दिल्ली दंगा मामले में आरोपी अतहर खान को नहीं मिली जमानत, कोर्ट ने उन्हें बताया प्रमुख साजिशकर्ता
दिल्ली हाईकोर्ट ने 2020 के नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली दंगा मामले में आरोपी अतहर खान की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी है, उन्हें मुख्य साजिशकर्ता बताया गया है। कोर्ट ने कहा कि आरोपी के मददगार नहीं, बल्कि मुख्य साजिशकर्ता होने के सबूत मिले हैं।

सौजन्य से:- Navbharat Times
दिल्ली दंगा साजिश केस: अतहर खान को नहीं मिली जमानत, HC बोला- 'मुख्य साजिशकर्ता' होने के दिखे सबूत
दिल्ली हाईकोर्ट ने 2020 के नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली दंगा साजिश मामले के आरोपी अतहर खान की नियमित जमानत याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया है कि वह केवल मददगार नहीं, बल्कि 'मुख्य साजिशकर्ता' थे।
ट्रायल कोर्ट के आदेश को रखा बरकरार
जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस मधु जैन की बेंच ने 7 जुलाई को सुनाए फैसले में ट्रायल कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा। यह मामला एफआईआर संख्या 59/2020 से जुड़ा है, जिसमें गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) और IPC) की गंभीर धाराएं लगाई गई हैं, जिनमें हत्या और आपराधिक साजिश के आरोप भी शामिल हैं।2020 में एक गुप्त बैठक में आरोपी ने कही ये बात
दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने फैसले में सुरक्षित गवाह 'प्लूटो' के बयान का खासतौर पर उल्लेख किया। अभियोजन के अनुसार, फरवरी 2020 में हुई एक गुप्त बैठक में अतहर खान ने कथित तौर पर कहा था कि ‘पूरी दिल्ली को दहलाना है’ और उनका उद्देश्य तब तक पूरा नहीं होगा, जब तक ‘100-200 लोग’ न मारे जाएं। कोर्ट ने साफ किया कि इन आरोपों की अंतिम सच्चाई का फैसला ट्रायल में होगा, लेकिन फिलहाल उपलब्ध सामग्री को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।कोर्ट ने आरोपी की चैट का भी किया जिक्र
कोर्ट ने अभियोजन की ओर से पेश की गई अतहर खान(कॉलसेंटर के पूर्व कर्मचारी) और ओवैस सुल्तान खान के बीच हुई व्हाट्सऐप चैट का भी जिक्र किया। आदेश के अनुसार, जहां कुछ अन्य लोग CAA और NRC के विरोध को अहिंसक बनाए रखने की बात कर रहे थे, वहीं अतहर खान कथित तौर पर हिंसक तरीके से सड़क जाम और टकराव की रणनीति पर कायम रहे।अथर खान पर ये आरोप
बेंच ने कहा कि जिन सह-आरोपियों को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली थी, उनकी भूमिका अलग थी, जबकि अथर खान पर आरोप है कि उन्होंने 17 फरवरी 2020 की बैठक में 'चक्का जाम' को बड़े दंगों में बदलने का रोडमैप तैयार किया था। अभियोजन का यह भी आरोप है कि उन्हें दंगों की तैयारी के लिए सह-आरोपी ताहिर हुसैन से धन मिला था।सुरक्षित गवाहों को प्रभावित करने का खतरा
कोर्ट ने यह भी माना कि इस चरण पर अतहर खान को रिहा करने से उनके फरार होने और उन सुरक्षित गवाहों को प्रभावित करने का खतरा है, जिनकी गवाही अभी दर्ज होनी बाकी है। हाई कोर्ट ने कहा कि 53 लोगों की जान लेने वाले नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली दंगों की गंभीरता और रिकॉर्ड पर मौजूद प्रथम दृष्टया सामग्री को देखते हुए UAPA की धारा 43D(5) के तहत जमानत देने की शर्तें पूरी नहीं होतीं।कन्वर्सेशन शुरू करें
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