बिहार हाईकोर्ट का खुला खट्टा, पॉक्सो मामले में निचली अदालत के 'दोहरे बदलाव' पर सख्ती
पटना हाईकोर्ट ने खगड़िया पॉक्सो मामले में निचली अदालत के विशेष अदालत द्वारा चार आरोपियों को दी गई नियमित जमानत को खारिज कर दिया है. हाईकोर्ट ने कानूनी प्रक्रिया में हुई बड़ी खामी को बहुत गंभीरता से लेते हुए बेहद कड़ा रुख अपनाया है, और इन सभी चार आरोपियों की नियमित जमानत को तत्काल प्रभाव से रद्द करने का आदेश जारी किया है.

सौजन्य से:- ETV Bharat
पॉक्सो मामले में निचली अदालत के यू-टर्न पर पटना हाईकोर्ट सख्त, चार आरोपियों की नियमित जमानत की खारिज
पटना हाईकोर्ट ने खगड़िया पॉक्सो मामले में बिना नए तथ्यों के मात्र चार दिनों में 4 आरोपियों को दी गई जमानत खारिज कर दी.
Published : August 10, 2026 at 8:00 PM IST
पटना: बिहार की राजधानी स्थित पटना हाईकोर्ट ने खगड़िया की एक विशेष अदालत द्वारा पॉक्सो मामले में चार आरोपियों को दी गई नियमित जमानत को खारिज कर दिया है. हाईकोर्ट ने खगड़िया कोर्ट के उस फैसले पर गंभीर सवाल उठाए हैं, जिसमें पहले तो अग्रिम जमानत देने से साफ इनकार कर दिया गया था, लेकिन बाद में उन्हीं पुराने आधारों पर दोबारा नियमित जमानत दे दी गई.
अदालत की तल्ख टिप्पणी: पटना हाईकोर्ट ने इस दोहरे रवैये पर कड़ी नाराजगी जताते हुए अभियोजन पक्ष से पूछा कि महज चार दिनों के भीतर अपना निर्णय बदलने का क्या औचित्य था. अदालत ने सुनवाई के दौरान रेखांकित किया कि इस बेहद कम समय में मामले के भीतर कोई भी नया कानूनी मोड़ या सबूत सामने नहीं आया था.
अभियोजन पक्ष की भूमिका: अदालत ने आदेश में स्पष्ट किया कि इस दौरान सिर्फ आरोपियों द्वारा कोर्ट के सामने आत्मसमर्पण किया गया था. इसके तुरंत बाद ही अभियोजन पक्ष ने बिना किसी ठोस आधार के अपनी सहमति दे दी और इसी सहमति को आधार बनाकर निचली अदालत ने आरोपियों को नियमित जमानत का रास्ता साफ कर दिया.
खगड़िया महिला थाने का मामला: गौरतलब है कि यह पूरा मामला खगड़िया महिला थाना कांड संख्या 9/2025 से संबंधित है. मामले में पॉक्सो एक्ट के तहत पहले विशेष कोर्ट ने आरोपियों को अग्रिम जमानत नहीं दी थी, लेकिन उन्हीं पुराने तथ्यों के आधार पर मात्र चार दिन बाद आरोपियों को नियमित जमानत दे दी गई.
हाईकोर्ट का कड़ा रुख: पटना हाईकोर्ट ने निचली अदालत के इस फैसले और कानूनी प्रक्रिया में हुई इस बड़ी खामी को बहुत गंभीरता से लेते हुए बेहद कड़ा रुख अपनाया. इसके साथ ही माननीय उच्च न्यायालय ने इन सभी चार आरोपियों की नियमित जमानत को तत्काल प्रभाव से रद्द करने का आदेश जारी किया.
पीड़िता के अधिकारों की अनदेखी: कोर्ट ने सुनवाई के दौरान इस बात पर भी बेहद तल्ख टिप्पणी की कि इस पूरी जमानत प्रक्रिया के बारे में पीड़िता की मां को कोई सूचना नहीं दी गई थी. नियमों की इस अनदेखी और गंभीर कानूनी खामी को देखते हुए हाईकोर्ट ने खगड़िया कोर्ट के फैसले को पलट दिया है.
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