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सीजेआई: छात्रों को एआई का सही इस्तेमाल सीखना चाहिए

मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने कहा कि तकनीक कानूनी सिस्टम को बदलती जा रही है। उन्होंने लॉ स्कूलों को तैयार रहने की सलाह दी ताकि छात्रों का तकनीकी होने पर कानून को समझने का ज्ञान मिल सके।

16 अगस्त 2026 को 08:54 pm बजे
सीजेआई: छात्रों को एआई का सही इस्तेमाल सीखना चाहिए

सौजन्य से:- Hindustan

कानून के छात्र एआई का सही इस्तेमाल सीखें : सीजेआई

--जोधपुर में कान्क्लेव को कर रहे थे संबोधित --तकनीक से कानूनी सिस्टम में बदलाव की

जोधपुर, एजेंसी। भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्य कांत ने रविवार को नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज से कहा कि वे तकनीक में हो रहे बदलावों पर सिर्फ प्रतिक्रिया न दें। वे यह तय करने में नेतृत्व करें कि तकनीक कानूनी सिस्टम को कैसे बदले, ताकि न्याय, निष्पक्षता और मानवीय समझ इसके केंद्र में बनी रहे। साथ ही कानून के छात्र एआई का सही इस्तेमाल सीखें। नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, जोधपुर में वाइस चांसलर्स कॉन्क्लेव-2.0 को संबोधित करते हुए सीजेआई ने कहा कि कानूनी पेशा अब तकनीक को देर से अपनाने वाला नहीं बना रह सकता। उन्होंने कानूनी शिक्षा में जेनरेटिव एआई जैसे टूल्स पर पूरी तरह रोक लगाने की बात को खारिज कर दिया। सीजेआई ने कहा कि कानून की पढ़ाई और पढ़ाने के तरीकों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का जिम्मेदारी से इस्तेमाल शामिल होना चाहिए। उन्होंने कहा कि छात्रों को एआई के फायदे के साथ-साथ उसकी सीमाओं को भी समझना जरूरी है。

तकनीक का प्रभाव

सीजेआई ने कहा कि तकनीक पहले ही कानूनी क्षेत्र को तेजी से बदल रही है। कॉन्ट्रैक्ट तैयार करने, कानूनी जांच-पड़ताल, रिसर्च, सबूतों के प्रबंधन और विवादों को सुलझाने में एआई और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ रहा है।

लॉ स्कूलों की तैयारी

उन्होंने कहा कि लॉ स्कूलों को इन बदलावों के लिए पहले से तैयार रहना होगा। आने वाले समय में कानून के छात्र ऐसे एआई टूल्स का इस्तेमाल करेंगे, जो कुछ ही सेकंड में हजारों पुराने फैसलों को पढ़कर जरूरी जानकारी निकाल सकते हैं। ये टूल कानूनी और नियामक जोखिमों की पहचान करने में भी मदद कर सकते हैं।

एआई पर पूरी रोक के पक्ष में नहीं

सीजेआई ने कानूनी शिक्षा में जनरेटिव एआई के इस्तेमाल को लेकर चल रही बहस पर भी बात की। उन्होंने माना कि एआई पर ज्यादा निर्भरता से छात्रों की खुद तर्क करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। साथ ही एआई कई बार गलत जानकारी को भी सही तरीके से पेश कर सकता है। इसके बावजूद उन्होंने शिक्षा में एआई के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगाने की बात को सही नहीं माना। उन्होंने कहा कि कक्षा में एआई का इस्तेमाल पारदर्शी और शिक्षकों की निगरानी में होना चाहिए।

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