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भारतीय कानून के दायरे में आएंगे इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म

हाई कोर्ट ने कहा कि बहुराष्ट्रीय डिजिटल मंच भारतीय कानून से ऊपर नहीं हैं और उन्हें जांच एजेंसियों के प्रति जवाबदेही से बच नहीं सकते। पुलिस आयुक्त को 12 अगस्त को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया गया है।

8 जुलाई 2026 को 03:58 am बजे
भारतीय कानून के दायरे में आएंगे इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म

सौजन्य से:- Jagran

इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म भारतीय कानून से ऊपर नहीं: हाई कोर्ट

हाई कोर्ट ने इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' के असहयोग पर कड़ी नाराजगी जताई है, कहा कि बहुराष्ट्रीय डिजिटल मंच भारतीय कानून से ऊपर नहीं हैं। न्यायालय ...और पढ़ें

HighLights

- हाई कोर्ट ने 'एक्स' के असहयोग पर कड़ी नाराजगी जताई।

- कहा, बहुराष्ट्रीय डिजिटल मंच भारतीय कानून से ऊपर नहीं।

- पुलिस आयुक्त को 12 अगस्त को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश।

विधि संवाददाता, जागरण, प्रयागराज। हाई कोर्ट ने इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) के असहयोगात्मक रवैये पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि बहुराष्ट्रीय डिजिटल मंच भारतीय कानून और जांच एजेंसियों के प्रति जवाबदेही से बच नहीं सकते। भारतीय कानून का दायरा इतना व्यापक है कि वह किसी भी उल्लंघन तक पहुंच सकता है और दोषियों को न्याय के कठघरे में ला सकता है। यह टिप्पणी न्यायमूर्ति अजय भनोट और न्यायमूर्ति दिवेश चंद्र सामंत की खंडपीठ ने साइबर अपराध से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान की।

मामले में जांच अधिकारी ने अपने हलफनामे में बताया कि "एक्स" ने उस खाते का यूआरएल पहचान विवरण और आइपी एड्रेस उपलब्ध नहीं कराया, जिससे याची मिथिलेश कुमार की अश्लील वीडियो और तस्वीरें साझा की थीं। इस असहयोग के कारण वह मामले में आगे बढ़ने में असमर्थ हैं और जांच पूरी करने के लिए अतिरिक्त समय चाहिए।

हाई कोर्ट ने कहा कि पहली नजर में यह हलफनामा "पुलिस व्यवस्था की विफलता स्वीकार करने" जैसा है। एक ओर ‘एक्स’ के जिम्मेदार अधिकारियों ने जांच में बाधा उत्पन्न की, वहीं दूसरी ओर पुलिस ने भी अपने वैधानिक दायित्वों का निर्वहन नहीं किया। यह रवैया अंततः आरोपितों को कानून से बच निकलने का अवसर देगा।

याची ने गाजियाबाद के पुलिस आयुक्त को यह निर्देश देने की मांग याचिका में की है कि उनकी एफआइआर की निष्पक्ष प्रभावी और शीघ्र जांच कराई जाए। यह एफआइआर सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67-ए के तहत दर्ज की है, जो इलेक्ट्रानिक माध्यम से आपत्तिजनक सामग्री प्रकाशित करने से संबंधित है।

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मामले की शुरुआती सुनवाई न्यायमूर्ति राजीव मिश्रा और न्यायमूर्ति पद्म नारायण मिश्रा की खंडपीठ ने की थी। याची ने तब कहा था कि प्राथमिकी दर्ज होने के साढ़े चार महीने बाद भी जांच पूरी नहीं हुई। अदालत ने नाराजगी जता पुलिस आयुक्त को तलब किया था। बाद में राज्य सरकार की ओर से अदालत को आश्वासन दिया गया था कि एक महीने के भीतर जांच पूरी करने का हरसंभव प्रयास किया जाएगा।

अब कोर्ट ने जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए पुलिस आयुक्त को 12 अगस्त को अगली सुनवाई तिथि पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया है। इस दिन सुनवाई उपयुक्त पीठ के समक्ष होगी। आदेश की प्रति गृह सचिव और डीजीपी को भी भेजने का निर्देश कोर्ट ने दिया है।

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