महाराष्ट्र: गुड़ उद्योग के लिए अलग कानून का संशोधित मसौदा तैयार, चीनी आयुक्तालय की पहल - ChiniMandi
पुणे: महाराष्ट्र में पिछले कुछ वर्षों के दौरान गुड़ उद्योग में बड़े बदलाव हुए हैं। पहले किसान अपने खेत के गन्ने या आसपास के किसानों से खरीदे गए गन्ने से छोटे स्तर पर गुड़ तैयार करते थे। लेकिन अब गुड़ उत्पादन का कारोबार त…

सौजन्य से:- ChiniMandi
पुणे: महाराष्ट्र में पिछले कुछ वर्षों के दौरान गुड़ उद्योग में बड़े बदलाव हुए हैं। पहले किसान अपने खेत के गन्ने या आसपास के किसानों से खरीदे गए गन्ने से छोटे स्तर पर गुड़ तैयार करते थे। लेकिन अब गुड़ उत्पादन का कारोबार तेजी से व्यावसायिक और औद्योगिक स्वरूप ले रहा है। राज्य में बड़े पैमाने पर निवेश करके प्रतिदिन सैकड़ों टन गन्ने की पेराई करने वाले गुड़ उत्पादन प्लांट शुरू हो चुके हैं।
इसी पृष्ठभूमि में महाराष्ट्र सरकार ने गुड़ उद्योग के लिए अलग कानून बनाने का निर्णय लिया है। गुड़ उद्योग को कानूनी दायरे में लाने के लिए चीनी आयुक्तालय ने अलग कानून का मसौदा तैयार कर सरकार को भेजा था। सरकार ने मसौदे में कुछ संशोधन और बदलाव सुझाए है। इन सुझावों पर इसी सप्ताह बैठक होने की संभावना है। इसके बाद संशोधित मसौदा फिर से सरकार को भेजा जाएगा।
बड़े गुड़ उत्पादन प्लांट्स पर नियंत्रण की जरूरत
वर्तमान में बड़े गुड़ उत्पादन प्लांट्स के संचालन पर चीनी मिलों की तरह अलग और स्पष्ट नियंत्रण व्यवस्था नहीं है। इसके कारण गन्ने की खरीद की प्रक्रिया, किसानों को दिए जाने वाले गन्ने के दाम, उत्पादन प्रक्रिया, प्रदूषण नियंत्रण और अन्य औद्योगिक नियमों के पालन को लेकर सवाल उठ रहे हैं। प्रस्तावित कानून के तहत प्रतिदिन 25 टन या उससे अधिक गन्ने की पेराई क्षमता वाले गुड़ उत्पादन प्लांट्स को कानून के दायरे में लाया जा सकता है। इससे बड़े गुड़ उत्पादन प्रकल्पों के कामकाज को एक निर्धारित कानूनी और नियामक व्यवस्था के तहत लाने में मदद मिल सकती है।
राज्य सरकार के सुझावों के अनुसार होगा संशोधन
राज्य सरकार के स्तर पर मसौदे की समीक्षा के बाद यह स्पष्ट हुआ है कि कुछ प्रावधानों में संशोधन और अधिक विचार-विमर्श की आवश्यकता है। सरकार की ओर से दिए गए सुझावों के अनुसार मसौदे में आवश्यक बदलाव किए जाएंगे। इसके लिए संबंधित विभागों और अधिकारियों के साथ चर्चा की जाएगी। चीनी आयुक्त डॉ. संजय कोलते ने दैनिक ‘सकाळ’ से बातचीत में बताया कि, गुड़ उद्योग के लिए प्रस्तावित कानून का मसौदा सरकार को भेजा गया था। सरकार की ओर से कुछ संशोधन और बदलाव सुझाए गए हैं। संबंधित अधिकारियों और पक्षों के साथ चर्चा के बाद आवश्यक बदलाव किए जाएंगे।
उन्होंने बताया कि, इस संबंध में इसी सप्ताह बैठक होने की संभावना है। बैठक के बाद संशोधित मसौदा सरकार को दोबारा भेजा जाएगा। प्रस्तावित कानून लागू होने के बाद महाराष्ट्र में तेजी से बढ़ रहे बड़े गुड़ उत्पादन उद्योग को नियमों के दायरे में लाने, किसानों के हितों की रक्षा करने और पर्यावरण एवं औद्योगिक मानकों के पालन को सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है।
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