जेल अदालत में न्याय की निशानी: 18 साल पुराना मामला हुआ निपटाना
सरायकेला मंडल कारा में जेल अदालत और विधिक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें बंदियों को उनके कानूनी अधिकारों की जानकारी दी गई और वर्षों पुराने मामलों का निपटारा हुआ।

सौजन्य से:- Prabhat Khabar
जेल अदालत में सुनवाई के दौरान जब बंदियों ने स्वीकार किया अपना दोष...
विधिक जागरूकता कार्यक्रम में उपस्थित न्यायिक पदाधिकारी.
सरायकेला मंडल कारा में स्वतंत्रता दिवस पर जेल अदालत, चिकित्सा जांच और विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया. जानें पूरी खबर यहां.
सरायकेला : स्वतंत्रता दिवस पर सरायकेला मंडल कारा में आयोजित जेल अदालत और विधिक जागरूकता कार्यक्रम चर्चा का विषय बन गया. एक ओर वर्षों से लंबित मामलों की सुनवाई हुई, तो दूसरी ओर बंदियों को उनके कानूनी अधिकारों की जानकारी दी गई. सबसे खास बात यह रही कि 18 साल पुराने मामले का भी निपटारा किया गया. कार्यक्रम के दौरान महिला बंदियों की समस्याएं भी सुनी गईं. अभियुक्तों ने अपना दोष स्वीकार कर लिया. इसके बाद मामलों का निष्पादन किया गया.
जेल अदालत में पांच मामलों की हुई सुनवाई
झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार के निर्देश पर मंडल कारा, सरायकेला में जेल अदालत-सह-चिकित्सा जांच शिविर और विधिक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया. जेल अदालत में कुल पांच मामलों को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया, जिनमें दो मामलों का निष्पादन किया गया. निष्पादित मामलों में एक मामला मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के न्यायालय और दूसरा एसीजेएम, सरायकेला के न्यायालय से संबंधित था. इनमें से एक मामला वर्ष 2008 से लंबित था. दोनों मामलों में अभियुक्तों ने अपना दोष स्वीकार कर लिया, जिसके बाद मामलों का निष्पादन किया गया.
महिला वार्ड का किया निरीक्षण
कार्यक्रम के दौरान न्यायिक पदाधिकारियों और जिला विधिक सेवा प्राधिकार के अधिकारियों ने महिला वार्ड का निरीक्षण किया. इस दौरान महिला बंदियों से बातचीत कर उनकी समस्याएं और शिकायतें सुनी गईं. साथ ही उन्हें आवश्यक कानूनी सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन भी दिया गया. जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव तौसीफ मेराज ने बंदियों को संविधान और कानून के तहत मिलने वाले अधिकारों की जानकारी दी. उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में महात्मा गांधी और शहीद भगत सिंह के योगदान का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति आर्थिक या सामाजिक कारणों से न्याय से वंचित नहीं रहेगा. विधिक जागरूकता कार्यक्रम के साथ-साथ बंदियों के लिए चिकित्सा जांच शिविर भी आयोजित किया गया. कार्यक्रम में न्यायिक पदाधिकारियों, अधिवक्ताओं, चिकित्सा पदाधिकारियों और अन्य अधिकारियों ने भाग लिया.
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लेखक के बारे में
By प्रताप कुमार मिश्रा
प्रताप कुमार मिश्रा वर्ष 2003 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उन्होंने कोल्हन विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में स्नातक किया है. राजनीतिक, सामाजिक, क्राइम, खेल की खबरों में इन्हें विशेषज्ञता हासिल है. डिजिटल जर्नलिज्म में 10 साल का अनुभव है.
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