आरोप - RMC कानून से ऊपर नहीं, शहर में बेदखली के खिलाफ आंदोलन की चेतावनी
रांची के पथ विक्रेताओं ने नगर निगम के अतिक्रमण हटाओ अभियान का विरोध किया है। उनका आरोप है कि नगर निगम स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट, 2014 और झारखंड सरकार की पथ विक्रेता नीति का उल्लंघन कर रहा है। संगठनों ने मांग की है कि बेदखली की कार्रवाई रोकी जाए, सभी पथ विक्रेताओं का सर्वे कर पहचान पत्र दिया जाए और विधिवत वेंडिंग जोन विकसित किए जाएं। यदि मांगें नहीं मानी जाती हैं, तो आंदोलन को बड़े स्तर पर लागू किया जाएगा।

सौजन्य से:- ETV Bharat
"कानून से ऊपर नहीं है RMC": पथ विक्रेताओं का आरोप, स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट के उल्लंघन पर आंदोलन की चेतावनी
रांची के पथ विक्रेताओं ने नगर निगम द्वारा चलाए जा रहे अतिक्रमण हटाओ अभियान का विरोध किया है.
Published : July 10, 2026 at 4:38 PM IST
रांची: रांची नगर निगम (RMC) द्वारा शहर में चलाए जा रहे अतिक्रमण हटाओ अभियान को लेकर पथ विक्रेताओं का विरोध तेज हो गया है. इंडियन हॉकर एलायंस (IHA) और एआईटीयूसी (AITUC) ने शुक्रवार को नगर निगम पर स्ट्रीट वेंडर्स (जीविका संरक्षण एवं सड़क विक्रय विनियमन) अधिनियम, 2014, झारखंड सरकार की पथ विक्रेता नीति और न्यायालय के निर्देशों की अनदेखी करने का आरोप लगाया. संगठनों का कहना है कि नगर निगम कानून का पालन किए बिना गरीब पथ विक्रेताओं की रोजी-रोटी छीन रहा है.
प्रदर्शन के दौरान नेताओं ने सवाल उठाया कि क्या रांची नगर निगम कानून से ऊपर है? उनका कहना था कि पिछले कई सप्ताह से शहर के विभिन्न इलाकों में पुलिस बल और निगम की टीम के साथ पथ विक्रेताओं को हटाने की कार्रवाई की जा रही है. आरोप है कि न तो विक्रेताओं को पूर्व सूचना दी जा रही है, न सर्वे कराया गया और न ही वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराया गया. ऐसे में वर्षों से कारोबार कर रहे हजारों छोटे दुकानदारों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है.
संगठनों ने विशेष रूप से मोरहाबादी के लगभग 40 वर्ष पुराने साप्ताहिक बाजार का मुद्दा उठाया. उनका कहना है कि इस बाजार में बड़ी संख्या में ग्रामीण, किसान और महिला पथ विक्रेता अपनी उपज और सामान बेचकर परिवार का भरण-पोषण करते थे. नगर निगम ने बिना वैकल्पिक व्यवस्था किए बाजार को बंद कर दिया, जिससे सैकड़ों परिवारों की आय प्रभावित हुई है.
आईएचए और एआईटीयूसी के नेताओं ने कहा कि स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट, 2014 के अनुसार किसी भी पथ विक्रेता को हटाने से पहले सर्वेक्षण कराया जाना चाहिए, टाउन वेंडिंग कमेटी की प्रक्रिया पूरी होनी चाहिए, पहचान पत्र जारी किए जाने चाहिए और वेंडिंग जोन निर्धारित किए जाने चाहिए. इसके बाद ही किसी तरह की बेदखली की कार्रवाई की जा सकती है. उनका आरोप है कि रांची नगर निगम ने इन कानूनी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया.
आईएचए और एआईटीयूसी के नेता संदीप वर्मा ने कहा कि नगर निगम की कार्रवाई गरीबों की आजीविका पर सीधा हमला है. उन्होंने आरोप लगाया कि बिना वैधानिक प्रक्रिया अपनाए पथ विक्रेताओं को हटाया जा रहा है, जो स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट के साथ-साथ न्यायालय के निर्देशों का भी उल्लंघन है.
वहीं, सीपीआई नेता महेंद्र पाठक ने कहा कि पथ विक्रेता शहर की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं. सरकार और नगर निगम का दायित्व है कि उन्हें संरक्षण दिया जाए, न कि उनकी आजीविका समाप्त की जाए. उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन ने जल्द ही इस मामले में सकारात्मक पहल नहीं की तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा.
संगठनों ने मांग की है कि शहर में चल रही बेदखली की कार्रवाई तत्काल रोकी जाए, सभी पथ विक्रेताओं का सर्वे कर उन्हें पहचान पत्र दिया जाए, विधिवत वेंडिंग जोन विकसित किए जाएं तथा जिन लोगों की दुकानें हटाई गई हैं, उनका शीघ्र पुनर्वास किया जाए. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सात दिनों के भीतर उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो रांची में बड़े स्तर पर आंदोलन शुरू किया जाएगा.
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