सुप्रीम कोर्ट ने सोनम रघुवंशी की जमानत रद्द कर, तीन हफ्ते में सरेंडर करने का आदेश दिया
राजा रघुवंशी हत्याकांड में आरोपी सोनम रघुवंशी की जमानत रद्द करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उसकी रिहाई से ट्रायल में बाधा आ सकती है. कोर्ट ने सोनम को सरेंडर करने के लिए तीन हफ्ते का समय दिया है.

सौजन्य से:- ETV Bharat
सोनम रघुवंशी की जमानत रद्द, सुप्रीम कोर्ट ने तीन हफ्ते में सरेंडर करने का आदेश दिया
राजा रघुवंशी हत्याकांड में आरोपी सोनम रघुवंशी की जमानत रद्द करते हुए कोर्ट ने कहा कि उसकी रिहाई से ट्रायल में बाधा आ सकती है.
Published : July 23, 2026 at 2:55 PM IST
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को मेघालय में हनीमून के दौरान अपने पति राजा रघुवंशी की कथित हत्या की मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी की जमानत रद्द कर दी. कोर्ट ने कहा कि इस समय उसकी रिहाई से ट्रायल में बाधा आ सकती है.
जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस पी.बी. वराले की पीठ ने यह आदेश पारित किया. सोनम की पैरवी वरिष्ठ अधिवक्ता अर्धेंदुमौली कुमार प्रसाद ने की और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मेघालय सरकार का पक्ष रखा.
सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की कि उच्च न्यायालय और ट्रायल कोर्ट ने गिरफ्तारी के आधारों की तामील में कथित कमियों के आधार पर उसे राहत देने में गलती की.
पीठ ने कहा कि आरोपी को गिरफ्तारी के आधार न देना, जांच के उद्देश्य से दोबारा गिरफ्तार करने में रुकावट नहीं बनेगा. जस्टिस सुंदरेश ने आदेश सुनाते हुए कहा, "तथ्यों के आधार पर, हम पाते हैं कि प्रतिवादी (सोनम रघुवंशी) जमानत की हकदार नहीं है. न सिर्फ गुणों के आधार पर, बल्कि दोनों कोर्ट द्वारा चर्चा किए गए आधारों पर भी… ऐसा नहीं है कि प्रतिवादी को गिरफ्तारी के आधार नहीं दिए गए थे. गिरफ्तारी के आधार न देने और सही कारण बताने में अंतर है…"
पीठ ने कहा कि उसकी गिरफ्तारी से जुड़े दस्तावेज उसे दे दिए गए हैं और वह इस बात पर विचार नहीं करना चाहती कि मामला अपनी मर्जी से सरेंडर करने का है या गिरफ्तारी का.
पीठ ने कहा कि इस कोर्ट के फैसले के आधार पर जमानत देने में दोनों निचली अदालतों (ट्रायल कोर्ट और हाई कोर्ट) ने गलती की है.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "हमें यह भी पता है कि जमानत नियम है और जेल अपवाद है… हालांकि, हम एक ऐसे मामले से निपट रहे हैं जहां गुण के आधार पर विस्तार को खारिज करने वाले पहले के जमानत आदेश अंतिम हो गए हैं. ट्रायल पहले ही शुरू हो चुका है."
पीठ ने कहा, "हम यह देखना चाहते हैं कि इस चरण पर प्रतिवादी का लगातार जमानत विस्तार वर्तमान ट्रायल में रुकावट डाल सकता है… हम विवादित ऑर्डर को रद्द करना चाहते हैं."
शीर्ष अदालत ने सोनम को सरेंडर करने के लिए तीन हफ्ते का समय दिया.
पीठ ने आगे कहा, "अगर ट्रायल 6 महीने के अंदर आगे नहीं बढ़ता और खत्म नहीं होता है, तो प्रतिवादी को नई जमानत अर्जी दाखिल करने की आजादी है…"
सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश राज्य सरकार की उस याचिका पर दिया जिसमें मेघालय हाई कोर्ट के सोनम की रिहाई को बरकरार रखने के आदेश को चुनौती दी गई थी.
21 जुलाई को राज्य सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने तर्क दिया कि घटना के बाद सोनम फरार हो गई और सह-अभियुक्तों की गिरफ्तारी के बाद ही सामने आई. मेहता ने कहा कि उनके पति का शव ड्रोन की मदद से 10 दिनों के बाद बरामद किया गया था और उनका चेहरा पहचान में नहीं आ रहा था. मेहता ने कहा कि शव की पहचान टैटू के जरिये ही की गई.
पीठ ने सोनम के वकील से पूछा कि वह अपने मुवक्किल के व्यवहार को कैसे समझाएंगे? उनका केस यह है कि आप मृतक के साथ उस जगह पर गए थे और घटना हुई.
पीठ को बताया गया कि 94 सरकारी गवाहों में से सिर्फ चार से पूछताछ हुई थी.
सुप्रीम कोर्ट ने इशारा किया कि जब तक ट्रायल कोर्ट सरकारी वकील के खास गवाहों के सबूत रिकॉर्ड कर रहा है, तब तक सोनम को सरेंडर कर देना चाहिए. पीठ ने इशारा किया कि वह फिर गुण के आधार पर उसकी जमानत पर फिर से सोच सकती है. पीठ ने सोनम के वकील से कहा कि वे इस बारे में निर्देश लें कि क्या वह अपनी जमानत पर आगे विचार होने तक सरेंडर करने को तैयार है.
पीठ ने कहा, "दो विकल्प हैं. या तो हम गुण पर विचार करेंगे और ऑर्डर पास करेंगे. या हम आपको गवाहों की जांच होने तक सरेंडर करने का ऑर्डर देंगे, फिर हम इसे मेरिट पर देखेंगे…"
पीठ ने कहा, "हम आपको अचरज नहीं करना चाहते. दूसरा विकल्प आपके लिए बेहतर हो सकता है. निर्देशन लें और वापस आएं…"
सोनम के वकील ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने उनकी मुवक्किल पर कड़ी शर्तें लगाई हैं, जिनमें से एक यह है कि उन्हें शिलांग में रहना होगा और हर दिन कार्रवाई में शामिल होना होगा. पीठ ने कहा कि वह उन शर्तों पर विचार करेगी और यह साफ किया कि वह दोनों पक्षों के साथ निष्पक्ष रहना चाहेगी.
यह भी पढ़ें- मेघालय हनीमून मर्डर केस: क्या सोनम रघुवंशी की जमानत होगी रद्द? सुप्रीम कोर्ट ने दिए ये दो कड़े विकल्प
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