कानूनी मातृभूमि में बच्चे की कस्टडी विदेशी अदालतों के आदेश का उल्लंघन कर नहीं मिल सकती : हाईकोर्ट
हाईकोर्ट ने कहा कि कोई भी माता-पिता विदेशी अदालतों के आदेश की अवहेलना कर बच्चे को भारत में रोके रखने का लाभ नहीं उठा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि विदेशी अदालत के आदेश का पालन नहीं करने वाले अभिभावक बच्चे की कानूनी कस्टडी पर दावा नहीं कर सकते।

सौजन्य से:- Amar Ujala
{"_id":"6a47cf819be53505200c7eee","slug":"parents-cannot-obtain-child-custody-in-violation-of-foreign-court-orders-high-court-delhi-ncr-news-c-340-1-del1011-143869-2026-07-03","type":"story","status":"publish","title_hn":"विदेशी अदालतों का उल्लंघन कर बच्चे की कस्टडी नहीं ले पाएंगे माता-पिता : हाईकोर्ट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
विदेशी अदालतों का उल्लंघन कर बच्चे की कस्टडी नहीं ले पाएंगे माता-पिता : हाईकोर्ट
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने विदेशी अदालतों के क्षेत्राधिकार में शामिल भारतीय बच्चों की कस्टडी को लेकर टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि कोई भी माता-पिता विदेशी अदालतों के आदेश की अवहेलना कर बच्चे को भारत में रोके रखने का लाभ नहीं उठा सकता। अदालत ने कनाडा की अदालत के आदेश के बावजूद बच्चे को भारत में रखे जाने वाले मामले में यह टिप्पणी की।
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि विदेशी अदालत के आदेश का पालन नहीं करने वाले अभिभावक बच्चे की कानूनी कस्टडी पर दावा नहीं कर सकते। बच्चे को कनाडा भेजने का निर्देश दिया गया है। यह फैसला एक अंतरराष्ट्रीय बाल कस्टडी विवाद से जुड़ा है, जिसमें कनाडा की अदालत ने बच्चे को लौटाने का आदेश दिया था। लेकिन एक अभिभावक ने आदेश की अवहेलना कर बच्चे को भारत में रख लिया। हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसी अवहेलना से उत्पन्न स्थिति को कानूनी मान्यता नहीं दी जा सकती। अदालत ने कोर्ट की सहमति के सिद्धांत पर जोर देते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय अदालती आदेशों का सम्मान आवश्यक है।
बच्चों का कल्याण सर्वोपरि
न्यायालय ने कहा कि बच्चे के कल्याण को सर्वोपरि मानते हुए भी माता-पिता द्वारा जानबूझकर विदेशी आदेशों की अवज्ञा को प्रोत्साहित नहीं किया जा सकता। इससे फोरम शॉपिंग (अनुकूल अदालत चुनना) की प्रवृत्ति भी बढ़ सकती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने विदेशी अदालतों के क्षेत्राधिकार में शामिल भारतीय बच्चों की कस्टडी को लेकर टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि कोई भी माता-पिता विदेशी अदालतों के आदेश की अवहेलना कर बच्चे को भारत में रोके रखने का लाभ नहीं उठा सकता। अदालत ने कनाडा की अदालत के आदेश के बावजूद बच्चे को भारत में रखे जाने वाले मामले में यह टिप्पणी की।
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि विदेशी अदालत के आदेश का पालन नहीं करने वाले अभिभावक बच्चे की कानूनी कस्टडी पर दावा नहीं कर सकते। बच्चे को कनाडा भेजने का निर्देश दिया गया है। यह फैसला एक अंतरराष्ट्रीय बाल कस्टडी विवाद से जुड़ा है, जिसमें कनाडा की अदालत ने बच्चे को लौटाने का आदेश दिया था। लेकिन एक अभिभावक ने आदेश की अवहेलना कर बच्चे को भारत में रख लिया। हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसी अवहेलना से उत्पन्न स्थिति को कानूनी मान्यता नहीं दी जा सकती। अदालत ने कोर्ट की सहमति के सिद्धांत पर जोर देते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय अदालती आदेशों का सम्मान आवश्यक है।
विज्ञापन
बच्चों का कल्याण सर्वोपरि
न्यायालय ने कहा कि बच्चे के कल्याण को सर्वोपरि मानते हुए भी माता-पिता द्वारा जानबूझकर विदेशी आदेशों की अवज्ञा को प्रोत्साहित नहीं किया जा सकता। इससे फोरम शॉपिंग (अनुकूल अदालत चुनना) की प्रवृत्ति भी बढ़ सकती है।
विज्ञापन
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
7 में से 7 हाई कोर्ट में रेगुलर चीफ जस्टिस नहीं, सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 4 के लिए की सिफारिश

शराबबंदी कानून पर मांझी का हमला, गुजरात मॉडल पर बिहार को करने की मांग

सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम ने चार नए हाई कोर्ट चीफ जस्टिस नियुक्त करने की सिफारिश की

क्रिकेट की दुनिया में एक नया अध्याय: जवागल श्रीनाथ के साथ

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने चार नए उच्च न्यायाधीशों की नियुक्ति की सिफारिश की

उड़ीसा उच्च न्यायालय के दो न्यायाधीश स्थानांतरण के लिए सिफारिश

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 4 न्यायाधीशों को उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीश बनाने की सिफारिश की

बिहार में बड़ी घोषणाएं: परीक्षा सुधारों के लिए स्पेशल कमेटी, सहयोग शिविर में छात्र कर सकेंगे शिकायत
ताज़ा ख़बरें
- बिहार में परीक्षा सुधारों पर बड़ा कदम, विशेष कमेटी की गठन का एलान
- एफसीआरए के अमेरिकी निर्णय ने भारतीय नागरिक संगठनों को हिला दिया
- अमेरिकी फैसला एक नया युग खोलेगा: भारतीय फीस कमीशन के लिए बड़ा मोड़
- सुप्रीम कोर्ट की हाई पावर कमेटी ने शुरू किया अरावली के जमीनी सर्वे
- अमेरिका ने भारत के फीसी पुनर्वित्त नियमों पर बड़ा निर्णय लिया
- अमेरिका ने भारत के FCRA पर दिया क्रांतिकारी फैसला
- अमेरिकी संसद द्वारा FCRA पर बड़ा निर्णय, भारतीय NGOs को नए मौके की उम्मीद
- बॉम्बे हाई कोर्ट ने तलाक और मृत्यु के बाद भरण-पोषण के अधिकारों से संबंधित महत्वाकांक्षी निर्णय दिया

