सुप्रीम कोर्ट 16 नवंबर से करेगा राम रहीम के बरी होने के आदेश की सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के उस आदेश पर सुनवाई करने का निर्णय लिया है जिसमें डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को पत्रकार राम चंद्र छत्रपति की हत्या के मामले में बरी कर दिया गया था।

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राम रहीम को बरी करने के खिलाफ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के उस आदेश पर सुनवाई करने का निर्णय लिया है, जिसमें डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को 2002 में पत्रकार राम चंद्र छत्रपति की हत्या के मामले में बरी कर दिया गया था। इस मामले की सुनवाई 16 नवंबर से शुरू होगी।
नई दिल्ली, एजेंसी। सुप्रीम कोर्ट सोमवार को पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के उस आदेश के खिलाफ याचिका पर सुनवाई करने को तैयार हो गया, जिसमें डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को एक पत्रकार की 2002 में हुई हत्या के मामले में बरी कर दिया गया था। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची व न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने कहा कि इस मामले पर विचार करने की जरूरत है। सुप्रीम कोर्ट ने पत्रकार के बेटे अरिदमन की याचिका को 16 नवंबर से शुरू होने वाले हफ्ते में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया। राम रहीम की ओर से पेश वकील ने पीठ को बताया कि राज्य ने हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए कोई याचिका दायर नहीं की है।
पीठ ने कहा कि ‘यह मामला हाईकोर्ट द्वारा सजा पलटने का है। हम इस बात से भी पूरी तरह वाकिफ हैं कि हो सकता है राज्य सरकार अपील न करे।’ डेरा प्रमुख अभी रोहतक की सुनारिया जेल में बंद है। वह 2017 में अपने दो अनुयायियों के साथ दुष्कर्म के मामले में मिली 20 साल की सजा काट रहा है।हरियाणा के सिरसा में पत्रकार राम चंद्र छत्रपति को अक्तूबर 2002 में उनके घर के बाहर गोली मार दी गई थी। यह घटना तब हुई जब उनके अखबार ने एक गुमनाम चिट्ठी छापी थी, जिसमें सिरसा स्थित डेरा मुख्यालय में महिला अनुयायियों के कथित यौन शोषण का जिक्र था। बाद में छत्रपति की चोटों के कारण मौत हो गई और एक मामला दर्ज किया गया जिसमें राम रहीम को साजिशकर्ता के तौर पर नामजद किया गया। यह मामला 2006 में सीबीआई को सौंप दिया गया। जनवरी 2019 में पंचकूला की एक विशेष सीबीआई अदालत ने राम रहीम और तीन अन्य लोगों को दोषी ठहराया था। अदालत ने उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई थी। बाद में उन्होंने हाईकोर्ट में अपनी सजा को चुनौती दी, जिसने सात मार्च को उन्हें इस मामले में बरी कर दिया।
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