सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल के सभी 65 धरना‑प्रदर्शन मामलों में अभियोजन वापस करने की मंजूरी दी
सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश में कोविड‑19 के दौरान जनप्रतिनिधियों के खिलाफ दर्ज 65 आपराधिक मामलों को वापस लेने की अनुमति दी, क्योंकि इन मामलों में कोई गंभीर या जघन्य अपराध नहीं दिखा। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मुकदमों की सुनवाई न्यायिक संसाधनों का बर्बादी होगी और गंभीर मामलों को त्वरित निपटारा चाहिए। हाई कोर्ट ने पहले 45 मामलों में अनुमति नहीं दी थी, पर अब पूरी शृंखला को रद्द कर दिया गया है।

सौजन्य से:- Navbharat Times
सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश में जनप्रतिनिधियों के खिलाफ कोविड-19 महामारी के दौरान दर्ज सभी 65 आपराधिक मामले वापस लेने की मंजूरी दे दी है।
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश में जनप्रतिनिधियों के खिलाफ कोविड-19 महामारी के दौरान दर्ज सभी 65 आपराधिक मामलों में केस वापस लेने की अनुमति दे दी है। ये मामले मुख्य रूप से धरना-प्रदर्शन करने, सार्वजनिक शिकायतें उठाने और महामारी के दौरान विभिन्न मुद्दों पर आवाज बुलंद करने से जुड़े हैं।
SC ने स्वीकार की हिमाचल प्रदेश सरकार की अपील
चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि इन मामलों में कोई भी ऐसा गंभीर या जघन्य अपराध सामने नहीं आता, जिससे आरोपियों को आदतन अपराधी माना जाए। ऐसे मामलों में मुकदमे जारी रखना न तो आपराधिक न्याय व्यवस्था के हित में होगा और न ही जनहित में। इसके बजाय इन मुकदमों की सुनवाई में अदालतों का समय खर्च होगा, जबकि गंभीर मामलों के निपटारे पर इसका प्रतिकूल असर पड़ेगा। अदालत ने हिमाचल प्रदेश सरकार की अपील स्वीकार करते हुए सभी आरोपियों के खिलाफ इन मामलों में अभियोजन वापस लेने की अनुमति दे दी।
हाई कोर्ट ने 65 में से 45 मामलों में अनुमति देने से किया था इनकार
राज्य सरकार ने 65 मामलों में अभियोजन वापस लेने के लिए हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट से पूर्व अनुमति मांगी थी। यह आवेदन सुप्रीम कोर्ट के 10 अगस्त 2021 के उस आदेश के मद्देनजर दायर किया गया था, जिसमें सांसदों और विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामलों के समयबद्ध निपटारे और अभियोजन वापस लेने की शक्ति के दुरुपयोग को रोकने के लिए हाई कोर्ट की पूर्व अनुमति आवश्यक की गई थी। हाई कोर्ट ने 65 में से 45 मामलों में अभियोजन वापस लेने की अनुमति नहीं दी थी। इनमें से चार मामले बाद में बरी होने या खारिज होने के कारण समाप्त हो गए।
किन मामलों में दर्ज हुए थे मुकदमे?
CJI सूर्यकांत ने फैसले में मामलों को अलग-अलग श्रेणियों में रखा। इनमें कोविड महामारी के दौरान भारतीय दंड संहिता की धारा 269 के तहत दर्ज मामले शामिल थे। इन मामलों में ऐसे कृत्यों के आरोप थे, जिनसे जीवन के लिए खतरनाक बीमारी के संक्रमण फैलने की आशंका थी। कुछ मामलों में कोविड काल में सरकारी कर्मचारियों के साथ कथित मारपीट या आपराधिक बल प्रयोग के आरोप लगाए गए थे। हालांकि इनमें किसी सरकारी कर्मचारी को वास्तविक चोट पहुंचने की घटना सामने नहीं आई थी।
‘कोविड असाधारण परिस्थिति थी’
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इन एफआईआर में लगाए गए आरोपों को देखने से स्पष्ट है कि घटनाएं कोविड महामारी के दौरान की हैं। वह एक असाधारण स्थिति थी, जिसमें अप्रत्याशित परिस्थितियों ने आम लोगों के साथ-साथ जनप्रतिनिधियों को भी प्रभावित किया था। पीठ ने कहा कि इनमें से कोई मामला गंभीर या जघन्य अपराध को नहीं दर्शाता और न ही आरोपी किसी आदतन अपराधी के रूप में सामने आते हैं। जनप्रतिनिधियों के खिलाफ आरोप मुख्य रूप से धरना देने या अलग-अलग मंचों पर आम जनता की शिकायतों और समस्याओं को उठाने से जुड़े हैं।
गंभीर मामलों की कीमत पर अदालत का समय नहीं खर्च होना चाहिए
पीठ ने कहा कि ऐसे मामलों में अभियोजन जारी रखने से आपराधिक न्याय प्रशासन का कोई उद्देश्य पूरा नहीं होगा और न ही इससे जनहित को लाभ मिलेगा। इसके विपरीत, इन मुकदमों की सुनवाई में अदालतों का बहुमूल्य समय खर्च होगा, जबकि कई गंभीर और विवादास्पद मामलों का शीघ्र निपटारा जरूरी है।
लेखक के बारे मेंराजेश चौधरीराजेश चौधरी 2007 से नवभारत टाइम्स से जुड़े हुए हैं। वह दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट, निचली अदालत और सीबीआई से जुड़े विषयों को कवर करते हैं और स्पीड न्यूज में भी आपको इस बारे में खबर देते रहेंगे। यदि आपके पास कोर्ट से जुड़े मामलों की कोई सूचना है तो आप उनसे इस ईमेल अड्रेस - journalistrajesh@gmail.com - पर संपर्क कर सकते हैं।... और पढ़ें
कन्वर्सेशन शुरू करें
Legalकी ताजा खबरें, ब्रेकिंग न्यूज, अनकही और सच्ची कहानियां, सिर्फ खबरें नहीं उसका विश्लेषण भी। इन सब की जानकारी, सबसे पहले और सबसे सटीक हिंदी में देश के सबसे लोकप्रिय, सबसे भरोसेमंद Hindi Newsडिजिटल प्लेटफ़ॉर्म नवभारत टाइम्स पर
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
दिल्ली उच्च न्यायालय ने FSSAI से सवाल: रिड बुल पर 'एनर्जी ड्रिंक' वर्जन से पहले क्या नोटिस दिया गया?

