तीसरे बच्चे के जन्म पर भी मिलना तय मातृत्व अवकाश, हाईकोर्ट ने इन्कार को रद्द किया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गीता चौधरी के तीसरे बच्चे के मातृत्व अवकाश के आवेदन को अस्वीकार करने वाले आदेश को रद्द कर दिया और मामले को संबंधित अधिकारी के पास दोबारा विचार के लिए भेजा। कोर्ट ने 2017 के संशोधन और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों के आधार पर बताया कि दो या दो से अधिक बच्चों वाली महिला कर्मचारियों को 12 सप्ताह का मातृत्व अवकाश मिलने का अधिकार है, और बच्चों की संख्या पर कोई सीमा नहीं है। आदेश की प्रमाणित प्रति प्रस्तुत होने की तारीख से दो माह के भीतर नया आदेश जारी करने का निर्देश दिया गया।

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar
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तीसरे बच्चे के पैदा होने पर भी चाइल्ड केयर लीव:हाईकोर्ट ने मातृत्व अवकाश से इंकार का आदेश रद्द किया
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तीसरे बच्चे के जन्म पर मातृत्व अवकाश देने से इन्कार करने के आदेशों को रद्द कर दिया है और मामले को संबंधित अधिकारी के पास दोबारा विचार के लिए भेज दिया है।
याचिकाकर्ता गीता चौधरी ने याचिका दाखिल कर 16 जुलाई 2026 और 25 जुलाई 2026 के उन आदेशों को चुनौती दी थी, जिनमें उनके तीसरे मातृत्व अवकाश के आवेदन को अस्वीकार कर दिया गया था। यह आदेश हापुड़ के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी और अन्य अधिकारी द्वारा पारित किए गए थे।
मातृत्व अवकाश की हकदार याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कोर्ट में दलील दी कि मातृत्व लाभ (संशोधन) अधिनियम, 2017 की धारा 3 में हुए संशोधन के अनुसार याचिकाकर्ता तीसरे बच्चे के लिए बारह सप्ताह के मातृत्व अवकाश की हकदार हैं। उन्होंने अपनी दलीलों के समर्थन में सुप्रीम कोर्ट के दो फैसलों का हवाला दिया अनुपम यादव बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (2022) और के. उमादेवी बनाम तमिलनाडु सरकार (2025)।
अधिवक्ता ने के उमादेवी मामले की ओर कोर्ट का ध्यान आकृष्ट कराया, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि दो या दो से अधिक जीवित बच्चों वाली महिला कर्मचारी को मातृत्व लाभ से पूरी तरह वंचित नहीं किया जा सकता, बल्कि ऐसी स्थिति में अवकाश की अवधि 26 सप्ताह से घटाकर 12 सप्ताह कर दी जाती है। बच्चों की संख्या पर कोई सीमा या रोक नहीं है।
विपक्षी अधिवक्ता हर्ष वर्धन गुप्ता ने कोर्ट के समक्ष स्वीकार किया कि मामले को वापस भेजा जा सकता है ताकि 2017 के संशोधन और सुप्रीम कोर्ट की उपरोक्त टिप्पणियों को ध्यान में रखते हुए संबंधित प्राधिकारी नए सिरे से आदेश पारित करे।
विवादित आदेश को रद्द किया न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की एकल पीठ ने दोनों पक्षों की सहमति से याचिका का निस्तारण करते हुए विवादित आदेशों को रद्द कर दिया। कोर्ट ने मामले को जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, हापुड़ के पास वापस भेजते हुए निर्देश दिया कि आदेश की प्रमाणित प्रति प्रस्तुत होने की तारीख से दो माह के भीतर, कानून के अनुसार शीघ्रता से नया आदेश पारित किया जाए।
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