सुप्रीम कोर्ट ने AI के मनगढ़ंत फैसलों को आधार बनाने की नीति पर गहरी टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि न्यायिक आदेशों में मनगढ़ंत फैसलों को आधार बनाए जाने को लेकर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाएगी, और इंसानी निगरानी अनिवार्य है क्योंकि AI के मनगढ़ंत फैसले एक अदृश्य विनाश को निमंत्रण देने जैसे हो सकते हैं

सौजन्य से:- ABP News
AI के मनगढ़ंत फैसलों को आधार बनाया तो नहीं खैर, फर्जी जजमेंट से गुमराह करने पर भड़का सुप्रीम कोर्ट
Supreme Court: सुनवाई के दौरान जम्मू एंड कश्मीर बैंक ने भी स्पष्ट करते हुए कहा कि उसके वकीलों ने इन फैसलों का जिक्र कभी नहीं किया था. ट्रिब्यूनल ने खुद अपनी तरफ से इन फैसलों को आदेश में दर्ज किया है.
- न्यायिक प्रक्रिया में AI के प्रयोग पर मानवीय निगरानी अनिवार्य की।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) यानी कृत्रिम बुद्धिमत्ता के न्यायिक प्रक्रिया में इस्तेमाल पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है. कोर्ट ने नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) और नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) के आदेशों को पूरी तरह रद्द कर दिया है. यह आदेश AI की तरफ से उपलब्ध करवाए गए काल्पनिक फैसलों को आधार बना कर दिए गए थे.
'अदृश्य विनाश को निमंत्रण'
जस्टिस पी. एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने AI की काल्पनिक जानकारी को न्याय व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बताया. जजों ने इसकी तुलना भोपाल गैस कांड से की. उन्होंने इसे 'मिथाइल आइसोसाइनेट गैस के रिसाव’ जैसा बताया. बेंच ने कहा कि अगर इसे नियंत्रित न किया गया तो यह एक अदृश्य विनाश को निमंत्रण देने जैसा हो सकता है.
क्या है मामला?
जम्मू-कश्मीर बैंक ने पैन इंडिया यूटिलिटीज नाम की कंपनी को 200 करोड़ का कर्ज दिया. इसमें एस्सेल इंफ्राप्रोजेक्ट्स लिमिटेड नाम की कंपनी ने कॉरपोरेट गारंटी दी थी. लोन के 87.43 करोड़ रुपये बकाया होने को आधार बनाकर बैंक ने एस्सेल इंफ्राप्रोजेक्ट्स के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया शुरू करने का आवेदन दिया. NCLT ने इसे स्वीकार करते हुए अगस्त 2024 में दिवालिया कार्यवाही शुरू करने की अनुमति दी. इस आदेश को सितंबर 2025 में NCLAT ने भी बरकरार रखा.
आदेशों में क्या कमी?
एस्सेल इंफ्राप्रोजेक्ट्स से जुड़ी पूजा रमेश सिंह की तरफ से वरिष्ठ वकील माधवी दीवान सुप्रीम कोर्ट में पेश हुईं. उन्होंने बताया कि दोनों ट्रिब्यूनल ने अपने फैसलों में अपने फैसले में भारतीय स्टेट बैंक (SBI) और ICICI बैंक से जुड़े 6 ऐसे अदालती फैसलों का हवाला दिया जो सच में कभी हुए ही नहीं थे. वह पूरी तरह किसी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल की तरफ से गढ़े गए काल्पनिक केस थे.
सुनवाई के दौरान जम्मू एंड कश्मीर बैंक ने भी अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि उसके वकीलों ने इन फैसलों का जिक्र कभी नहीं किया था. ट्रिब्यूनल ने खुद अपनी तरफ से इन फैसलों को आदेश में दर्ज किया है.
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने दोनों ट्रिब्यूनल के फैसलों पर गहरी नाराजगी जताते हुए उन्हें रद्द कर दिया है. मामले को नए सिरे से सुनवाई के लिए वापस NCLT को भेज दिया गया है. कोर्ट ने कहा है कि वह न्यायिक आदेशों में मनगढ़ंत फैसलों को आधार बनाए जाने को लेकर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाएगा.
न्यायिक कामकाज में AI की सहायता लेने पर कोई रोक नहीं है, लेकिन इंसानी निगरानी अनिवार्य है. सुप्रीम कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया से भी कहा है कि वह कानूनी पेशे पर AI के असर और उससे जुड़ी चुनौतियों पर अध्ययन के लिए एक विशेषज्ञ समिति का गठन करे.
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