सुप्रीम कोर्ट ने बच्चों के सोशल‑मीडिया उपयोग पर केंद्र को वैधानिक सुरक्षा व्यवस्था बनाने का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने शिवार सैना के कॉर्पोरेटर रामेश माथरे का बAIL निरस्त किया, डॉक्टरों पर हमला को रोकने के लिए मजबूत सन्देश

एनआईए की विशेष अदालत ने 'वॉइस ऑफ़ हिंद' साजिश में ISIS के चार सदस्यों को सजा दी

लखनऊ खंडपीठ से 25 साल बाद दूसरा जज: न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार उपाध्याय को सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तावित

सुप्रीम कोर्ट ने 22 बरी आरोपीयों को नोटिस जारी, अमित शाह के डिस्चार्ज को दोबारा नहीं खोला जाएगा

शिक्षक पर स्याही के हमले में 12 पर छह महीने की जेल

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा के लिए गहन ऑडिट का आदेश दिया
ताज़ा ख़बरें
- सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने तीन हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस को SC जज के पद के लिए सिफ़ारिश की
- मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफ़े की माँग पर देशभर में प्रदर्शन, मामला सुप्रीम कोर्ट में
- कोलेजियम ने गुजरात, दिल्ली और तेलंगाना के मुख्य न्यायाधीशों को सुप्रीम कोर्ट के लिए सिफारिश की
- सुप्रीम कोर्ट ने 92 गवाहों के पलटने पर जताई गहरी चिंता, अमित शाह को दिया विशेष निर्देश
- गुजरात, दिल्ली और तेलंगाना के हाई कोर्ट मुख्य न्यायाधीशों को सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति की सिफ़ारिश
- न्यायाधीश शर्मा का बहिष्कार वाद: भारत की न्यायिक नैतिकता पर नया सवाल
- 92 गवाहों के हटने पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई तीव्र चिंता, अमित शाह को दिया स्पष्ट निर्देश
- बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा: कई कानूनी शिकायतें दर्ज कराना आत्महत्या उकसाने का अपराध नहीं

