आरटीई के तहत सीधे KG-1 में नहीं मिलेगा प्रवेश, हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
नागपुर खंडपीठ ने एक याचिका को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि आरटीई के तहत किसी भी बच्चे को सीधे केजी-1 में प्रवेश नहीं दिया जा सकता। अदालत ने कहा कि आरटीई कानून के अनुसार प्री-प्राइमरी स्तर पर नर्सरी ही प्रवेश का पहला चरण है और कानून में सीधे केजी-1 में दाखिले का कोई प्रावधान नहीं है।

सौजन्य से:- Awaaz India Tv Channel
नागपुर खंडपीठ ने कहा- बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने शिक्षा का अधिकार (RTE) कानून को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि आरटीई के तहत किसी भी बच्चे को सीधे केजी-1 (KG-1) में प्रवेश नहीं दिया जा सकता। कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं, पहले नर्सरी में ही लेना होगा दाखिला
नागपुर: बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने शिक्षा का अधिकार (RTE) कानून को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि आरटीई के तहत किसी भी बच्चे को सीधे केजी-1 (KG-1) में प्रवेश नहीं दिया जा सकता। अदालत ने कहा कि आरटीई कानून के अनुसार प्री-प्राइमरी स्तर पर ‘नर्सरी’ ही प्रवेश का पहला चरण है और कानून में सीधे केजी-1 में दाखिले का कोई प्रावधान नहीं है।
यह फैसला न्यायमूर्ति उर्मिला जोशी-फणसेकर और निवेदिता मेहता की खंडपीठ ने एक याचिका को खारिज करते हुए सुनाया।
क्या था मामला?
शिक्षा विभाग की जांच के दौरान घर का पता नहीं मिला इसलिए 2025-26 के साल में सिविल लाइन्स के भवन्स स्कूल में एक छात्र को ‘नर्सरी’ में प्रवेश से वंचित कर दिया गया था। उस निर्णय के विरुद्ध छात्र के पालकों ने किसी भी सक्षम प्राधिकरण के समक्ष शिकायत नहीं की। बाद में उसने 2026-27 में सीधे केजी-1 कक्षा में प्रवेश के लिए आवेदन किया था। वह आवेदन स्वीकृत न होने पर उसने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी।
याचिकाकर्ता ने वर्ष 2025-26 में अपने बच्चे को आरटीई के तहत नर्सरी में प्रवेश दिलाने के लिए आवेदन किया था, लेकिन सीट नहीं मिलने पर उसने संबंधित सक्षम प्राधिकरण के समक्ष कोई शिकायत या अपील नहीं की। इसके बाद अगले शैक्षणिक सत्र 2026-27 में उसने सीधे केजी-1 में प्रवेश के लिए आवेदन किया, जिसे अस्वीकार किए जाने पर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
अदालत ने कहा कि यदि नर्सरी में प्रवेश नहीं मिला था तो पहले उसके खिलाफ निर्धारित वैधानिक प्रक्रिया के तहत अपील या शिकायत की जानी चाहिए थी। ऐसा नहीं करने से वह निर्णय अंतिम माना जाएगा। बाद में सीधे केजी-1 में प्रवेश की मांग कानून के अनुरूप नहीं है।
खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि आरटीई अधिनियम की धारा 12(1)(c) के तहत 25 प्रतिशत आरक्षण प्री-प्राइमरी स्तर पर केवल नर्सरी के लिए लागू होता है। केजी-1 में सीधे प्रवेश देने के संबंध में न तो कोई कानूनी प्रावधान, न कोई नियम और न ही सरकार की कोई नीति मौजूद है।
अदालत की अहम टिप्पणी
हाईकोर्ट ने कहा कि आरटीई कानून संविधान के अनुच्छेद 21-ए के तहत बच्चों को शिक्षा का अधिकार सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया एक कल्याणकारी कानून है। हालांकि, न्यायालय कानून की व्याख्या करते हुए ऐसा अधिकार नहीं दे सकता, जिसे स्वयं कानून ने मान्यता ही नहीं दी हो। इसलिए निर्धारित प्रक्रिया को दरकिनार कर सीधे केजी-1 में प्रवेश देने का आदेश नहीं दिया जा सकता।
इस फैसले के बाद स्पष्ट हो गया है कि आरटीई के तहत प्रवेश पाने के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है और नर्सरी को छोड़कर सीधे केजी-1 में दाखिला नहीं लिया जा सकता।
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