तमिलनाडु सरकार ने गो-हत्या पर रोक के आदेश का सुप्रीम कोर्ट में विरोध किया
तमिलनाडु सरकार ने मद्रास हाई कोर्ट के गो-हत्या पर रोक के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है, जिसमें पूरे राज्य में गो-हत्या पर रोक लगाने का निर्देश दिया गया था. सुप्रीम कोर्ट में हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ तमिलनाडु सरकार ने स्पेशल लीव पिटिशन दायर की है

सौजन्य से:- ndtv.in
- तमिलनाडु सरकार ने मद्रास हाई कोर्ट के गो-हत्या पर रोक के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है
- मद्रास HC ने अगस्त 1976 के सरकारी आदेश के आधार पर पूरे राज्य में गो-हत्या पर रोक लगाने का निर्देश दिया था
- सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में हिंदू मक्कल काची के युवा विंग के सचिव के. सूर्या को प्रतिवादी बनाया गया है
तमिलनाडु की विजय सरकार गो-हत्या पर रोक लगाने के मद्रास हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची है. मद्रास हाई कोर्ट के 27 मई के उस आदेश के खिलाफ तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पिटिशन (विशेष अनुमति याचिका) दायर की है, जिसमें अगस्त 1976 के सरकारी आदेश को लागू करते हुए पूरे राज्य में गो-हत्या पर रोक लगाने का निर्देश दिया गया था.
मद्रास हाई कोर्ट ने इसलिए लगाई थी गोहत्या पर रोक
मद्रास हाई कोर्ट का ये आदेश 1976 के उस आदेश पर आधारित था, जिसमें दूध उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए गो-हत्या पर रोक लगाई गई थी. इसके खिलाफ याचिका राज्य सरकार के सचिव ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की थी. इसमें प्रतिवादी के तौर पर 'हिंदू मक्कल काची' के युवा विंग के सचिव के. सूर्या उर्फ के. सूर्या प्रशांत को शामिल किया गया है, जिन्होंने हाई कोर्ट में मूल रिट याचिका दायर की थी. इसके साथ ही पुलिस DGP समेत अन्य अधिकारियों को भी प्रतिवादी बनाया गया है.
अदालत का पुलिस को निर्देश
सुप्रीम कोर्ट में के. सूर्या की ओर से पेश वकील पी.वी. योगेश्वरन ने एक कैविएट (अदालत को पहले से सूचित करने वाली अर्जी) दायर की है. बता दें कि 27 मई का यह निर्देश जस्टिस जी.आर. स्वामीनाथन और जस्टिस वी. लक्ष्मीनारायण की डिवीजन बेंच ने दिया था. बेंच ने मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक/पुलिस बल के प्रमुख को निर्देश दिया था कि वे यह सुनिश्चित करें कि तमिलनाडु में बकरीद की पूर्व संध्या (गुरुवार, 28 मई 2026) या किसी अन्य दिन किसी भी गाय या बछड़े की हत्या न की जाए. यह आदेश 1976 के उस आदेश पर आधारित था, जिसमें दूध उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए गो-हत्या पर रोक लगाई गई थी.
'गाय पूज्यनीय पशु है'
फैसला लिखने वाले जस्टिस स्वामीनाथन ने इस बात पर जोर दिया था कि संविधान का अनुच्छेद 48 राज्य से अपेक्षा करता है कि वह गायों, बछड़ों और अन्य दुधारू और बोझा ढोने वाले मवेशियों की हत्या पर रोक लगाने के लिए कदम उठाए. संविधान सभा में हुई बहस के दौरान भी इस बात को रेखांकित किया गया था कि गाय पूज्यनीय पशु है और भगवान कृष्ण के समय से ही हमारी सभ्यता से जुड़ी रही है.
ये भी पढ़ें-गौ माता को ‘राज्य माता' घोषित करो, नहीं तो... शंकराचार्य का योगी सरकार को अल्टीमेटम
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
गुजरात में नौवाहनविभाग और नौवहन कानूनों पर कार्यशाला का उद्घाटन

सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में बड़े मामलों की सुनवाई

राममंदिर चढ़ावा चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट में 10 अगस्त को सुनवाई

भाजपा हमलावर, अदालत ने बोला झूठे थे उत्पीड़न के आरोप बृजभूषण शरण सिंह केस पर

लाइव लॉ इलाहाबाद उच्च न्यायालय के महत्वपूर्ण आदेश और निर्णय - 3 अगस्त - 9 अगस्त, 2026

न्यायालय की संवेदनशीलता पुस्तिका

दिल्ली केस में भाग जाने वाली पत्नी और ससुर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज

पटना हाईकोर्ट ने पुलिस हिरासत के बाद दिया व्यक्ति के लापता होने के मामले में सीबीआई जांच का आदेश
ताज़ा ख़बरें
- निरीक्षण, मूल्यांकन और शिकायतें: केंद्र ने ट्रिब्यूनलों के लिए नए आयोग का प्रस्ताव रखा
- ममता बनर्जी पर हमला: अरविंद केजरीवाल का भाजपा पर तीखा हमला
- इलाहाबाद उच्च न्यायालय साप्ताहिक राउंड-अप: 3 अगस्त - 9 अगस्त, 2026
- यूपी में खराब कानून व्यवस्था पर अखिलेश यादव ने की सरकार की आलोचना
- भाजपा सरकार ने कानून-व्यवस्था को बर्बाद कर दिया: अखिलेश यादव
- स्मृति सभा में शामिल होने पर टिस के दो छात्रों की गिरफ्तारी, अदालत ने जमानत देने से किया इनकार
- मंत्री पटेल ने विपक्ष के आरोपों का दी reply, कहा नहीं ओबीसी आरक्षण घटाया
- क्या भारत में किसी राज्य में धर्म परिवर्तन के लिए सबसे सख्त कानून है?

