बॉम्बे हाईकोर्ट में महाराष्ट्र धर्मांतरण कानून की संवैधानिकता पर मौलाना की चुनौती
70 वर्षीय इस्लामी विद्वान मौलाना हलीमुल्लाह फारूक अहमद खान ने महाराष्ट्र फ्रीडम ऑफ रिलिजन एक्ट, 2026 को मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताते हुए याचिका दायर की है। वह कानून के 60‑दिन की सूचना नियम को निजता के अधिकार के विरुद्ध और केवल जबरन या धोखाधड़ी वाले मामलों तक इसकी सीमा सीमित करने की मांग कर रहे हैं। इस चुनौती से राज्य में राजनीतिक तनाव बढ़ने की संभावना है।

सौजन्य से:- Navbharat Times
Maharashtra Freedom of Religion Act: महाराष्ट्र में जबरन, धोखे या लालच से होने वाले धर्म परिवर्तन रोकने को बनाए गए कानून को बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। महाराष्ट्र में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की स्वीकृति के बाद लागू हो चुके इस कानून में तहत आने वाले सभी अपराध गैर जमानती की श्रेणी में रखे गए हैं।
हाइलाइट्स
महाराष्ट्र के नए धर्मांतरण कानून को हाईकोर्ट में चुनौती
अर्जी में कानून को मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया
महाराष्ट्र में संवैधानिक स्वीकृति के बाद लागू हो चुका कानून
मुंबई: राज्य के नए महाराष्ट्र फ्रीडम ऑफ रिलिजन एक्ट, 2026 की संवैधानिक वैधता को बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। 70 वर्षीय इस्लामी विद्वान मौलाना हलीमुल्लाह फारूक अहमद खान ने इस संबंध में याचिका दायर की है। याचिका में कानून को मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करने वाला बताया गया है।याचिका में कहा गया है कि जबरन या धोखाधड़ी से होने वाले विवाह और धर्मांतरण पर रोक लगाना एक वैध उद्देश्य हो सकता है, लेकिन आपसी सहमति वाले अंतरधार्मिक संबंध और स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन एक अलग विषय है। इस पर विचार करने की जरूरत है।
मौलाना ने याचिका में क्या दलील दी
याचिकाकर्ता के मुताबिक, जीवनसाथी चुनने और अपनी धार्मिक आस्था तय करने का अधिकार व्यक्ति की स्वायत्तता, गरिमा, निजता और निर्णय लेने की स्वतंत्रता से जुड़ा है, जिसे संविधान के अनुच्छेद 21 और 25 संरक्षण देते हैं। याचिका में कानून को असंवैधानिक घोषित करने या इसके प्रावधानों की व्याख्या केवल धोखाधड़ी या दबाव वाले मामलों तक सीमित करने की मांग की गई है। याचिका में धर्म परिवर्तन से पहले 60 दिन की अनिवार्य सूचना देने के प्रावधान को भी निजता के अधिकार के खिलाफ बताया गया है।
गरमा सकती है इस मुद्दे पर राजनीति
महाराष्ट्र में विधानसभा के दोनों सदनों से पास होने के बाद संवैधानिक स्वीकृति के बाद कानून बने धर्मांतरण बिल का कांग्रेस ने विरोध किया था। इस कानून को कोर्ट में चैलेंज किए जाने के बाद राज्य में राजनीति गरमा सकती है। महाराष्ट्र सरकार द्वारा लागू किया गया 'महाराष्ट्र धर्म स्वतंत्रता अधिनियम 2026' राज्य में जबरन, धोखे या लालच से होने वाले धर्म परिवर्तन को रोकने के लिए बनाया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी के बाद यह कानून 28 अगस्त 2026 से पूरे राज्य में प्रभावी हो गया।
सात साल की सजा का है प्रावधान
धर्मांतरण कानून के तहत बल , धोखाधड़ी, दबाव, प्रलोभन या लालच, अनुचित प्रभाव और शादी का झांसा देकर किए जाने वाले धर्म परिवर्तन को पूरी तरह अवैध घोषित किया गया है। यदि कोई व्यक्ति अपनी मर्जी से धर्म बदलना चाहता है, तो उसे एक तय प्रक्रिया का पालन करना होगा। धर्म परिवर्तन करने से कम से कम 60 दिन पहले जिला मजिस्ट्रेट (DM) को लिखित सूचना देनी होगी। पहली बार दोषी पाए जाने पर 7 साल तक की जेल और 1 लाख रुपये तक का जुर्माना रखा गया है।
लेखक के बारे मेंकृष्णा शुक्लाखबरों से लगाव ने कृष्णा शुक्ला की 2007 में मुंबई नवभारत से पत्रकारिता की शुरुआत कराई। 2011 में दैनिक भास्कर के मुंबई ब्यूरो में 12 साल की सेवा ने पत्रकारिता को पहचान दिलाई। अप्रैल 2023 से नवभारत टाइम्स के जरिए पहचान की परीक्षा जारी है। कोर्ट रिपोर्टिंग से विशेष प्रेम है। कृष्णा को साहित्य, मनोविज्ञान और दर्शन की किताबों को पढ़ने में रुचि है।... और पढ़ें
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