सुप्रीम कोर्ट ने गैंगस्टर अबू सलेम की रिहाई याचिका को खारिज किया
सुप्रीम कोर्ट ने अबू सलेम की रिहाई की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया, जबकि वह दावा कर रहा था कि जेल में अच्छे व्यवहार से उसे दो साल नौ महीने की छूट मिली है और उसकी 25‑साल की सजा पूरी हो गई है। कोर्ट ने बताया कि बॉम्बे हाई कोर्ट की गणना के अनुसार अभी भी उसकी सज़ा पूरी नहीं हुई है और इसलिए रिहाई का आदेश नहीं दिया गया।

सौजन्य से:- ABP News
अबू सलेम नहीं होगा रिहा, सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की याचिका
सुप्रीम कोर्ट ने गैंगस्टर अबू सलेम की रिहाई की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है. अबू सलेम को वर्ष 2004 में भारत लाया गया था.
गैंगस्टर अबू सलेम की याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी है. 2005 में भारत लाए गए सलेम ने रिहाई की मांग की थी. उसका दावा था कि जेल में अच्छे व्यवहार के कारण उसे दो साल नौ महीने से अधिक की छूट मिली है. इस तरह उसने प्रत्यर्पण की शर्तों के मुताबिक भारत में 25 साल की जेल पूरी कर ली है.
257 लोगों की मौत वाले 1993 के मुंबई बम धमाका मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे गैंगस्टर का कहना था कि उसे 11 नवंबर 2005 को पुर्तगाल से भारत लाया गया था. भारत सरकार ने पुर्तगाल को आश्वासन दिया था कि उसे 25 साल से ज्यादा की सजा नहीं दी जाएगी. 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा था कि वह 25 साल की सज़ा पूरी करने के बाद रिहाई की मांग कर सकता है.
वकील ऋषि मल्होत्रा ने कही थी ये बात
सलेम के लिए पेश हुए वरिष्ठ वकील ऋषि मल्होत्रा का कहना था कि जेल में अच्छे आचरण के लिए मिली छूट और मुकदमे के दौरान जेल में बिताई अवधि को जोड़ने पर उसकी 25 साल की सज़ा पूरी हो चुकी है.मल्होत्रा ने यह भी कहा कि अब उसे जेल में रखना गैरकानूनी हिरासत के बराबर है. यह उसके संवैधानिक अधिकारों का भी उल्लंघन है. सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने इन दलीलों को ठुकरा दिया है. जजों ने कहा है कि बॉम्बे हाई कोर्ट की तरफ से की गई गणना के मुताबिक सलेम की सज़ा अभी पूरी नहीं हुई है. सुप्रीम कोर्ट मामले में दखल नहीं देगा.
पहले भी की थी रिहाई की कोशिश
इससे पहले भी सलेम अलग-अलग याचिकाएं दाखिल कर अपनी रिहाई की कोशिश करता रहा है. इसी साल 16 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने उसकी एक याचिका को सुनने से मना करते हुए कहा था कि नासिक जेल से मिले दस्तावेज को हिसाब से हाई कोर्ट मामला सुनेगा. हाई कोर्ट को जल्द सुनवाई का निर्देश देने से मना करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा था, "आपको टाडा के तहत सज़ा मिली है, समाज का कोई भला करने के लिए नहीं."
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