सुप्रीम कोर्ट ने चेताया राम मंदिर चंदा चोरी केस का राजनीतिकरण नहीं होने देंगे
सुप्रीम कोर्ट ने राम मंदिर चंदा चोरी केस में कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच कर रही SIT के दोबार गठन के निर्देश दिए हैं. कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि अदालतें इस मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं होने देंगे.

सौजन्य से:- ETV Bharat
राम मंदिर चंदा चोरी केस; सुप्रीम कोर्ट की चेतावनी, इस मुद्दे का राजनीतिकरण न करें, दोबारा एसआईटी गठन का निर्देश - RAM MANDIR SIT RECONSTITUTION
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Published : July 20, 2026 at 10:22 PM IST
सोमवार को राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को इस मामले की कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच कर रही SIT के दोबार गठन के निर्देश दिए. CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि वह चाहेगी कि इस जांच का नेतृत्व कोई ऐसा वरिष्ठ IPS अधिकारी करें. जिसे इस तरह की जांच संभालने का अनुभव हो. राम मंदिर चढ़ावा और दान चोरी मामले में SIT की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में जमा की है..सरकार ने एसआईटी की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सील बंद लिफाफे में दी. जब अलग-अलग याचिकाकर्ताओं की ओर से वकील अपना पक्ष रखने लगे तो CJI ने कहा, हम बस एक चेतावनी दे रहे हैं. कोई राजनीति न करें. अदालतें इसके लिए नहीं बनी हैं. इस मुद्दे का राजनीतिकरण न करें. यह दंड कानून के तहत अपराध का एक साधारण मामला है. इसकी जांच निष्पक्ष और बिना किसी भेदभाव के होनी चाहिए. जांच को तार्किक नतीजे तक पहुंचाया जाना चाहिए. 13 जुलाई को CJI सूर्यकांत बेंच ने SIT से स्टेट्स रिपोर्ट मांगी थी साथ ही केंद्र, यूपी सरकार और ट्रस्ट को नोटिस जारी किया था. याचिकाकर्ताओं ने CCTV फुटेज और DVR सुरक्षित रखने की भी मांग की क्योंकि उनका कहना था सबूत नष्ट हो सकते हैं.
सोमवार को राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को इस मामले की कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच कर रही SIT के दोबार गठन के निर्देश दिए. CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि वह चाहेगी कि इस जांच का नेतृत्व कोई ऐसा वरिष्ठ IPS अधिकारी करें. जिसे इस तरह की जांच संभालने का अनुभव हो. राम मंदिर चढ़ावा और दान चोरी मामले में SIT की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में जमा की है..सरकार ने एसआईटी की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सील बंद लिफाफे में दी. जब अलग-अलग याचिकाकर्ताओं की ओर से वकील अपना पक्ष रखने लगे तो CJI ने कहा, हम बस एक चेतावनी दे रहे हैं. कोई राजनीति न करें. अदालतें इसके लिए नहीं बनी हैं. इस मुद्दे का राजनीतिकरण न करें. यह दंड कानून के तहत अपराध का एक साधारण मामला है. इसकी जांच निष्पक्ष और बिना किसी भेदभाव के होनी चाहिए. जांच को तार्किक नतीजे तक पहुंचाया जाना चाहिए. 13 जुलाई को CJI सूर्यकांत बेंच ने SIT से स्टेट्स रिपोर्ट मांगी थी साथ ही केंद्र, यूपी सरकार और ट्रस्ट को नोटिस जारी किया था. याचिकाकर्ताओं ने CCTV फुटेज और DVR सुरक्षित रखने की भी मांग की क्योंकि उनका कहना था सबूत नष्ट हो सकते हैं.
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