उत्तर प्रदेश सरकार, हाईकोर्ट के 5 लाख के मुआवजे के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में उलटने की तैयारी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 24 वर्षीय लॉ छात्रा आकृति चौधरी को NSA के तहत अवैध हिरासत के बदले डीएम की वेतन से 5 लाख रुपए की वसूली का आदेश दिया था। उत्तर प्रदेश सरकार ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का इरादा जताया है, जबकि हाईकोर्ट ने हाल ही में चौधरी की निवारक निरोध को रद्द कर दिया था। कोर्ट ने पिछले दिनों त्रिपाठी छात्र के खिलाफ जारी प्रिवेंटिव नोटिस पर भी असंतोष व्यक्त किया।

सौजन्य से:- ETV Bharat
छात्र को हिरासत में रखने के लिए डीएम को 5 लाख रुपये देने के हाईकोर्ट के आदेश को यूपी चुनौती देगा
आकृति चौधरी की एनएसए के तहत हिरासत के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को उत्तर प्रदेश सरकार सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी.
By Sumit Saxena
Published : September 9, 2026 at 3:29 PM IST
नई दिल्ली : उत्तर प्रदेश सरकार ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वह इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती देगी, जिसमें 24 साल की लॉ स्टूडेंट आकृति चौधरी को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में रखने के लिए 5 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया गया था.
हाई कोर्ट ने कहा कि यह रकम गौतमबुद्ध नगर की मजिस्ट्रेट मेधा रूपम की सैलरी से वसूली जाएगी. सीजेआई सूर्यकांत की पीठ के सामने पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने साफ किया कि 20 साल के स्टूडेंट अक्षत त्रिपाठी के खिलाफ प्रिवेंटिव नोटिस एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने जारी किया था, जिला मजिस्ट्रेट ने नहीं.
यह सफाई उस मामले की सुनवाई के दौरान आई, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को त्रिपाठी को दिए गए नोटिस पर अपनी नाराजगी जाहिर की थी, बावजूद इसके कि 1 सितंबर को कोर्ट ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शन में शामिल होने वाले छात्रों को बचाने का साफ आदेश दिया था.
सीजेआई ने त्रिपाठी को शायद जिला मजिस्ट्रेट के सामने पेश होने की जरूरत का जिक्र करते हुए कहा कि उनके 1 सितंबर के आदेश की भाषा बहुत आसान है और एक आम आदमी भी इसे समझ सकता है और हैरानी जताई कि कोई मजिस्ट्रेट या जिला मजिस्ट्रेट उस आदेश को समझने में कैसे फेल हो सकता है और उसका उल्लंघन कर सकता है.
पीठ ने चौधरी के बारे में हाई कोर्ट के हाल के फैसले का भी जिक्र किया, जिनकी एनएसए के तहत निवारक निरोध (preventive detention) को हाई कोर्ट ने 2 सितंबर को रद्द कर दिया था. मेहता ने कहा कि राज्य सरकार हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दे रही है.
हाई कोर्ट ने आदेश दिया कि चौधरी को 5 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए, और यह रकम गौतमबुद्ध नगर के डीएम की सैलरी से वसूली जाए. पीठ ने यह भी निर्देश दिया था कि रूपम और पुलिस से उसकी नाराजगी उनके सर्विस रिकॉर्ड में दर्ज की जाए.
ये भी पढ़ें- 'मजिस्ट्रेट ऐसा करने की हिम्मत कैसे कर सकता है ?', सीजेपी प्रदर्शनकारी को नोटिस भेजे जाने पर भड़के मुख्य न्यायाधीश
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