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एससी-एसटी-ओबीसी आरक्षण के अंदर उपकोटा की मांग पर केंद्र सरकार का जवाब

सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि एससी-एसटी-ओबीसी आरक्षण ऐतिहासिक और सामाजिक पिछड़ेपन पर आधारित है, न कि केवल आर्थिक आधार पर। केंद्र सरकार ने उस याचिका का विरोध किया है जिसमें आरक्षित श्रेणियों के भीतर आय-आधारित उप-कोटा लागू करने का आदेश देने की मांग की गई है।

7 अगस्त 2026 को 04:15 am बजे
एससी-एसटी-ओबीसी आरक्षण के अंदर उपकोटा की मांग पर केंद्र सरकार का जवाब

सौजन्य से:- Hindustan

आरक्षण के अंदर मिले उपकोटा, सुप्रीम कोर्ट में याचिका; सरकार ने क्या दिया जवाब

एससी,एसटी और ओबीसी आरक्षण के अंदर आर्थिक आधार पर उपकोटा की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में जवाब देते हुए केंद्र ने कहा कि यह आरक्षण सामाजिक पिछड़ेपन के आधार पर है ना कि केवल आर्थिक आधार पर।

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि अनुसूचित जातियों (एससी), अनुसूचित जनजातियों (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्गों (ओबीसी) के लिए आरक्षण ऐतिहासिक और सामाजिक पिछड़ेपन पर आधारित है, न कि केवल आर्थिक स्थिति पर। केंद्र सरकार ने उस याचिका का विरोध करते हुए सुप्रीम कोर्ट में यह जानकारी दी है, जिसमें आरक्षित श्रेणियों के भीतर आय-आधारित उप-कोटा लागू करने का आदेश देने की मांग की है।

छुआछूत से नुकसान का सामना करना पड़ता है

सरकार ने हलफनामे में कहा कि अनुसूचित जातियों को छुआछूत के कारण ऐतिहासिक नुकसान का सामना करना पड़ता है, जबकि अनुसूचित जनजातियों की विशिष्ट संस्कृति, भौगोलिक अलगाव और पिछड़ापन होता है। सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों की पहचान सामाजिक, शैक्षिक और आर्थिक नुकसान के साथ-साथ सेवाओं में प्रतिनिधित्व की कमी से की जाती है

भारत सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग की ओर से शीर्ष अदालत में एक हलफनामा दाखिल किया गया। हलफनामे में कहा गया कि याचिका में आरक्षण पर नीति बनाने के लिए न्यायिक निर्देश मांगे गए हैं, जो कार्यपालिका के अधिकार क्षेत्र में आता है और इसे परमादेश यानी रिट ऑफ मैंडमस के जरिए अनिवार्य नहीं किया जा सकता।

आरक्षण के अंदर भी आरक्षण की मांग

सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में एससी, एसटी, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस श्रेणियों के भीतर आय-आधारित प्राथमिकताएं शुरू करके और उप-वर्गीकरण बनाकर आरक्षण की अधिक न्यायसंगत नीति विकसित करने के लिए सरकार को आदेश देने की मांग की है, ताकि प्रत्येक आरक्षित श्रेणी के भीतर आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को प्राथमिकता मिल सके।

अधिसूचित सूचियों में संशोधन संसद का अधिकार

केंद्र सरकार ने याचिका पर कहा कि ‘अनुच्छेद-341 के तहत एससी, अनुच्छेद-342 के तहत एसटी और अनुच्छेद-342ए के तहत ओबीसी की पहचान करने वाली संवैधानिक व्यवस्था केवल आर्थिक मानदंडों के आधार पर बदलाव की अनुमति नहीं देती है। सरकार ने स्पष्ट किया कि इन सूचियों में शामिल करना ऐतिहासिक, सामाजिक और शैक्षिक पिछड़ेपन पर आधारित है और राष्ट्रपति द्वारा अधिसूचित सूचियों में संशोधन करने का अधिकार केवल संसद को है।

इन वर्गों पर क्रीमी लेयर का नियम लागू नहीं होता

केंद्र सरकार ने अपने हलफनामे में कहा कि एससी/एसटी वर्गों पर ‘क्रीमी लेयर’ का नियम लागू नहीं होता। सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित पूर्व के ऐतिहासिक फैसले जैसे इंदिरा साहनी, ई.वी. चिन्नैया, एम. नागराज और अशोक कुमार ठाकुर मामलों का जिक्र करते हुए सरकार ने कहा कि ‘क्रीमी लेयर’ को बाहर करने का सिद्धांत ओबीसी आरक्षण के संदर्भ में ही विकसित किया गया है।

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Ankit Ojhaविद्यालयी जीवन से ही कलात्मक अभिव्यक्ति, विचारशील स्वभाव और मिलनसार व्यक्तित्व और सामान्य के अंदर डुबकी लगाकर कुछ खास खोज लाने का कौशल पत्रकारिता के लिए अनुकूल साबित हुआ। अंकित ओझा एक दशक से डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के रहने वाले अंकित ओझा समाचारों की दुनिया में तथ्यों के महत्व के साथ ही संवेदनशीलता के पक्ष को साधने में निपुण हैं। पिछले चार साल से हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप के 'लाइव हिन्दुस्तान' के लिए चीफ कॉन्टेंट प्रड्यूसर पद पर कार्य कर रहे हैं। इससे पहले 'टाइम्स ऑफ इंडिया' और 'इंडियन एक्सप्रेस' ग्रुप के साथ भी कार्य कर चुके हैं।

राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, राज्य और सामाजिक सरोकारों की खबरों के संपादन में लंबा अनुभव होने के साथ ही अपने-आसपास की घटनाओं में समाचार तत्व निकालने की अच्छी समझ है। घटनाओं और समाचारों से संबंधित फैसले लेने और त्वरित समाचार प्रकाशित करने में विशेष योग्यता है। इसके अलावा तकनीक और पाठकों की बदलती आदतों के मुताबिक सामग्री को रूप देने के लिए निरंतर सीखने में विश्वास करते हैं। अंकित ओझा की रुचि राजनीति के साथ ही दर्शन, कविता और संगीत में भी है। लेखन और स्वरों के माध्यम से लंबे समय तक आकाशवाणी से भी जुड़े रहे। इसके अलावा ऑडियन्स से जुड़ने की कला की वजह से मंचीय प्रस्तुतियां भी सराही जाती हैं।

अकादमिक योग्यताः अंकित ओझा ने प्रारंभिक शिक्षा नवोदय विद्यालय से पूरी करने के बाद जामिया मिल्ल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता में ही ग्रैजुएशन किया है। इसके बाद भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। जामिया में अध्ययन के दौरान ही इटैलियन और उर्दू भाषा में भी कोर्स किए हैं। इसके अलावा पंजाबी भाषा की भी अच्छी समझ रखते हैं। विश्वविद्यालय में NCC का 'C सर्टिफिकेट' भी प्राप्त किया है। IIMC और ऑक्सफर्ड से स्वास्थ्य पत्रकारिता का सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया है।

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