होमअपराधपीएम मोदी का बड़ा ऐलान: पेपर लीक मामलों में कड़ी सजा के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट
अपराध

पीएम मोदी का बड़ा ऐलान: पेपर लीक मामलों में कड़ी सजा के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि पेपर लीक मामलों में दोषियों को कड़ी सजा दिलाने के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट गठित किए जाएंगे। सरकार ने Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Act, 2024 लागू किया है, जिसमें पेपर लीक और अन्य अनुचित साधनों को अपराध घोषित किया गया है।

24 जुलाई 2026 को 07:14 am बजे
पीएम मोदी का बड़ा ऐलान: पेपर लीक मामलों में कड़ी सजा के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट

सौजन्य से:- Navbharat Times

CJP पर विदेशी फंडिंग के आरोपों के साये में जानिए FCRA क्या है? विदेशी फंडिंग का पूरा कानून और संशोधनों का इतिहास

पीएम मोदी के बयान का कानूनी महत्व क्या है?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि युवाओं का भविष्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने घोषणा की कि पेपर लीक मामलों के शीघ्र निपटारे के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट गठित किए जाएंगे। सरकार का सबसे बड़ा उद्देश्य आगे पेपर लीक की घटनाओं को रोकना और दोषियों को जल्द और कठोर दंड दिलाना है। यह घोषणा महज एक राजनीतिक संदेश नहीं बल्कि पहले से लागू कानून पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट, 2024 के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में प्रशासनिक पहल मानी जा रही है।फास्ट ट्रैक कोर्ट क्या होता है ? जानिए किन मामलों की होती है तेज अदालती सुनवाई

क्या है पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट, 2024?

- पुराने कानूनों को कमजोर और निष्प्रभावी मानते हुए वर्तमान केंद्र सरकार ने साल 2024 में Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Act, 2024 लागू किया।

- पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट, 21 जून 2024 से प्रभावी है तथा इसके नियम 23 जून 2024 को अधिसूचित किए गए। इसका उद्देश्य केंद्र सरकार एवं उसकी एजेंसियों द्वारा आयोजित सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों पर रोक लगाना है।

- कानून में पेपर लीक, प्रश्नपत्र की अवैध उपलब्धता, उत्तर पुस्तिका में छेड़छाड़, कंप्यूटर आधारित परीक्षा में हैकिंग तथा संगठित परीक्षा धोखाधड़ी को अपराध घोषित किया गया है।

- संसद में सरकार ने स्पष्ट किया था कि यह कानून परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए बनाया गया है।

- इसका उद्देश्य केवल दोषियों को सजा देना नहीं बल्कि परीक्षा माफिया पर प्रभावी रोक लगाना भी है।

पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट के तहत सजा और जुर्माने का प्रावधान

- यदि कोई व्यक्ति पेपर लीक, प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने या अन्य अनुचित साधनों में दोषी पाया जाता है तो उसे कम से कम 3 वर्ष और अधिकतम 5 वर्ष तक की कैद तथा 10 लाख रुपये तक जुर्माना हो सकता है।

- यदि अपराध किसी संगठित गिरोह या संस्थागत स्तर पर किया गया है तो सजा और अधिक कठोर हो जाती है। ऐसे मामलों में 5 वर्ष से 10 वर्ष तक की कैद तथा कम से कम 1 करोड़ रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है।

- यदि किसी संस्था की संलिप्तता पाई जाती है तो उसकी संपत्ति जब्त करने और परीक्षा आयोजन से संबंधित लागत की वसूली भी की जा सकती है।

- कानून के तहत अधिकांश अपराध संज्ञेय, गैर-जमानती और गैर-समझौता योग्य बनाए गए हैं।

- यही कारण है कि इसे भारत में परीक्षा धोखाधड़ी के विरुद्ध सबसे सख्त कानूनों में गिना जा रहा है।

यह कानून नीट ही नहीं केंद्र सरकार की बड़ी परीक्षाओं पर भी है लागू

दरअसल, यह कानून केवल नीट की परीक्षाओं के अलावे संघ लोक सेवा आयोग (UPSC), कर्मचारी चयन आयोग (SSC), रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB), राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA), IBPS तथा केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित अन्य सार्वजनिक परीक्षाओं पर भी लागू होता है। हालांकि राज्य सरकारों की परीक्षाओं पर यह कानून स्वतः लागू नहीं होता, लेकिन राज्य अपने कानून बना सकते हैं या इसे अपना सकते हैं।क्या कॉक्रोच जनता पार्टी CJP के प्रदर्शन में पत्थरबाजों पर 'देशद्रोह' का मामला बन सकता है? नया आपराधिक कानून BNS क्या कहता है

Powered by Nyaya 247 News

संबंधित ख़बरें

इसी विषय की और ख़बरें →
गुजरात में नौवाहनविभाग और नौवहन कानूनों पर कार्यशाला का उद्घाटन
अपराध

गुजरात में नौवाहनविभाग और नौवहन कानूनों पर कार्यशाला का उद्घाटन

सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में बड़े मामलों की सुनवाई
अपराध

सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में बड़े मामलों की सुनवाई

राममंदिर चढ़ावा चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट में 10 अगस्त को सुनवाई
अपराध

राममंदिर चढ़ावा चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट में 10 अगस्त को सुनवाई

भाजपा हमलावर, अदालत ने बोला झूठे थे उत्पीड़न के आरोप बृजभूषण शरण सिंह केस पर
अपराध

भाजपा हमलावर, अदालत ने बोला झूठे थे उत्पीड़न के आरोप बृजभूषण शरण सिंह केस पर

लाइव लॉ इलाहाबाद उच्च न्यायालय के महत्वपूर्ण आदेश और निर्णय - 3 अगस्त - 9 अगस्त, 2026
अपराध

लाइव लॉ इलाहाबाद उच्च न्यायालय के महत्वपूर्ण आदेश और निर्णय - 3 अगस्त - 9 अगस्त, 2026

न्यायालय की संवेदनशीलता पुस्तिका
अपराध

न्यायालय की संवेदनशीलता पुस्तिका

दिल्ली केस में भाग जाने वाली पत्नी और ससुर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज
अपराध

दिल्ली केस में भाग जाने वाली पत्नी और ससुर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज

पटना हाईकोर्ट ने पुलिस हिरासत के बाद दिया व्यक्ति के लापता होने के मामले में सीबीआई जांच का आदेश
अपराध

पटना हाईकोर्ट ने पुलिस हिरासत के बाद दिया व्यक्ति के लापता होने के मामले में सीबीआई जांच का आदेश

ताज़ा ख़बरें