FSSAI ने पैकेट पर लाल चेतावनी निशान लगाने का प्रस्ताव रखा, SC के आदेश के बाद
सुप्रीम कोर्ट के सख्त आदेश के पश्चात फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया ने डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों पर लाल 6‑कोण वाला चेतावनी निशान लगाने का प्रस्ताव दायर किया है। यह निशान उन उत्पादों पर लगाया जाएगा जिनमें चीनी, संतृप्त वसा या नमक की मात्रा तय मानकों से अधिक हो, तथा दो‑चरणीय कार्यान्वयन के तहत पहले उन पर लागू होगा जिनमें दो या अधिक तत्व अधिक हों।

सौजन्य से:- ABP News
SC की सख्ती के बाद FSSAI सक्रिय, खाद्य पदार्थों के पैकेट पर स्वास्थ्य चेतावनी लगाने का प्रस्ताव
कोर्ट की सख्ती के बाद अब FSSAI ने छह पन्नों का हलफनामा दाखिल किया है. इसमें कहा गया है कि डिब्बा बंद खाद्य पदार्थ के पैकेट पर स्वास्थ्य चेतावनी निशान लगाया जाएगा.
डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों के सेहत पर असर को लेकर जल्द ही एक बड़ा कदम उठाया जा सकता है. फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया यानी FSSAI ने सुप्रीम कोर्ट में इस बारे में एक हलफनामा दायर किया है. FSSAI ने पैकेज्ड फूड प्रोडक्ट्स पर लाल रंग का 6 कोण वाला (Hexagonal) चेतावनी निशान लगाने का प्रस्ताव रखा है. यह लेबल उन खाद्य पदार्थों पर लगाया जाएगा जिनमें चीनी, सैचुरेटेड फैट या नमक की मात्रा तय मानकों से अधिक होगी.
क्या है मामला?
यह हलफनामा जिस मामले में दाखिल हुआ है वह FOPL (फ्रंट ऑफ पैकेट वार्निंग लेबल) से जुड़ा है. आसान भाषा में कहें तो यह खाने की चीज़ों के पैकेट में ज़्यादा वसा (सैचुरेटेड फैट), चीनी या नमक की मात्रा के बारे में चेतावनी देने का मामला है. इस साल फरवरी में कोर्ट ने पैकेट के सामने साफ चेतावनी लिखने को लेकर कदम उठाने के लिए कहा था. कोर्ट का मानना था कि इस तरह का निशान देख कर लोग सामान खरीदते समय सही और सेहतमंद चीज़ चुन सकेंगे.
कोर्ट का सख्त रवैया
13 अगस्त को हुई सुनवाई में जस्टिस जे बी पारडीवाला और जस्टिस के विनोद चंद्रन ने देश में चेतावनी लेबल लगाने में देरी करने पर FSSAI को कड़ी फटकार लगाई थी. कोर्ट ने कहा था कि FSSAI बड़ी कंपनियों और कॉरपोरेट घरानों के दबाव में आकर देश के लोगों और बच्चों की सेहत से खिलवाड़ कर रहा है.
FSSAI का प्रस्ताव
कोर्ट की सख्ती के बाद अब FSSAI ने छह पन्नों का हलफनामा दाखिल किया है. इसमें कहा गया है कि डिब्बा बंद खाद्य पदार्थ के पैकेट पर स्वास्थ्य चेतावनी निशान लगाया जाएगा. यह पूरी तरह स्पष्ट होगा, ताकि आम उपभोक्ता और बच्चे इसे आसानी से समझ सकें.
हलफनामे में कहा गया है :-
- पैकेट के सामने के हिस्से पर लाल रंग का 6 कोण वाला निशान दिखेगा.
- प्रोडक्ट में मौजूद सामग्री के आधार पर उस पर "हाई फैट", "हाई शुगर" या "हाई साल्ट" लिखा होगा.
- हानिकारक वसा, सोडियम या शक्कर के स्तर के निर्धारण के लिए इंडियन काउंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च के राष्ट्रीय पोषण संस्थान की तरफ से 2024 में तय मानकों को आधार बनाया जाएगा.
- यह चेतावनी पैकेट के पीछे छपने वाले न्यूट्रिशन टेबल के फॉन्ट से एक पॉइंट बड़े साइज में छापी जाएगी ताकि उपभोक्ता का ध्यान तुरंत आकर्षित हो.
2 चरणों में लागू होगी प्रक्रिया
खाद्य उद्योग को अपने उत्पादों के फॉर्मूले में सुधार का मौका देने और उपभोक्ताओं को तुरंत जानकारी उपलब्ध कराने के लिए FSSAI ने दो चरणों की योजना बनाई है -
- पहला चरण - उन खाद्य पदार्थों पर लेबल लगाना अनिवार्य किया जाएगा जिनमें फैट, चीनी और नमक में से दो या दो से अधिक तत्व ज्यादा मात्रा में हैं. इसमें मीठे पेय पदार्थ शामिल होंगे.
- दूसरा चरण - नियम का विस्तार उन सभी उत्पादों तक कर दिया जाएगा जिनमें कोई एक भी तत्व सीमा से अधिक पाया जाएगा.
प्राकृतिक उत्पादों को मिलेगी छूट
ऐसे उत्पाद जिनमें प्राकृतिक रूप से फैट, नमक या चीनी से अधिक है या जो सिर्फ एक घटक (सिंगल इंग्रीडिएंट) से बने हैं, उन्हें इस नियम से छूट दी जाएगी. इनमें घी, खाद्य तेल, नमक, चीनी, गुड़ और शहद शामिल हैं.
कोर्ट लेगा फैसला
इससे पहले FSSAI ने स्वास्थ्य चेतावनी छापने की बजाय पैकेट पर सिर्फ यह लिखने का प्रस्ताव दिया था कि किसी व्यक्ति के लिए हर दिन कितना फैट, शुगर और सोडियम ज़रूरी है. इस पर कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई थी. कोर्ट ने कहा था कि क्या आम उपभोक्ता या बच्चे इस तरह की जानकारी को समझकर उसके मुताबिक फैसला ले पाएंगे? कोर्ट की सख्ती के बाद अब FSSAI ने नया प्रस्ताव दिया है. मामले की अगली सुनवाई 10 सितंबर को हो सकती है. कोर्ट के आदेश से ही तय होगा कि यह प्रस्ताव लागू होगा या इसमें कुछ और बदलाव किया जाएगा.
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