पेपर लीक के खिलाफ तेज न्याय, राउज एवेन्यू कोर्ट में फास्ट ट्रैक अदालत का गठन
राउज एवेन्यू कोर्ट में विशेष फास्ट ट्रैक अदालत का गठन किया गया है जो पेपर लीक के मामलों की तेज व संतुलित सुनवाई करेगी। सार्वजनिक परीक्षाओं में नकल, पेपर लीक की होगी त्वरित सुनवाई। समयबद्ध फैसले से छात्रों का परीक्षा प्रणाली में भरोसा बहाल होगा।

सौजन्य से:- Jagran
अब 'तारीख पर तारीख' नहीं? जानें पेपर लीक के मामलों के लिए बने फास्ट ट्रैक कोर्ट के पीछे का पूरा प्लान
केंद्र सरकार के पेपर लीक कानून के तहत अब राउज एवेन्यू कोर्ट में विशेष फास्ट ट्रैक अदालत का गठन किया है। यह कोर्ट नीट-यूजी सहित सार्वजनिक परीक्षाओं में ...और पढ़ें
HighLights
- राउज एवेन्यू कोर्ट में पेपर लीक मामलों के लिए विशेष फास्ट ट्रैक अदालत।
- नीट-यूजी सहित सार्वजनिक परीक्षाओं में नकल, पेपर लीक की होगी त्वरित सुनवाई।
- समयबद्ध फैसले से छात्रों का परीक्षा प्रणाली में भरोसा बहाल होगा।
रीतिका मिश्रा, नई दिल्ली। केंद्र सरकार के पेपर लीक के खिलाफ सख्ती के एलान के बाद अब सबसे बड़ी परीक्षा न्यायिक व्यवस्था की है। राउज एवेन्यू कोर्ट अब तक सांसदों, विधायकों और भ्रष्टाचार से जुड़े हाई-प्रोफाइल मामलों की सुनवाई के लिए जानी जाती रही है। अब इसी परिसर में गठित विशेष फास्ट ट्रैक अदालत सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 के तहत दर्ज मामलों की सुनवाई का केंद्र बनेगी।
विशेष अदालत में कैसे मामले सुने जाएंगे?
यह विशेष अदालत देशभर के लाखों छात्रों की उम्मीदों का केंद्र बनने जा रही है। आने वाले समय में यह अदालत तय करेगी कि पेपर लीक के खिलाफ बनाए गए नए कानूनी ढांचे का वास्तविक असर जमीन पर कितना दिखाई देता है। अदालत में नीट-यूजी पेपर लीक से जुड़े मामलों के साथ-साथ सार्वजनिक परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक, संगठित नकल और अन्य अनुचित साधनों से जुड़े वे आपराधिक मामले सुने जाएंगे, जो इस कानून के दायरे में आते हैं।
तेज होगी पेपर लीक मामलों की सुनवाई
मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय ने दिल्ली उच्च न्यायिक सेवा की वरिष्ठ न्यायाधीश अनु ग्रोवर बलिगा को इसकी जिम्मेदारी सौंपी है। कानूनी जानकारों का मानना है कि इस अदालत का सबसे बड़ा महत्व इसकी विशेष प्रकृति में है। अब तक पेपर लीक और परीक्षा संबंधी अपराधों की सुनवाई विभिन्न अदालतों में अन्य मामलों के साथ होती थी। नई व्यवस्था में ऐसे मामलों को प्राथमिकता मिलने की उम्मीद है। इससे एक जैसी प्रकृति के मामलों में न्यायिक दृष्टिकोण भी अधिक एकरूप हो सकता है और सुनवाई की प्रक्रिया अपेक्षाकृत तेज हो सकती है।
समय पर फैसले से मिलेगी राहत
अभिभावक संगठनों ने भी इस कदम का स्वागत किया है। अभिभावकों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में प्रतियोगी और भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं ने लाखों छात्रों की मेहनत और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए हैं। ऐसे में यदि विशेष अदालत समयबद्ध फैसले देती है तो यह केवल कानूनी कार्रवाई नहीं होगी, बल्कि छात्रों का भरोसा बहाल करने की दिशा में भी बड़ा कदम होगा।
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इस अदालत में कौन-कौन से मामले आ सकते हैं?
- नीट-यूजी पेपर लीक मामला
- सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम के तहत दर्ज मामला
- प्रवेश परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक
- भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक और संगठित नकल
- परीक्षा प्रक्रिया में हस्तक्षेप और अनुचित साधनों से जुड़े अपराध
- सीबीआई या अन्य एजेंसियों द्वारा जांच किए गए संबंधित मामले
फास्ट ट्रैक कोर्ट कैसे करेगी काम?
- विशेष श्रेणी के मामलों की सुनवाई
- अलग रोस्टर और प्राथमिकता आधारित सूची
- नियमित और अपेक्षाकृत तेज सुनवाई
- गवाहों और साक्ष्यों की शीघ्र रिकार्डिंग पर जोर
- मामलों के त्वरित निस्तारण का लक्ष्य
"जांच समय पर पूरी होगी और मजबूत आरोपपत्र अदालत में पेश किए जाएंगे तो दोषियों को जल्द सजा मिल सकेगी। इससे परीक्षा प्रणाली में छात्रों का भरोसा मजबूत करने में मदद मिलेगी।"
-अशोक अग्रवाल, अधिवक्ता, दिल्ली हाई कोर्ट।
"फास्ट ट्रैक कोर्ट का उद्देश्य तभी पूरा होगा जब जांच, अभियोजन और न्यायिक प्रक्रिया एक साथ गति पकड़ें। केवल अदालत का गठन पर्याप्त नहीं है। गवाहों की पेशी, साक्ष्यों का संकलन और समयबद्ध सुनवाई भी उतनी ही महत्वपूर्ण होगी।"
-खगेश झा, वरिष्ठ अधिवक्ता, दिल्ली हाई कोर्ट।
"फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित करना बहुत ही अच्छा कदम है। अब ऐसे मामलों में कम से कम तारीख पे तारीख तो नहीं लगेगी और त्वरित निस्तारण होगा। ये कदम दिखाता है कि सरकार कितनी गंभीर है ऐसे मामलों को लेकर।"
-मोनिका अरोड़ा, अधिवक्ता, दिल्ली हाई कोर्ट।
कौन हैं अनु ग्रोवर बलिगा?
विशेष अदालत की कमान संभालने वाली न्यायाधीश अनु ग्रोवर बलिगा को अनुभवी और दक्ष न्यायिक अधिकारी माना जाता है। वर्ष 2000 में दिल्ली न्यायिक सेवा में शामिल होने के बाद उन्होंने तीस हजारी स्थित जिला अदालत से अपने करियर की शुरुआत की। वर्ष 2010 में वह दिल्ली उच्च न्यायिक सेवा में पहुंचीं।
द्वारका, पटियाला हाउस, साकेत और तीस हजारी सहित कई अदालतों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाने के दौरान उन्होंने न्यायिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर काम किया। वर्ष 2022 में वह कुछ समय के लिए राउज एवेन्यू स्थित जिला अदालत में विशेष सीबीआइ न्यायाधीश भी रहीं। साकेत स्थित वाणिज्यिक अदालत में उनके न्यायालय को मामलों के तेज निस्तारण के लिए जाना जाता था।
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