केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा, नए कानून के खिलाफ याचिकाओं पर फैसला होने तक ट्रांसजेंडर ID कार्ड मान्य रहेंगे
केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा, नए कानून के खिलाफ याचिकाओं पर फैसला होने तक ट्रांसजेंडर ID कार्ड मान्य रहेंगे सरकार का ट्रांसजेंडर पोर्टल साफ तौर पर कहता है कि इससे सरकारी दस्तावेज़ों में नाम और जेंडर में बदलाव किया जा स…

सौजन्य से:- ETV Bharat
केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा, नए कानून के खिलाफ याचिकाओं पर फैसला होने तक ट्रांसजेंडर ID कार्ड मान्य रहेंगे
सरकार का ट्रांसजेंडर पोर्टल साफ तौर पर कहता है कि इससे सरकारी दस्तावेज़ों में नाम और जेंडर में बदलाव किया जा सकता है.
By Sumit Saxena
Published : August 18, 2026 at 9:39 AM IST
नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि 'ट्रांसजेंडर पर्सन्स (प्रोटेक्शन ऑफ़ राइट्स) अमेंडमेंट एक्ट, 2026' के लागू होने से पहले जारी किए गए ट्रांसजेंडर पहचान पत्र मान्य रहेंगे और नए कानून से उन पर कोई असर नहीं पड़ेगा.
यह मामला भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की बेंच के सामने आया. यह बेंच 2026 के संशोधन को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, 'मैंने निर्देश ले लिए हैं. पहले जारी किए गए टीजीआई आईडी कार्ड, याचिकाओं पर आने वाले फैसले के आधार पर काम करते रहेंगे.'
ट्रांसजेंडर आइडेंटिटी (TGI) कार्ड किसी व्यक्ति के खुद बताए गए जेंडर को आधिकारिक मान्यता देता है और इसका इस्तेमाल सरकारी रिकॉर्ड में नाम और जेंडर में बदलाव के लिए किया जा सकता है. सरकार का ट्रांसजेंडर पोर्टल साफ तौर पर कहता है कि इससे सरकारी दस्तावेज़ों में नाम और जेंडर में बदलाव किया जा सकता है.
मेहता ने कहा कि केंद्र सरकार याचिकाओं पर अपना जवाब दाखिल करेगी. बेंच ने शीर्ष कानूनी अधिकारी की दलीलों को रिकॉर्ड पर लिया और याचिकाओं पर अंतिम सुनवाई के लिए तीन हफ़्ते बाद की तारीख तय की. सुनवाई के दौरान एक याचिका में पेश हुईं सीनियर एडवोकेट जयना कोठारी ने कहा कि जो ट्रांसजेंडर कार्ड पहले रद्द कर दिए गए थे, उन्हें बहाल किया जाना चाहिए.
साथ ही, उन्होंने उन लोगों के लिए सुरक्षा की भी मांग की जिन्होंने आवेदन तो कर दिया है, लेकिन अभी कार्ड मिलने का इंतजार कर रहे हैं. बेंच ने जवाब दिया कि वह केंद्र सरकार के जवाब वाले हलफनामे का इंतजार करेगी. वरिष्ठ वकील अरुंधति काटजू ने दलील दी कि 2019 का कानून लिंग की स्व-पहचान की अवधारणा पर आधारित था.
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि 2026 के संशोधन के आधार पर मूल कानून से मिलने वाले लाभों को बंद नहीं किया जाना चाहिए. वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद ग्रोवर ने तर्क दिया कि कुछ राज्यों ने 2014 के एनएएलएसए फैसले के आधार पर ट्रांसजेंडर कार्ड जारी किए, न कि 2019 अधिनियम के आधार पर.
एक अन्य वकील ने तर्क दिया कि 2026 के संशोधन के कारण, चिकित्सा उपचार करा रहे व्यक्तियों को सेवा व्यवधान का सामना करना पड़ रहा है. एक अन्य वकील ने कल्याणकारी लाभों और सेवाओं में व्यवधान पर भी चिंता जताई. 3 अगस्त को हुई पिछली सुनवाई में बेंच ने मौखिक रूप से कहा था कि संशोधन से लोगों को पहले से मिले अधिकार छीने नहीं जा सकते. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह 2026 के कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली सभी याचिकाओं पर 17 अगस्त को अंतिम सुनवाई करेगा.
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