सात साल बाद फैसला, आदिलाबाद कोर्ट ने सुनाई गद्दारी की सजा
तेलंगाना में साल 2019 में महिला फॉरेस्ट ऑफिसर से. अनिता पर लाठियों से हमला करने वाले पूर्व विधायक के भाई कोनेरू कृष्णा राव समेत आठ लोगों को छह महीने की जेल और जुर्माने की सजा सुनाई गई है।

सौजन्य से:- Amar Ujala
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रसूख पर भारी कानून: महिला अफसर से मारपीट के दोषी पूर्व MLA के भाई को सात साल बाद जेल, क्या है सरासाला कांड?
Sat, 18 Jul 2026 12:25 AM IST
राकेश कुमार
पीटीआई, हैदराबाद।
पीटीआई, हैदराबाद।
Published by: राकेश कुमार
Updated Sat, 18 Jul 2026 12:25 AM IST
सार
तेलंगाना में साल 2019 में महिला फॉरेस्ट ऑफिसर सी. अनिता पर लाठियों से हमला करने वाले पूर्व विधायक के भाई कोनेरू कृष्णा राव समेत 8 लोगों को कोर्ट ने 6 महीने जेल की सजा सुनाई है। इस मामले में कुल 39 आरोपियों में से 29 को सबूतों की कमी के कारण बरी कर दिया गया है।
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विस्तार
तेलंगाना से एक बड़ी खबर सामने आई है। सात साल पहले एक महिला फॉरेस्ट अफसर पर हुए हमले के मामले में कोर्ट का फैसला आ गया है। आदिलाबाद की अदालत ने सत्ताधारी दल के पूर्व विधायक के भाई कोनेरू कृष्णा राव समेत आठ लोगों को दोषी माना है। इन सभी को छह महीने की जेल और जुर्माने की सजा सुनाई गई है।
सात साल पहले का है मामला
यह मामला 30 जून 2019 का है। इस घटना का वीडियो देखकर पूरा देश दहल गया था। कुमराम भीम आसिफाबाद जिले के सरसाला गांव में फॉरेस्ट रेंज अफसर सी. अनिता अपनी टीम के साथ सरकारी पौधे लगाने गई थीं। तभी पूर्व विधायक कोनेरू कोनाप्पा के भाई कोनेरू कृष्णा राव ने लाठी-डंडों से लैस भीड़ के साथ उन पर हमला कर दिया। भीड़ जमीन पर अपना हक जता रही थी। जान बचाने के लिए महिला अफसर एक ट्रैक्टर पर चढ़ गईं। लेकिन रसूखदार हमलावरों ने ट्रैक्टर पर भी उन पर बेरहमी से लाठियां बरसाईं। ऑन-ड्यूटी महिला अधिकारी को इस तरह सरेआम पीटने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो हड़कंप मच गया।
अदालती फैसले और जांच की पांच बड़ी बातें
क्या रसूखदारों के आगे बेबस थी पुलिस की जांच?
जब यह वारदात हुई थी, तब तेलंगाना की राजनीति में भूचाल आ गया था। कांग्रेस और बीजेपी ने तत्कालीन सरकार को कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर बुरी तरह घेरा था। चौतरफा थू-थू होने के बाद सरकार में बैठे बड़े नेताओं को भी इस हमले की निंदा करनी पड़ी थी।
लेकिन सवाल यह है कि जब वीडियो में पूरी भीड़ हमला करती दिख रही थी, तो पुलिस ऐसी कमजोर चार्जशीट क्यों लाई कि 29 आरोपी साफ बचकर निकल गए? खैर, इस फैसले ने यह तो साफ कर दिया है कि खाकी पर हाथ उठाने वाले नेता चाहे कितने भी बड़े हों, कानून के शिकंजे से पूरी तरह नहीं बच सकते।
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सात साल पहले का है मामला
यह मामला 30 जून 2019 का है। इस घटना का वीडियो देखकर पूरा देश दहल गया था। कुमराम भीम आसिफाबाद जिले के सरसाला गांव में फॉरेस्ट रेंज अफसर सी. अनिता अपनी टीम के साथ सरकारी पौधे लगाने गई थीं। तभी पूर्व विधायक कोनेरू कोनाप्पा के भाई कोनेरू कृष्णा राव ने लाठी-डंडों से लैस भीड़ के साथ उन पर हमला कर दिया। भीड़ जमीन पर अपना हक जता रही थी। जान बचाने के लिए महिला अफसर एक ट्रैक्टर पर चढ़ गईं। लेकिन रसूखदार हमलावरों ने ट्रैक्टर पर भी उन पर बेरहमी से लाठियां बरसाईं। ऑन-ड्यूटी महिला अधिकारी को इस तरह सरेआम पीटने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो हड़कंप मच गया।
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अदालती फैसले और जांच की पांच बड़ी बातें
- नेता को छह महीने की जेल: जिला परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष और विधायक के भाई कोनेरू कृष्णा राव को कोर्ट ने मुख्य गुनहगार मानते हुए जेल भेज दिया है।
- 39 लोगों पर दर्ज हुआ था केस: पुलिस ने शुरुआत में कुल 39 लोगों को आरोपी बनाया था। इनमें से दो आरोपियों की मौत ट्रायल के दौरान ही हो गई।
- 29 आरोपी सबूतों के अभाव में बरी: कोर्ट ने 29 लोगों के खिलाफ आरोप साबित न होने पर केस खारिज कर दिया। पुलिस कोर्ट में इनके खिलाफ पुख्ता सबूत नहीं दे पाई।
- बांस के डंडे से पहला वार: पीड़ित अफसर सी. अनिता ने कोर्ट को बताया कि सबसे पहले कृष्णा राव ने ही उन पर बांस के डंडे से हमला किया था, जिसके बाद भीड़ हिंसक हो गई।
- विधायक को पहले से थी खबर: वन विभाग ने साफ किया कि वह जमीन पूरी तरह सरकारी थी। इस पौधारोपण अभियान की जानकारी स्थानीय विधायक को पहले ही दे दी गई थी।
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क्या रसूखदारों के आगे बेबस थी पुलिस की जांच?
जब यह वारदात हुई थी, तब तेलंगाना की राजनीति में भूचाल आ गया था। कांग्रेस और बीजेपी ने तत्कालीन सरकार को कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर बुरी तरह घेरा था। चौतरफा थू-थू होने के बाद सरकार में बैठे बड़े नेताओं को भी इस हमले की निंदा करनी पड़ी थी।
लेकिन सवाल यह है कि जब वीडियो में पूरी भीड़ हमला करती दिख रही थी, तो पुलिस ऐसी कमजोर चार्जशीट क्यों लाई कि 29 आरोपी साफ बचकर निकल गए? खैर, इस फैसले ने यह तो साफ कर दिया है कि खाकी पर हाथ उठाने वाले नेता चाहे कितने भी बड़े हों, कानून के शिकंजे से पूरी तरह नहीं बच सकते।
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