सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पूर्व डीजीपी ने किया समर्थन, हिंसक तत्वों पर सख्त कार्रवाई की मांग
पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह और एके जैन ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का समर्थन किया और हिंसक तत्वों पर सख्त कार्रवाई की वकालत की। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन संविधान प्रदत्त अधिकार है, लेकिन हिंसा और अराजकता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

सौजन्य से:- Navbharat Times
नोएडा में पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट कर दिया है कि जिन लोगों ने हिंसा की है या जो आपराधिक गतिविधियों में शामिल रहे हैं, उनके प्रति किसी भी प्रकार का दोहरा मापदंड नहीं अपनाया जाएगा और न ही उन्हें किसी तरह का संरक्षण मिलेगा। न्यायालय का यह निर्देश कानून के शासन को मजबूत करने वाला है।
कुछ लोग स्वयं को कानून से ऊपर समझते हैं
विक्रम सिंह ने सीजेपी की उस प्रतिक्रिया पर कड़ी आपत्ति जताई, जिसमें कथित तौर पर कहा गया कि यदि प्रशासनिक आदेश के माध्यम से सभी मामलों को वापस नहीं लिया गया तो दोबारा धरना दिया जाएगा। उन्होंने इसे सर्वोच्च न्यायालय की अवमानना बताते हुए कहा कि इस प्रकार की भाषा यह संकेत देती है कि कुछ लोग स्वयं को कानून से ऊपर समझते हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सर्वोच्च न्यायालय के आदेश सभी के लिए बाध्यकारी होते हैं और यदि किसी पक्ष को अदालत का निर्णय स्वीकार नहीं है, तो उसके पास कानूनी उपाय उपलब्ध हैं। ऐसे मामलों में अदालत में पुनर्विचार याचिका या अन्य वैधानिक प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए, न कि सड़कों पर उतरकर दबाव बनाने की कोशिश की जानी चाहिए।पूर्व डीजीपी ने शासन-प्रशासन और पुलिस से भी अपील की कि वे हर संभावित परिस्थिति के लिए तैयार रहें, लेकिन कानून-व्यवस्था बनाए रखने के दौरान संयम बरतें। बिना अनावश्यक बल प्रयोग और बिना हिंसा के स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास होना चाहिए, क्योंकि पुलिस जनता की शत्रु नहीं है।
शांतिपूर्ण प्रदर्शन संविधान प्रदत्त अधिकार है
वहीं, लखनऊ में पूर्व डीजीपी एके जैन ने सुप्रीम कोर्ट की उस टिप्पणी का स्वागत किया, जिसमें अदालत ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन संविधान प्रदत्त अधिकार है और अत्यधिक बल प्रयोग के मामलों में कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अदालत का निर्णय संतुलित और सुविचारित है। यदि प्रदर्शन की आड़ में शामिल आपराधिक तत्वों को भी बिना जांच के राहत दे दी जाएगी, तो इससे भविष्य में गलत संदेश जाएगा। हत्या, दुष्कर्म, नारकोटिक्स जैसे गंभीर मामलों में आरोपी या हिस्ट्रीशीटर यदि प्रदर्शनों में शामिल होकर हिंसा फैलाते हैं और उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं होती, तो इससे असामाजिक तत्वों का मनोबल बढ़ेगा।उन्होंने दावा किया कि फेशियल रिकग्निशन सिस्टम के आधार पर दिल्ली पुलिस की रिपोर्ट में लगभग 2800 ऐसे लोगों की पहचान की गई है, जो विभिन्न आपराधिक मामलों में आरोपी या हिस्ट्रीशीटर बताए गए हैं। यह गंभीर जांच का विषय है कि लंबे समय तक शांतिपूर्ण ढंग से चल रहा छात्र आंदोलन अचानक हिंसक कैसे हो गया और उसमें ऐसे तत्व कैसे शामिल हो गए।
पूर्व डीजीपी ने आगे कहा कि यदि किसी आंदोलन में बाहरी आपराधिक तत्व घुसकर पथराव, हिंसा और कानून-व्यवस्था को प्रभावित करते हैं तो उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि भविष्य के लिए एक स्पष्ट नजीर स्थापित हो सके। इससे यह संदेश जाएगा कि लोकतांत्रिक विरोध के नाम पर हिंसा और अराजकता को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
गुजरात में नौवाहनविभाग और नौवहन कानूनों पर कार्यशाला का उद्घाटन

सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में बड़े मामलों की सुनवाई

राममंदिर चढ़ावा चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट में 10 अगस्त को सुनवाई

भाजपा हमलावर, अदालत ने बोला झूठे थे उत्पीड़न के आरोप बृजभूषण शरण सिंह केस पर

लाइव लॉ इलाहाबाद उच्च न्यायालय के महत्वपूर्ण आदेश और निर्णय - 3 अगस्त - 9 अगस्त, 2026

न्यायालय की संवेदनशीलता पुस्तिका

दिल्ली केस में भाग जाने वाली पत्नी और ससुर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज

पटना हाईकोर्ट ने पुलिस हिरासत के बाद दिया व्यक्ति के लापता होने के मामले में सीबीआई जांच का आदेश
ताज़ा ख़बरें
- निरीक्षण, मूल्यांकन और शिकायतें: केंद्र ने ट्रिब्यूनलों के लिए नए आयोग का प्रस्ताव रखा
- ममता बनर्जी पर हमला: अरविंद केजरीवाल का भाजपा पर तीखा हमला
- इलाहाबाद उच्च न्यायालय साप्ताहिक राउंड-अप: 3 अगस्त - 9 अगस्त, 2026
- यूपी में खराब कानून व्यवस्था पर अखिलेश यादव ने की सरकार की आलोचना
- भाजपा सरकार ने कानून-व्यवस्था को बर्बाद कर दिया: अखिलेश यादव
- स्मृति सभा में शामिल होने पर टिस के दो छात्रों की गिरफ्तारी, अदालत ने जमानत देने से किया इनकार
- मंत्री पटेल ने विपक्ष के आरोपों का दी reply, कहा नहीं ओबीसी आरक्षण घटाया
- क्या भारत में किसी राज्य में धर्म परिवर्तन के लिए सबसे सख्त कानून है?

