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नाबालिग शादी को नहीं बचा सकी व्यक्तिगत कानून की दलील, हाई कोर्ट ने लगाया POCSO लागू

केरल हाई कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि 18 वर्ष से कम आयु की लड़की के साथ वैवाहिक संबंध होने पर भी POCSO लागू होगा, चाहे वह मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत शादी हो। न्यायालय ने Supreme Court के Independent Thought मामले को हवाला देते हुए, विवाह की आयु‑सीमा को 18 के बराबर मानते हुए, व्यक्तिगत कानून को अधिनियम के ऊपर नहीं आना दिया। इस निर्णय में POCSO की सेक्शन 42A के अधिभावी प्रभाव को भी रेखांकित किया गया।

1 सितंबर 2026 को 08:32 am बजे
नाबालिग शादी को नहीं बचा सकी व्यक्तिगत कानून की दलील, हाई कोर्ट ने लगाया POCSO लागू

सौजन्य से:- Navbharat Times

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केरल हाई कोर्ट में मामला, तथ्यों पर दिया फैसला

- मामले में आरोपी के वकील ने बताया कि उसने साल 2021 में, जब लड़की 17 साल और एक महीने की थी, इस्लामी धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार दोनों परिवारों की उपस्थिति में उससे शादी की थी। लड़की, मस्जिद के काज़ी और उसके भाई ने पुलिस को दिए अपने बयानों में इस शादी की पुष्टि की है।

- आरोपी ने हाई कोर्ट से अपने खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही रद्द करने की मांग की थी। उसका तर्क था कि संबंधित लड़की उसकी पत्नी है और इसलिए वैवाहिक संबंध को देखते हुए उसके खिलाफ POCSO के तहत कार्रवाई नहीं होनी चाहिए।

- जस्टिस जोबिन सेबेस्टियन ने बचाव पक्ष की इस दलील को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने स्पष्ट किया कि 18 वर्ष से कम उम्र की लड़की के साथ यौन संबंध होने पर POCSO लागू हो सकता है, चाहे वह आरोपी की पत्नी ही क्यों न हो।

- अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के Independent Thought v. Union of India फैसले का भी सहारा लिया, जिसमें नाबालिग पत्नी के संदर्भ में IPC की Marital Rape Exception को 18 वर्ष की उम्र के अनुरूप पढ़ा गया था।

Personal Law का हवाला क्यों काम नहीं आया?

- याचिकाकर्ता की ओर से वैवाहिक संबंध और मुस्लिम पर्सनल लॉ से जुड़े तर्क भी रखे गए थे। लेकिन हाई कोर्ट ने POCSO की विशेष प्रकृति पर जोर दिया।

- POCSO की Section 42A यह बताती है कि Act का प्रभाव अन्य कानूनों के अतिरिक्त है और किसी असंगति की स्थिति में POCSO के प्रावधानों को overriding effect यानी अधिभावी प्रभाव मिलता है।

- इसी आधार पर हाई कोर्ट ने कहा कि यदि POCSO के तहत किसी नाबालिग माना जाता है, तो मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत विवाह होने का तथ्य उस संरक्षण को खत्म नहीं कर सकता।

POCSO एक्ट Child Marriage कानूनों से अलग कैसे हैं?

POCSO विशेष रूप से बच्चों को यौन अतिक्रमण से संरक्षण देता है। इसलिए किसी विवाह को लेकर PCMA के तहत कानूनी स्थिति अलग प्रश्न हो सकती है, जबकि उसी विवाह में नाबालिग के साथ यौनाचार पर POCSO की लागू होने की शर्त अलग से तय हो सकती है। लेकिन Prohibition of Child Marriage Act , 2006 (PCMA) PCMA का उद्देश्य बाल विवाह को रोकना है। इसके तहत बाल विवाह को अमान्य बनाने और बाल विवाह कराने, उसमें मदद करने या उसे बढ़ावा देने के लिए दंडात्मक प्रावधान मौजूद हैंMuslim Polygamy Ban Petition: मुस्लिमों के बहुविवाह पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, महिलाओं के समान अधिकार पर बड़ी बहस

उम्र साबित करना POCSO मामले में इतना महत्वपूर्ण क्यों है?

- मुख्य बात यह भी है कि POCSO का लागू होना कई मामलों में पीड़ित की उम्र पर निर्भर करता है।

- यदि घटना के समय व्यक्ति 18 वर्ष से कम था, तो वह POCSO के तहत बच्या ही है, उसे नाबालिग ही माना जाएगा।

- इसलिए किसी POCSO मामले में केवल लड़की की शादी हो चुकी थी, कहना पर्याप्त कानूनी बचाव नहीं है।

- अदालत को घटना के समय उसकी वास्तविक उम्र और आरोपों से संबंधित अन्य साक्ष्यों को भी देखना होता है।

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