने के अवसर से वंचित कर सकता है. सुप्रीम कोर्ट में अपनी अपील में विजय सिंह ने लंबे समय तक हुई देरी पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अब उनकी उम्र 72 साल है और उन्होंने अपनी युवावस्था, प्रौढ़ावस्था और वृद्धावस्था आपराधिक दोषसिद्धि के साए में बिताई है. याचिका में कहा गया है, 'चार दशकों से अधिक समय से, युवावस्था, प्रौढ़ावस्था और अब वृद्धावस्था के दौरान वह दोषसिद्धि के साए में जी रहे हैं.'

यह भी पढ़ें:- NEET Paper Leak: नीट पेपर लीक मामले में कोर्ट का बड़ा फैसला, मनीषा वाघमारे की जमानत याचिका खारिज

Powered by Nyaya 247 News

इसका मतलब क्या है

यह मामला न्यायपालिका में लंबित मामलों की समस्या को उजागर करता है, जिसका सीधा प्रभाव न्याय प्राप्ति पर पड़ता है। यह मामला यह दिखाता है कि कैसे लंबे समय तक मामलों का निपटारा न होने से व्यक्तियों को अपनी जवानी से लेकर बुढ़ापे तक न्याय की प्रतीक्षा करनी पड़ सकती है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस मुद्दे पर चिंता व्यक्त की गई है, जो न्याय व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता पर प्रकाश डालती है।

संबंधित ख़बरें

इसी विषय की और ख़बरें →
गुजरात में नौवाहनविभाग और नौवहन कानूनों पर कार्यशाला का उद्घाटन
अपराध

गुजरात में नौवाहनविभाग और नौवहन कानूनों पर कार्यशाला का उद्घाटन

सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में बड़े मामलों की सुनवाई
अपराध

सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में बड़े मामलों की सुनवाई

राममंदिर चढ़ावा चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट में 10 अगस्त को सुनवाई
अपराध

राममंदिर चढ़ावा चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट में 10 अगस्त को सुनवाई

भाजपा हमलावर, अदालत ने बोला झूठे थे उत्पीड़न के आरोप बृजभूषण शरण सिंह केस पर
अपराध

भाजपा हमलावर, अदालत ने बोला झूठे थे उत्पीड़न के आरोप बृजभूषण शरण सिंह केस पर

लाइव लॉ इलाहाबाद उच्च न्यायालय के महत्वपूर्ण आदेश और निर्णय - 3 अगस्त - 9 अगस्त, 2026
अपराध

लाइव लॉ इलाहाबाद उच्च न्यायालय के महत्वपूर्ण आदेश और निर्णय - 3 अगस्त - 9 अगस्त, 2026

न्यायालय की संवेदनशीलता पुस्तिका
अपराध

न्यायालय की संवेदनशीलता पुस्तिका

दिल्ली केस में भाग जाने वाली पत्नी और ससुर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज
अपराध

दिल्ली केस में भाग जाने वाली पत्नी और ससुर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज

पटना हाईकोर्ट ने पुलिस हिरासत के बाद दिया व्यक्ति के लापता होने के मामले में सीबीआई जांच का आदेश
अपराध

पटना हाईकोर्ट ने पुलिस हिरासत के बाद दिया व्यक्ति के लापता होने के मामले में सीबीआई जांच का आदेश

ताज़ा ख़बरें