सिंघम-पुष्पा की जरूरत नहीं, कानून है समाज का सेवक
बिहार के बीजेपी विधायक राजू कुमार सिंह को हर्ष फायरिंग मामले में 4 साल की जेल की सजा सुनाई गई है. कोर्ट ने सामाजिक दबदबा के लिए हथियार चलाने की प्रवृत्ति पर गंभीर टिप्पणी की है. अदालत ने कहा कि कानून प्रभावी और निष्पक्ष होना चाहिए, न कि जन-प्रतिनिधि के पास एक विशेषाधिकार.

सौजन्य से:- AajTak
'कानून के राज में सिंघम-पुष्पा की जरूरत नहीं', महिला की जान लेने वाले BJP विधायक राजू सिंह पर कोर्ट सख्त
हर्ष फायरिंग में महिला की जान लेने वाले बिहार के बीजेपी विधायक राजू सिंह को सजा सुनाते हुए दिल्ली की विशेष अदालत ने सख्त टिप्पणी की है. कोर्ट ने कहा कि राजू कुमार सिंह ने गोली चलाकर समाज में दबदबा दिखाने की कोशिश की, जिससे अवैध हथियारों का चलन बढ़ा है.
X
बिहार के बीजेपी विधायक राजू कुमार सिंह को हर्ष फायरिंग मामले में दिल्ली की अदालत ने 4 साल जेल की सजा सुनाई. (Photo: ITG)
- नई दिल्ली,
- 05 जुलाई 2026,
- (अपडेटेड 05 जुलाई 2026, 9:00 AM IST)
नई दिल्ली की विशेष अदालत ने हर्ष फायरिंग के दौरान एक महिला की जान लेने के मामले में बिहार के बीजेपी विधायक राजू कुमार सिंह को सजा सुनाते हुए सार्वजनिक प्रतिनिधियों द्वारा हथियारों के अवैध प्रदर्शन पर गंभीर और तीखी टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि एक सभ्य समाज में कानून के शासन के आगे न तो 'सिंघम' की जरूरत है और न ही 'पुष्पा' की. ऐसी हरकतें समाज में अवैध हथियार के चलन को बढ़ावा देती हैं.
विशेष जज विशाल गोगने की अदालत ने अपने 34 पन्नों के विस्तृत फैसले में साफ तौर पर कहा कि राजू कुमार सिंह पूरी तरह से सत्ता के नशे में चूर थे और वो केवल गोली चलाकर समाज में अपना दबदबा और रुतबा दिखाना चाहते थे. ऐसी गैर-जिम्मेदाराना हरकतें समाज में अवैध हथियारों के चलन को खतरनाक तरीके से बढ़ावा देती हैं और इन्हीं मुख्य वजहों से आज देश की राजनीति में बाहुबलियों का दखल लगातार बढ़ा है. राजू कुमार सिंह की हर्ष फायरिंग ने इन दोनों की ही सोच को बढ़ावा दिया है.
अदालत ने अपने फैसले में दोटूक शब्दों में कहा कि कानून राजू कुमार सिंह से अलग व्यवहार सिर्फ इसलिए नहीं कर सकता कि वह एक मौजूदा विधायक है. कोर्ट ने ये भी स्पष्ट किया कि सिर्फ इसलिए कि किसी दोषी ने पहले जन-सेवा की है, उसे नाममात्र की सजा नहीं दी जा सकती. सरकारी पद वो भी जनता के हाथों चुना हुआ पद, सम्मान और जनता के भरोसे का पद होता है. जब कोई जन-प्रतिनिधि ही गंभीर अपराध करता है तो ये भरोसा पूरी तरह धूमिल होता है और उसका उल्लंघन होता है.
वहीं, वारदात के बाद के घटनाक्रम पर कोर्ट ने कहा कि गोली चलने से घायल हुई महिला का खून भी डीजे डांस फ्लोर से राजू ने साफ करवाकर सबूत मिटाने की पूरी कोशिश की थी. इसके बाद वह कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए नेपाल भागने की फिराक में था, लेकिन भारत-नेपाल की कुशीनगर बॉर्डर पर सतर्क सुरक्षाबलों उसे समय रहते दबोच लिया.
---- समाप्त ----
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
गुजरात में नौवाहनविभाग और नौवहन कानूनों पर कार्यशाला का उद्घाटन

सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में बड़े मामलों की सुनवाई

राममंदिर चढ़ावा चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट में 10 अगस्त को सुनवाई

भाजपा हमलावर, अदालत ने बोला झूठे थे उत्पीड़न के आरोप बृजभूषण शरण सिंह केस पर

लाइव लॉ इलाहाबाद उच्च न्यायालय के महत्वपूर्ण आदेश और निर्णय - 3 अगस्त - 9 अगस्त, 2026

न्यायालय की संवेदनशीलता पुस्तिका

दिल्ली केस में भाग जाने वाली पत्नी और ससुर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज

पटना हाईकोर्ट ने पुलिस हिरासत के बाद दिया व्यक्ति के लापता होने के मामले में सीबीआई जांच का आदेश
ताज़ा ख़बरें
- निरीक्षण, मूल्यांकन और शिकायतें: केंद्र ने ट्रिब्यूनलों के लिए नए आयोग का प्रस्ताव रखा
- ममता बनर्जी पर हमला: अरविंद केजरीवाल का भाजपा पर तीखा हमला
- इलाहाबाद उच्च न्यायालय साप्ताहिक राउंड-अप: 3 अगस्त - 9 अगस्त, 2026
- यूपी में खराब कानून व्यवस्था पर अखिलेश यादव ने की सरकार की आलोचना
- भाजपा सरकार ने कानून-व्यवस्था को बर्बाद कर दिया: अखिलेश यादव
- स्मृति सभा में शामिल होने पर टिस के दो छात्रों की गिरफ्तारी, अदालत ने जमानत देने से किया इनकार
- मंत्री पटेल ने विपक्ष के आरोपों का दी reply, कहा नहीं ओबीसी आरक्षण घटाया
- क्या भारत में किसी राज्य में धर्म परिवर्तन के लिए सबसे सख्त कानून है?

