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सुप्रीम कोर्ट का DMK को सख्त संदेश: न्यायालय को राजनीति का मंच न बनाएं

सुप्रीम कोर्ट ने DMK की याचिका खारिज करते हुए कहा कि वह अपने राजनीतिक विरोधियों से निपटने के लिए कोर्ट का इस्तेमाल एक राजनीतिक मंच के रूप में नहीं कर सकते। कोर्ट ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री को बयान देने से रोकने की मांग को खारिज कर दिया।

8 जुलाई 2026 को 04:57 am बजे
सुप्रीम कोर्ट का DMK को सख्त संदेश: न्यायालय को राजनीति का मंच न बनाएं

सौजन्य से:- Hindustan

SC ने DMK को क्यों फटकारा? CM विजय को दी राहत; कहा- कोर्ट को राजनीति का अखाड़ा न बनाएं

सुप्रीम कोर्ट में बहस के दौरान अधिवक्ता रंजीत कुमार ने दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के मामले का हवाला दिया जहां देश की सर्वोच्च अदालत ने केजरीवाल को मामले से जुड़े बयान न देने की शर्त रखी थी।

Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) की उस याचिका को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय को करूर भगदड़ मामले पर बयान देने से रोकने की मांग की गई थी। देश की सर्वोच्च अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए द्रमुक को दोटूक कहा कि वे अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों से निपटने के लिए कोर्ट का इस्तेमाल एक राजनीतिक मंच के रूप में न करें। अदालत ने यह भी सवाल उठाया कि कोई अदालत भला किसी राज्य के निर्वाचित प्रमुख को यह कैसे बता सकती है कि उन्हें क्या बोलना चाहिए और क्या नहीं।

सुनवाई की शुरुआत में ही न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने मुख्यमंत्री और राज्य के अन्य मंत्रियों के खिलाफ दायर इस याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। पीठ ने तीखी टिप्पणी करते हुए पूछा, "क्या आप चाहते हैं कि मुख्यमंत्री का संदेश सुप्रीम कोर्ट द्वारा रेगुलेट किया जाए और हम उनका यात्रा कार्यक्रम तय करें?"

फ्री स्पीच पर नहीं लगा सकते रोक

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता रंजीत कुमार ने दलील दी कि टीवीके (TVK) सरकार के मंत्री सार्वजनिक रूप से ऐसे बयान दे रहे हैं जो इस भगदड़ मामले में एक खास नैरेटिव तैयार कर रहे हैं। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि पीड़ितों के परिवारों को मुआवजा और अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरियां दी जा रही हैं जो संभावित गवाहों को प्रभावित कर सकती हैं।

पीठ ने कहा, "तो क्या आप चाहते हैं कि हम अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगा दें? अगर वे कोई बयान दे रहे हैं तो आप भी अपने भाषण से उसका जवाब दीजिए। एक ऐसे मामले में जहां सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही सीबीआई (CBI) जांच के आदेश दे दिए हैं हम किसी राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी को इस तरह पक्षकार बनाने की अनुमति कैसे दे सकते हैं?"

केजरीवाल मामले से तुलना पर कोर्ट की आपत्ति

बहस के दौरान अधिवक्ता रंजीत कुमार ने दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के मामले का हवाला दिया जहां सुप्रीम कोर्ट ने केजरीवाल को मामले से जुड़े बयान न देने की शर्त रखी थी। उन्होंने मांग की कि ऐसा ही आदेश तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के खिलाफ भी पारित किया जाए। पीठ ने तुरंत इस तर्क को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि अरविंद केजरीवाल उस मामले में खुद एक आरोपी थे, जबकि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री इस मामले में आरोपी नहीं हैं।

जब द्रमुक के वकील ने दावा किया कि मुख्यमंत्री विजय इस मामले में आरोपी नंबर एक हैं तो अदालत ने उन्हें तथ्यों को दोबारा जांचने की हिदायत दी। अदालत ने याद दिलाया कि द्रमुक (DMK) सरकार के खुद के कार्यकाल के दौरान दर्ज की गई पहली प्राथमिकी (FIR) में मुख्यमंत्री का नाम कहीं भी शामिल नहीं था। वरिष्ठ अधिवक्ता नीरज किशन कौल ने भी अदालत के सामने पुष्टि की कि मुख्यमंत्री विजय इस मामले में आरोपी नहीं हैं।

याचिका वापस लेने को मजबूर हुई द्रमुक

सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख, तीखे सवालों और कानूनी आधार की कमी को देखते हुए याचिकाकर्ता ने मामले को आगे बढ़ाने से पीछे हटना ही बेहतर समझा। द्रमुक के वकील ने अदालत से याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी, जिसे पीठ ने स्वीकार करते हुए याचिका को खारिज कर दिया।

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लेखक के बारे में

Himanshu Jhaबिहार के दरभंगा जिले से ताल्लुक रखने वाले हिमांशु शेखर झा डिजिटल मीडिया जगत का एक जाना-माना नाम हैं। विज्ञान पृष्ठभूमि से होने के बावजूद (BCA और MCA), पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून के कारण उन्होंने IGNOU से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया और मीडिया को ही अपना कर्मक्षेत्र चुना।

एक दशक से भी अधिक समय का अनुभव रखने वाले हिमांशु ने देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों जैसे दैनिक भास्कर, न्यूज़-18 और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दी हैं। वर्तमान में, वे वर्ष 2019 से लाइव हिन्दुस्तान के साथ जुड़े हुए हैं।

हिमांशु की पहचान विशेष रूप से राजनीति के विश्लेषक के तौर पर होती है। उन्हें बिहार की क्षेत्रीय राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति की गहरी और बारीक समझ है। एक पत्रकार के रूप में उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों और कई विधानसभा चुनावों को बेहद करीब से कवर किया है, जो उनके वृहद अनुभव और राजनीतिक दृष्टि को दर्शाता है।

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