सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता का अशोभनीय आचरण, जजों ने दिखाई उदारता
सुप्रीम कोर्ट में एक याचिकाकर्ता ने अभद्र बर्ताव किया, लेकिन जजों ने उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। कोर्ट ने याचिकाकर्ता से सहानुभूति जताते हुए कहा कि उसकी मानसिक दशा ठीक नहीं लगती। यह मामला लखनऊ के दो पुलिस अधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज करने की मांग से जुड़ा है।

सौजन्य से:- ABP News
‘मानसिक दशा ठीक नहीं लगती, हम कोई कार्रवाई नहीं करेंगे’, सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता के अशोभनीय आचरण पर बोले न्यायाधीश
Supreme Court: याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट को आदेश देते हुए कहा कि मिस्टर ज्यूडिशियल सर्वेंट (न्यायिक नौकर), मैं आदेश देता हूं कि इन अधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज हो, क्योंकि मैं संप्रभु हूं.
- कोर्ट ने मामले में हस्तक्षेप योग्य कोई योग्यता नहीं पाई।
सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार (10 जुलाई, 2026) को एक याचिकाकर्ता ने बेहद अभद्र बर्ताव किया, लेकिन जजों ने उदारता दिखाते हुए उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की. कोर्ट ने याचिकाकर्ता से सहानुभूति जताते हुए कहा कि उसकी मानसिक दशा ठीक नहीं लगती. जस्टिस केवी विश्वनाथन और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने लिखित आदेश में यह भी दर्ज किया है कि अगर केस में कोई मेरिट होता, तो कोर्ट उसमें दखल देता.
आखिर कोर्ट ने क्या हुआ?
दरअसल, मामला दो पुलिस अधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज करने की मांग कर रहे लखनऊ के याचिकाकर्ता प्रबल प्रताप और चंद्र भान की याचिका से जुड़ा है. दोनों याचिकाकर्ताओं की तरफ से प्रबल प्रताप कोर्ट में पेश हुआ. उसने अपनी बात की शुरुआत ही कोर्ट को आदेश देते हुए की. उसने कहा, ‘मिस्टर ज्यूडिशियल सर्वेंट (न्यायिक नौकर), मैं आदेश देता हूं कि इन अधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज हो, क्योंकि मैं संप्रभु हूं. देश में साइबर क्राइम रोकने के लिए यह जरूरी है.’
मामले में सुप्रीम कोर्ट के जजों में क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट में हाईवोल्टेज ड्रामा! सुनवाई के दौरान एक वकील ने चीफ जस्टिस के खिलाफ अपशब्द कहे, कागज़ उछाले और जजों को पुलिस अधिकारी के खिलाफ FIR दर्ज करने का 'आदेश' दिया. देखिए वीडियो! #SupremeCourt #ViralVideo #CJISuryakant #ABPNews pic.twitter.com/vWMDiEICmk
— ABP News (@ABPNews) July 10, 2026
जजों ने हैरानी जताते हुए पूछा कि वह सुप्रीम कोर्ट को कैसे आदेश दे सकता है? इस पर याचिकाकर्ता ने अपने कागज बेंच की तरफ उछलते हुए चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) के बारे में भी बेहद आपत्तिजनक शब्द का प्रयोग किया. कोर्ट में मौजूद सुरक्षाकर्मी तुरंत उसे बाहर ले गए. इस आचरण से सकते में आए कोर्ट में मौजूद वकीलों को संबोधित करते हुए जस्टिस विश्वनाथन ने कहा, ‘हम इस व्यक्ति पर कोई कार्रवाई नहीं चाहते. वह परेशान लगता है. हमें उससे सहानुभूति है.’
क्या है पूरा मामला?
यह पूरा मामला लखनऊ का है. दोनों याचिकाकर्ता पुलिस के एक एसीपी और एसएचओ के साथ ही एक सॉफ्टवेयर कंपनी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग कर रहे हैं. निचली अदालत और हाई कोर्ट पहले ही उनकी मांग ठुकरा चुके हैं. अब सुप्रीम कोर्ट ने भी पाया है कि उनके पास ऐसा कोई तथ्य नहीं है, जिसके आधार पर मामले में दखल दिया जाए.
यह भी पढ़ेंः अवैध निर्माण पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, सर्वे के लिए बनेगी IIT दिल्ली के एक्सपर्ट्स की टीम, अधिकारियों को दी चेतावनी
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