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हरियाणा पुलिस के एक्शन पर हाई कोर्ट का फैसला, साइबर अपराध के संदेह में पूरे खाते का जब्ती करना अनुचित

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने हरियाणा की साइबर पुलिस के उस आदेश को निरस्त किया है, जिसमें एक गृहिणी का बैंक खाता सीज करने का निर्देश दिया गया था, जबकि सिर्फ उसके खाते में जमा एक हज़ार रुपये की संदिग्ध राशि के बारे में था। उच्च न्यायालय ने कहा है कि बैंक खाता जब्त करना अनुचित है और पुलिस को इसके विकल्प के रूप में सिर्फ उतनी ही राशि को रोकना चाहिए, जिस पर अपराध की आय का संदेह हो।

29 जून 2026 को 07:25 am बजे
हरियाणा पुलिस के एक्शन पर हाई कोर्ट का फैसला, साइबर अपराध के संदेह में पूरे खाते का जब्ती करना अनुचित

सौजन्य से:- Jagran

'साइबर अपराध की जमा राशि के बजाय पूरा बैंक खाता जब्त करना अनुचित', हाई कोर्ट का अहम फैसला

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने हरियाणा साइबर क्राइम पुलिस द्वारा एक गृहिणी का बैंक खाता बिना कारण बताए सीज करने पर नोटिस जारी किया है। ...और पढ़ें

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जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

विधि संवाददाता, प्रयागराज। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने हरियाणा के मेवात जिला के साइबर क्राइम पुलिस द्वारा एक गृहिणी के बैंक खाते को बिना कारण बताए सीज करने पर नोटिस जारी किया है।

प्रयागराज की निवासी गृहिणी अनुश्री श्रीवास्तव का भारतीय स्टेट बैंक की एमएनएनआइटी शाखा तेलियरगंज में खाता है। 22 मार्च 2026 को हरियाणा के एक अज्ञात व्यक्ति ने उनके खाते में एक हजार रुपये जमा किया। इसके बाद 30 मार्च को उनका आनलाइन लेनदेन अचानक बंद हो गया।

पीड़िता ने 10 अप्रैल को बैंक शाखा प्रबंधक को लिखित आवेदन दिया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। वह कई बार बैंक गईं तो पता चला कि हरियाणा के साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन, मेवात, जिला नूंह के नौ अप्रैल के आदेश के तहत उनका पूरा बैंक खाता सीज कर दिया गया है।

न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति अरुण कुमार की खंडपीठ ने याचिका स्वीकार करते हुए कहा कि बीएनएसएस की धारा 106 (3) के तहत पुलिस को सीज की गई संपत्ति की सूचना तुरंत संबंधित मजिस्ट्रेट को देना अनिवार्य था, जो इस मामले में नहीं किया गया। पुलिस पूरे खाते को एकमुश्त सीज नहीं कर सकती।

सिर्फ उतनी ही राशि रोकी जा सकती है, जिस पर अपराध की आय होने का संदेह हो। इस मामले में एक हजार रुपये की संदिग्ध राशि के लिए पूरे खाते को सीज करना अनुचित है। कोर्ट ने पुलिस से जवाब मांगा है।

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उक्त मामले में अगली सुनवाई 14 जुलाई को होगी। कोर्ट ने भारतीय रिजर्व बैंक सहित विपक्षियों को दो सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

साथ ही साइबर क्राइम ब्रांच, मेवात के पुलिस अधीक्षक को अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया गया है, जिसमें यह स्पष्ट करना होगा कि बिना अपराध की राशि निर्दिष्ट किए पूरे खाते को क्यों सीज किया गया।

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