होमअपराधआगरा के फरार आरोपी को जमानत मिल सकती थी नहीं, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दिया फैसला
अपराध

आगरा के फरार आरोपी को जमानत मिल सकती थी नहीं, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दिया फैसला

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आत्महत्या के आरोपी को जमानत नहीं देने का आदेश दिया। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में आरोपी को सामान्यतः राहत नहीं मिल सकती है। आरोपी ने आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में हाईकोर्ट में जमानत की अर्जी दी थी।

14 जुलाई 2026 को 09:13 pm बजे
आगरा के फरार आरोपी को जमानत मिल सकती थी नहीं, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दिया फैसला

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar

- Hindi News

- Local

- Uttar pradesh

- Prayagraj

- Allahabad High Court Agra Case | Absconding Accused Denied Bail Relief

फरार घोषित आरोपी को जमानत नहीं मिल सकती:आगरा का मामला, कोर्ट ने कहा सामान्यता ऐसे केस में राहत नहीं

- कॉपी लिंक

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फिर कहा कि जो आरोपी अदालत की कार्यवाही और जांच से जानबूझकर बचता है तथा फरार घोषित हो चुका हो, उसे सामान्यतः अग्रिम जमानत जैसी असाधारण राहत नहीं दी जा सकती। जस्टिस विवेक कुमार सिंह की पीठ ने आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोपी एक व्

जानिये क्या है मामला

मामले में दर्ज एफआईआर में आरोप है कि आरोपी माशू उर्फ अमन जोशी के खिलाफ थाना - छाता, जिला - आगरा में मुकदमा दर्ज है। आरोप है कि उसने विवाह का झांसा देकर पीड़िता से शारीरिक संबंध बनाए, जबकि वह पहले से विवाहित था। जब पीड़िता को उसकी शादीशुदा होने की जानकारी मिली और उसने विवाह के लिए दबाव बनाया, तो आरोपी ने शादी से इनकार कर दिया और कथित रूप से उसे धमकाया। लगातार मानसिक प्रताड़ना से परेशान होकर पीड़िता ने 31 जनवरी 2026 को आत्महत्या कर ली। आरोपी ने हाईकोर्ट में दलील दी कि उसने पीड़िता को आत्महत्या के लिए न तो उकसाया और न ही उसकी कोई ऐसी मंशा थी जिससे आत्महत्या का अपराध बनता हो।

आत्मसमर्पण को बोला गया था

राज्य सरकार और शिकायतकर्ता की ओर से बताया गया कि आरोपी पहले एफआईआर रद्द कराने हाईकोर्ट आया था, जहां उसे आत्मसमर्पण कर नियमित जमानत लेने को कहा गया था। लेकिन उसने अदालत के आदेश का पालन नहीं किया, जिसके बाद उसके खिलाफ धारा 82 सीआरपीसी के तहत उद्घोषणा की कार्रवाई शुरू हुई। बाद में उसने जांच में सहयोग का आश्वासन देकर वह कार्रवाई निरस्त कराई, लेकिन इसके बावजूद वह फिर जांच से बचता रहा और दोबारा उद्घोषणा की कार्रवाई शुरू करनी पड़ी।

जानबूझकर एजेंसियों से दूर रहा

इन परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपी ने स्वयं दिए गए आश्वासन का भी पालन नहीं किया और जानबूझकर जांच एजेंसी की पहुंच से बाहर रहा। सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए अदालत ने कहा कि फरार या उद्घोषित अपराधी सामान्यतः अग्रिम जमानत का हकदार नहीं होता। इन्हीं कारणों से अदालत ने माना कि यह मामला अग्रिम जमानत देने योग्य दुर्लभ और असाधारण श्रेणी का नहीं है और आरोपी की याचिका को खारिज कर दिया।

Powered by Nyaya 247 News

संबंधित ख़बरें

इसी विषय की और ख़बरें →
गुजरात में नौवाहनविभाग और नौवहन कानूनों पर कार्यशाला का उद्घाटन
अपराध

गुजरात में नौवाहनविभाग और नौवहन कानूनों पर कार्यशाला का उद्घाटन

सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में बड़े मामलों की सुनवाई
अपराध

सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में बड़े मामलों की सुनवाई

राममंदिर चढ़ावा चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट में 10 अगस्त को सुनवाई
अपराध

राममंदिर चढ़ावा चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट में 10 अगस्त को सुनवाई

भाजपा हमलावर, अदालत ने बोला झूठे थे उत्पीड़न के आरोप बृजभूषण शरण सिंह केस पर
अपराध

भाजपा हमलावर, अदालत ने बोला झूठे थे उत्पीड़न के आरोप बृजभूषण शरण सिंह केस पर

लाइव लॉ इलाहाबाद उच्च न्यायालय के महत्वपूर्ण आदेश और निर्णय - 3 अगस्त - 9 अगस्त, 2026
अपराध

लाइव लॉ इलाहाबाद उच्च न्यायालय के महत्वपूर्ण आदेश और निर्णय - 3 अगस्त - 9 अगस्त, 2026

न्यायालय की संवेदनशीलता पुस्तिका
अपराध

न्यायालय की संवेदनशीलता पुस्तिका

दिल्ली केस में भाग जाने वाली पत्नी और ससुर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज
अपराध

दिल्ली केस में भाग जाने वाली पत्नी और ससुर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज

पटना हाईकोर्ट ने पुलिस हिरासत के बाद दिया व्यक्ति के लापता होने के मामले में सीबीआई जांच का आदेश
अपराध

पटना हाईकोर्ट ने पुलिस हिरासत के बाद दिया व्यक्ति के लापता होने के मामले में सीबीआई जांच का आदेश

ताज़ा ख़बरें