गृहिणियों को अब 'नेशन बिल्डर' कहा, सुप्रीम कोर्ट ने दी अहम प्राथमिकता
सुप्रीम कोर्ट ने गृहिणियों को एक अनोखे से नाम दिया है, 'नेशन बिल्डर। कोर्ट ने उनके योगदान को मुआवजा तय करते समय महत्वपूर्ण माना है।

सौजन्य से:- ABP News
गृहिणी होममेकर नहीं ‘नेशन बिल्डर’, सुप्रीम कोर्ट ने मुआवजा तय करते हुए ऐसा क्यों कहा?
सर्वोच्च अदालत ने कहा कि गृहिणी का काम सिर्फ खाना बनाना या घर संभालना नहीं है. उन्हें “होममेकर” नहीं बल्कि “नेशन बिल्डर” कहा जाना चाहिए.
Supeme Court on Compnsaton: गृहिणी यानी वो महिलाएं जो अपने पूरे घर का कामकाज संभालती हैं. जिनके लिए ‘होममेकर’ शब्द का भी इस्तेमाल किया जाता है, क्योंकि घर को बनाने और संभालने में उनकी अहम भूमिका होती है. कई बार लोग ऐसी महिलाओं को कामकाजी महिलाओं के मुकाबले कमतर समझते हैं, क्योंकि वे कमाती नहीं हैं और घर के कामकाज के बदले उन्हें कोई सैलरी नहीं मिलती.
इसी वजह से किसी हादसे में होममेकर महिला की मौत के बाद मुआवजा तय करना मुश्किल हो जाता है. क्योंकि आमतौर पर किसी व्यक्ति की मृत्यु पर मुआवजा उसकी उम्र और आय के आधार पर तय किया जाता है. लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने गृहिणियों को लेकर एक अहम फैसला दिया है. इस फैसले की 5 बड़ी बातें:
सर्वोच्च अदालत ने कहा कि गृहिणी का काम सिर्फ खाना बनाना या घर संभालना नहीं है. उन्हें “होममेकर” नहीं बल्कि “नेशन बिल्डर” कहा जाना चाहिए. किसी दुर्घटना में उनकी मौत पर मुआवजा तय करते समय उनके योगदान को भी ध्यान में रखना जरूरी है. कोर्ट ने कहा कि गृहिणियों की आय का आकलन करते समय उम्र, शिक्षा, कौशल, पारिवारिक जिम्मेदारियां और आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखा जाना चाहिए. इसी आधार पर कोर्ट ने 30,000 रुपये प्रति माह के हिसाब से मुआवजा तय करने की बात कही.
अगर किसी सड़क दुर्घटना में गृहिणी घायल होती हैं या उनकी मौत हो जाती है, तो केवल इस आधार पर कम मुआवजा नहीं दिया जा सकता कि उनकी कोई आय नहीं थी. कोर्ट ने यह भी कहा कि मुआवजा न तो बहुत ज्यादा होना चाहिए और न ही बहुत कम यह संतुलित होना जरूरी है.
सड़क दुर्घटना से जुड़े मामलों का निपटारा एक साल के भीतर होना चाहिए. अगर पीड़ित को दशकों तक इंतजार करना पड़े, तो कानून का मकसद ही खत्म हो जाता है.
ये भी पढ़ें: 'विवाद कहीं का भी हो, दिल्ली HC कर सकता है CAPF मामले की सुनवाई', सुप्रीम कोर्ट का आदेश
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