अडानी मानहानि मुकदमे में पत्रकार रवि नायर को गुजरात की सत्र अदालत ने जमानत दी
गुजरात के गांधीनगर की सत्र अदालत ने अडानी समूह के विरुद्ध मानहानि आरोप में बंद किए गये पत्रकार रवि नायर को नियमित जमानत दे दी। नायर ने सुप्रीम कोर्ट में रिहाई की याचिका दायर की थी और एक साल की सजा व जुर्माने के खिलाफ अपील जारी है। मानवाधिकार एवं पत्रकार संगठनों ने उनकी हिरासत पर चिंताएँ व्यक्त की थीं।

सौजन्य से:- thewirehindi.com
नई दिल्ली: गुजरात के गांधीनगर की सत्र अदालत ने गुरुवार (24 सितंबर) को पत्रकार रवि नायर को अडानी समूह से संबंधित उनकी रिपोर्टिंग को लेकर दर्ज आपराधिक मानहानि मामले में नियमित जमानत दे दी है.
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, जमानत मिलने से पहले नायर ने जेल से रिहाई की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट का भी रुख किया था. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर अपनी रिहाई की मांग की थी.
उल्लेखनीय है कि यह घटनाक्रम गुजरात हाईकोर्ट द्वारा नायर की गिरफ्तारी के खिलाफ दायर याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रखने के एक दिन बाद सामने आया है. हाईकोर्ट ने उन्हें अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया था, जिसके चलते नायर को कम से कम 30 सितंबर तक जेल में रहना पड़ सकता था.
मालूम हो कि नायर को 17 सितंबर को अहमदाबाद सेंट्रल जेल भेजा गया था. इससे पहले गांधीनगर की एक अदालत ने अडानी एंटरप्राइजेज द्वारा दायर मानहानि मामले में उनकी गैर-हाजिरी का हवाला देते हुए उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया था. नायर का कहना है कि उनके खिलाफ वारंट जारी करने से पहले उन्हें कोई औपचारिक समन या नोटिस नहीं दिया गया था.
एक साल की सजा के खिलाफ अपील
10 फरवरी 2026 को मानसा की न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की अदालत ने अडानी एंटरप्राइजेज द्वारा 3 सितंबर 2021 को दायर मानहानि मामले में नायर को दोषी ठहराया था. अदालत ने उन्हें एक साल के साधारण कारावास और 5,000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई थी.
नायर ने इस फैसले को गांधीनगर की सत्र अदालत में चुनौती दी थी. 9 मार्च को अदालत ने उन्हें जमानत देते हुए निर्देश दिया था कि अपील की सुनवाई के दौरान उन्हें अदालत में उपस्थित रहना होगा.
नायर की याचिका के मुताबिक, वह अब तक जिला अदालत में होने वाली सुनवाइयों में नियमित रूप से उपस्थित होते रहे थे. हालांकि, खराब स्वास्थ्य के कारण वह 3 सितंबर की सुनवाई में शामिल नहीं हो सके.
उनके वकीलों ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि नायर को केरल से यात्रा करनी थी और उन्होंने उस दिन अदालत में व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट देने का अनुरोध किया था. इसके बाद जब नायर 17 सितंबर को अदालत में पेश हुए, तो अदालत ने उनके खिलाफ जारी गैर-जमानती वारंट को रद्द करने से इनकार कर दिया. इसके बाद उन्हें जेल भेज दिया गया.
अडानी एंटरप्राइजेज का आरोप
अडानी एंटरप्राइजेज ने अपनी मानहानि याचिका में आरोप लगाया था कि नायर ने कई ट्वीट प्रकाशित और साझा किए, जिनमें कंपनी और अडानी समूह के खिलाफ झूठे तथा मानहानिकारक दावे किए गए थे. कंपनी का आरोप था कि इन बयानों का उद्देश्य उसकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना था.
दूसरी ओर, ऑल्ट न्यूज़ ने बताया कि नायर के वकीलों ने अदालत में तर्क दिया था कि उनके द्वारा साझा की गई सामग्री सार्वजनिक रूप से उपलब्ध लेखों और शोध पर आधारित थी तथा ट्वीट सद्भावना में किए गए थे. वकीलों ने यह भी कहा कि नायर ने स्वयं आरोप नहीं लगाए थे, बल्कि पहले से प्रकाशित लेखों के लिंक साझा किए थे.
उनका तर्क था कि जिन लेखों का नायर ने हवाला दिया था, उनके लेखकों को मामले में आरोपी नहीं बनाया गया है. इसलिए नायर को भी इन आरोपों से बरी किया जाना चाहिए.
गिरफ्तारी पर उठे सवाल
गौरतलब है कि नायर की गिरफ्तारी के बाद कई मानवाधिकार संगठनों, प्रेस संगठनों और वरिष्ठ पत्रकारों ने उनकी गिरफ्तारी पर आपत्ति जताई थी.
इस संबंध में एमनेस्टी इंटरनेशनल ने एक बयान में कहा कि नायर की गिरफ्तारी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है.
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