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पंजाब के मंत्री अकाल तख्त के सामने पेश होंगे, मान ने की पुष्टि

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि आम आदमी पार्टी के विधायक और मंत्री अकाल तख्त के सामने पेश होंगे. उन्होंने यह भी कहा कि अकाल तख्त सर्वोच्च धार्मिक और सांसारिक संस्था है. सिख बेअदबी कानून पर अकाल तख्त ने आम आदमी पार्टी के विधायकों और मंत्रियों को पेश होने के लिए बुलाया है.

28 जून 2026 को 12:25 pm बजे
पंजाब के मंत्री अकाल तख्त के सामने पेश होंगे, मान ने की पुष्टि

सौजन्य से:- ThePrint Hindi

नई दिल्ली: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने रविवार को पुष्टि की कि अकाल तख्त के समन के बाद आम आदमी पार्टी (AAP) के सभी विधायक और कैबिनेट मंत्री उसके सामने पेश होंगे. उन्होंने कहा कि उनके और उनकी पार्टी के लिए सिखों की सर्वोच्च धार्मिक और सांसारिक संस्था अकाल तख्त सबसे ऊपर है.

अमृतसर में AAP संयोजक अरविंद केजरीवाल के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए मान ने कहा, “हमारे विधायकों और मंत्रियों को कल तख्त श्री अकाल तख्त साहिब में चर्चा के लिए और अपना पक्ष रखने के लिए बुलाया गया है. हमारे सभी विधायक और मंत्री वहां जाएंगे. हम अकाल तख्त साहिब की सर्वोच्चता को सबसे बड़ा मानते हैं. हमारे सभी विधायक और मंत्री, जिन्हें बुलाया गया है, जाएंगे. कुछ मंत्रियों से सिर्फ लिखित में अपना पक्ष देने को कहा गया है, तो वे लिखित में अपना जवाब देंगे.”

यह बयान ऐसे समय आया है जब अकाल तख्त ने पंजाब कैबिनेट और सभी दलों के सिख विधायकों को 29 जून को पेश होने के लिए बुलाया है. उनसे पूछा जाएगा कि सिख धार्मिक मामलों से जुड़े एक कानून को उनसे सलाह किए बिना कैसे पास कर दिया गया.

जिस कानून की बात हो रही है, वह जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) विधेयक, 2026 है. इसे 13 अप्रैल को पंजाब विधानसभा ने पास किया था और कुछ ही दिनों में राज्यपाल की मंजूरी भी मिल गई थी.

2008 के मूल कानून में संशोधन करते हुए नए कानून में यह प्रावधान किया गया है कि अगर कोई व्यक्ति गुरु ग्रंथ साहिब के स्वरूपों के अपमान की साजिश इस इरादे से करता है कि शांति या सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़े, तो उसे उम्रकैद तक की सजा हो सकती है. साथ ही 5 लाख रुपये से 20 लाख रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है.

कानून में यह भी कहा गया है कि इस अधिनियम के तहत, गुरु ग्रंथ साहिब के अपमान को छोड़कर अन्य अपराधों में दोषी पाए जाने पर पांच साल तक की जेल और 10 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है.

इस कानून का मुख्य उद्देश्य गुरु ग्रंथ साहिब के अपमान के मामलों में उम्रकैद की सजा का प्रावधान करना है.

कानून में यह भी कहा गया है कि शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी एक केंद्रीय रजिस्टर बनाए रखेगी. इसमें जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब के स्वरूपों की छपाई, भंडारण, वितरण और आपूर्ति का पूरा रिकॉर्ड होगा. इस रजिस्टर में हर स्वरूप का अलग पहचान नंबर, छपाई और प्रकाशन की तारीख, आपूर्ति की तारीख और स्थान, भंडारण का स्थान और संरक्षक का नाम व पता दर्ज होगा.

संरक्षक की जिम्मेदारियां भी तय की गई हैं. उसे यह सुनिश्चित करना होगा कि स्वरूप सुरक्षित रहें, उन्हें किसी तरह का नुकसान, दुरुपयोग या गुम होने से बचाया जाए और सिख रहित मर्यादा का पालन हो. अगर स्वरूप को नुकसान पहुंचे, वह गायब हो जाए या अपमान की आशंका हो, तो इसकी तुरंत संबंधित पुलिस और प्रबंधन अधिकारियों को सूचना देनी होगी.

12 अप्रैल 2026 को राजपत्र में प्रकाशित संशोधन के अनुसार, इस कानून के तहत “जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब के स्वरूपों का अपमान” का मतलब है ऐसा कोई जानबूझकर किया गया काम, जिसका उद्देश्य अपमान करना हो. इसमें स्वरूपों को नुकसान पहुंचाना, उनका रूप बिगाड़ना, जलाना, फाड़ना, चोरी करना या उनके किसी हिस्से के साथ ऐसा करना शामिल है. इसके अलावा बोले गए या लिखे गए शब्दों, इशारों, दृश्य माध्यमों, इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों या किसी अन्य तरीके से ऐसा कुछ करना भी इसमें शामिल है, जिससे सिख धर्म मानने वाले लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हों.

यह भी पढ़ें: सैको की शानदार मुजफ्फरनगर दंगा कॉमिक पर प्रकाशक की रोक भारत की आजादी पर एक कड़वा मजाक है

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