न्याय की जीत: सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बांग्लादेश से लौटे चार भारतीय नागरिक
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद बांग्लादेश से चार भारतीय नागरिक वापस लौट आए हैं, जिन्हें पिछले साल दिल्ली पुलिस ने बांग्लादेशी बताकर डिपोर्ट कर दिया था. परिवार का आरोप है कि उन्हें सिर्फ इसलिए पकड़ा गया क्योंकि वो बंगाली बोल रहे थे. सुप्रीम कोर्ट ने उनकी वापसी के लिए निर्देश दिया था.

सौजन्य से:- AajTak
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दिल्ली से गिरफ्तार किए जाने के बाद लगभग एक साल पहले बांग्लादेश डिपोर्ट किए गए बंगाल के बीरभूम में रहने वाले चार नागरिकों की सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद वतन वापसी हो गई है.
स्वदेश लौटने वाले इन चार लोगों में स्वीटी बीबी, उनके दो नाबालिग बेटे और दानिश शेख शामिल हैं. दानिश शेख वास्तव में सोनाली खातून के पति हैं. सोनाली खातून को उनके गर्भावस्था के एडवांस स्टेज (अंतिम महीनों) को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर पिछले साल 5 दिसंबर को ही बांग्लादेश से मालदा सीमा के रास्ते वापस भारत लाया गया था. सोनाली ने इस साल जनवरी में बेटे को जन्म दिया था.
अधिकारियों ने बताया कि बीरभूम भेजने से पहले अधिकारियों ने मालदा के इंग्लिशबाजार ब्लॉक में महादीपुर इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट के जरिए उनकी वापसी की प्रक्रिया पूरी की.
पुलिस के अनुसार, इन चारों को (गर्भवती सोनाली खातून और उनके नाबालिग बेटे के साथ) पिछले साल 22 जून को दिल्ली पुलिस ने तब गिरफ्तार किया था, जब वह राजधानी में फेरीवाले का काम कर रहे थे. उनके परिवारों का आरोप है कि उन्हें इसलिए पकड़ा गया, क्योंकि वो बंगाली बोल रहे थे और पुलिस को शक था कि वग घुसपैठिए हैं.
पुलिस ने बताया कि सभी को पकड़े जाने के बाद इस समूह को असम ले जाया गया और कथित तौर पर सीमा पार बांग्लादेश भेज दिया गया, जहां वो फंसे रहे. बाद में उनके परिवारों ने कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और मामला आखिरकार सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा.
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद, जिसमें उनकी गर्भावस्था के अंतिम चरण का संज्ञान लिया गया था, सोनाली को पिछले साल दिसंबर में उनके बेटे साबिर के साथ मालदा सीमा के रास्ते भारत वापस लाया गया था. उन्होंने जनवरी में एक बेटे को जन्म दिया. हालांकि, बाकी चार लोगों की वापसी के लिए कानूनी लड़ाई जारी रही.
'हम बहुत खुश हैं'
स्वीटी बीबी के भाई आमिर खान ने मीडिया से कहा, 'मेरी बहन और अन्य लोगों को दिल्ली पुलिस ने सिर्फ इसलिए हिरासत में लिया था, क्योंकि वो बंगाली बोल रहे थे. इस साल 22 मई को सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि उन्हें बांग्लादेश से वापस लाया जाए. हम बहुत खुश हैं कि वो आखिरकार आज घर लौट आए हैं.'
अधिकारियों ने बताया कि सीमा पर औपचारिकताएं पूरी होने के बाद प्रशासन ने परिवार के सदस्यों को बीरभूम में उनके पैतृक गांव भेजने की व्यवस्था की.
TMC सांसद ने जताई खुशी
इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सांसद समीरुल इस्लाम ने इस वापसी को एक लंबी कानूनी लड़ाई का सुखद अंत बताया.
इस्लाम ने एक्स पर पोस्ट साझा कर लिखा, 'बीरभूम के गरीब और अवैध रूप से निर्वासित लोगों का लंबे वक्त से देखा जा रहा सपना आखिरकार सच हो गया है. एक साल से ज्यादा समय तक चली कानूनी लड़ाई के बाद स्वीटी बीबी, उनके दो नाबालिग बेटे और सोनाली खातून के पति आखिरकार अपनी मातृभूमि लौट आए हैं. सोनाली खातून पिछले साल दिसंबर में ही लौट आई थीं.'
उन्होंने कहा कि न्यायपालिका के दखल की वजह से ही केंद्र सरकार इन गरीब भारतीय नागरिकों को वापस लाने के लिए मजबूर हुई, जिन्हें घुसपैठिया होने के शक में बांग्लादेश भेज दिया गया था. हालांकि, अवैध घुसपैठियों के खिलाफ कार्रवाई जरूरी है, लेकिन भारतीय नागरिकों को डिपोर्टेशन के नाम पर परेशान नहीं किया जाना चाहिए और उनके साथ अन्याय नहीं होना चाहिए.
उन्होंने उन वकीलों का भी शुक्रिया अदा किया जिन्होंने परिवारों का पक्ष रखा और कहा कि बांग्लादेश में फंसे लोगों की वापसी के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर आखिरकार अमल हुआ, जिससे प्रभावित परिवार महीनों की जुदाई के बाद फिर से एक हो सके.
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